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US-Iran Tension: ईरान पर कड़े प्रतिबंध की तैयारी, क्या अमेरिका और चीन के बीच बढ़ सकता है टकराव?

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड August 21, 2026, 13:12 IST

सारांश

चीन अमेरिका का बड़ा व्यापारिक साझेदार है और कई महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों की सप्लाई में भी उसकी अहम भूमिका है। ऐसे में ईरान को लेकर दोनों देशों के बीच नया विवाद आर्थिक रिश्तों को और जटिल बना सकता है।

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ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को “आर्थिक आतंकवाद” बताया है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर इतिहास के “सबसे कड़े प्रतिबंध” लगाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब दोनों देशों के बीच तनाव और सैन्य टकराव का खतरा बना हुआ है। बेसेंट के मुताबिक, नए प्रतिबंध मौजूदा अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी को और मजबूत करेंगे।

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अमेरिका का क्या है प्लान?

CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक बेसेंट ने कहा कि अमेरिका की रणनीति में दो चीजें शामिल होंगी- ईरान पर मौजूदा आर्थिक नाकेबंदी और नए बेहद सख्त प्रतिबंध। उनका कहना है कि अधिकतम आर्थिक दबाव डालने से ईरान पर दबाव बढ़ेगा और बड़े स्तर पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की जरूरत कम हो सकती है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन प्रतिबंधों की ज्यादा जानकारी दे सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक दिन पहले ईरान के खिलाफ “अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव” की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि जो देश या कंपनियां ईरान को किसी तरह की मदद या आर्थिक सहारा देंगी, उन्हें भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

चीन पर भी पड़ सकता है असर

यहीं से अमेरिका और चीन के बीच टकराव की आशंका बढ़ती है। ईरान के तेल कारोबार में चीन की बड़ी भूमिका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में ईरान से समुद्र के रास्ते होने वाली तेल खरीद का 80% से ज्यादा हिस्सा चीन ने खरीदा था। ऐसे में अगर अमेरिका नए प्रतिबंध ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों और देशों तक बढ़ाता है, तो चीनी कंपनियां भी इसकी चपेट में आ सकती हैं।

जब बेसेंट से चीन के खिलाफ कार्रवाई की संभावना पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कुछ बातचीत सार्वजनिक तौर पर करने के बजाय निजी तौर पर करना बेहतर है। हालांकि, चीन ने अमेरिका के प्रतिबंधों और दबाव की नीति का विरोध किया है और कहा है कि विवाद का समाधान राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से होना चाहिए।

अमेरिका-चीन रिश्तों के लिए नई चुनौती

अगर अमेरिका ईरान के तेल कारोबार से जुड़ी चीनी कंपनियों पर कार्रवाई करता है, तो इसका असर पहले से तनावपूर्ण अमेरिका-चीन संबंधों पर पड़ सकता है। चीन अमेरिका का बड़ा व्यापारिक साझेदार है और कई महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों की सप्लाई में भी उसकी अहम भूमिका है। ऐसे में ईरान को लेकर दोनों देशों के बीच नया विवाद आर्थिक रिश्तों को और जटिल बना सकता है।

ईरान ने बताया ‘आर्थिक आतंकवाद’

ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को “आर्थिक आतंकवाद” बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस तरह का दबाव देश को अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा करने से पीछे नहीं हटाएगा। ईरान पर अमेरिका की आर्थिक पाबंदियां करीब पांच दशक से चली आ रही हैं और इनमें ऊर्जा, बैंकिंग और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

तेल की कीमतों पर भी असर

अमेरिकी प्रतिबंधों की चेतावनी के बाद तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। बाजार को डर है कि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली शिपिंग प्रभावित हो सकती है। हालांकि, बेसेंट का कहना है कि बाजार शायद अमेरिकी रणनीति को गलत समझ रहा है। उनके मुताबिक अगर अधिकतम आर्थिक दबाव काम करता है, तो बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई की जरूरत कम हो सकती है।

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