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4 min read | अपडेटेड September 02, 2026, 11:00 IST
सारांश
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध जैसी स्थिति बन रही है। मंगलवार देर रात अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान पर नए हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी सेना ने IRGC के जिन ठिकानों पर हमला किया, उनमें एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री संपत्तियां और सुविधाएं, माइन बिछाने की क्षमताएं और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल हैं।

आज ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 4 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 96 डॉलर के पार चला गया।
भारतीय शेयर बाजार में आज 02 सितंबर को लगातार तीसरे कारोबारी दिन जमकर बिकवाली हो रही है। आज के कारोबार में BSE Sensex में 809 अंकों की बड़ी गिरावट देखी गई और यह 76,135.72 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी 269 अंकों कमजोरी के साथ 23,786.80 के लेवल तक लुढ़क गया। हालांकि बाद में बाजार ने कुछ रिकवरी भी दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते आज क्रूड ऑयल के भाव में तगड़ा उछाल आया। यहां हम समझेंगे कि बाजार में आज की गिरावट के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध जैसी स्थिति बन रही है। मंगलवार देर रात अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान नए हमले किए हैं। सेना ने बताया कि उसने IRGC के ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी सेना ने IRGC के जिन ठिकानों पर हमला किया, उनमें एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री संपत्तियां और सुविधाएं, माइन बिछाने की क्षमताएं और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल हैं।
इस बीच शिपिंग से जुड़े जोखिम भी बढ़ गए हैं। UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स सेंटर के अनुसार सोमवार को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज से गुजरते समय एक टैंकर पर तीन अज्ञात मिसाइल या रॉकेट जैसे हथियार से हमला हुआ। इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के दक्षिणी हिस्से में एक शादी समारोह वाले घर पर भी अमेरिकी मिसाइल से हमला हुआ। इस घटना में एक बच्चे समेत 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इन खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इसके जवाब में तेहरान ने जॉर्डन, कुवैत, इराक और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं।
जियो पॉलिटिकल टेंशन का असर आज क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी दिख रहा है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 4 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 96 डॉलर के पार चला गया। इसके अलावा US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.46% बढ़कर $91.54 प्रति बैरल हो गया। बता दें कि भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ता है।
वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड्स में भारी उछाल आया है। US की 10-साल की बॉन्ड यील्ड अब 4.8% पर है, जो 14 जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। बॉन्ड यील्ड आम तौर पर तब बढ़ती है जब निवेशक महंगाई, फिस्कल रिस्क और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना के बदले ज्यादा रिटर्न की मांग करते हैं। पश्चिम एशिया में US-ईरान के बीच तनाव और उसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी एक अहम वजह है। इसकी वजह से निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे एसेट से पैसा निकालकर बॉन्ड मार्केट की ओर जा रहे हैं।
जैक्सन होल मीटिंग में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का रुख उम्मीद से ज्यादा हॉकिश था। इसकी वजह से अगले महीने US फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें बढ़ गईं। वॉर्श का कहना है कि फेड को यह भरोसा होना चाहिए कि महंगाई लगातार 2% के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो फेड को महंगाई पर काबू पाने के लिए और काम करना पड़ सकता है। वॉर्श के बयान के बाद सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना सोमवार तक बढ़कर 66.1% हो गई। यह भाषण से पहले की संभावना के मुकाबले लगभग दोगुनी है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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