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  1. US की ईरान के खिलाफ नई स्ट्रेटेजी, क्रूड ऑयल और बॉन्ड यील्ड समेत इन वजहों से बाजार पर दबाव

मार्केट न्यूज़

US की ईरान के खिलाफ नई स्ट्रेटेजी, क्रूड ऑयल और बॉन्ड यील्ड समेत इन वजहों से बाजार पर दबाव

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड August 21, 2026, 11:01 IST

सारांश

अमेरिका अब ईरान पर सीधे हमले के बजाय आर्थिक दबाव बनाने की तैयार कर रहा है। इसके चलते बाजार में यह डर बन गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव और लंबा चल सकता है। US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि वॉशिंगटन ईरान पर "इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध" लगाएगा।

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अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है।

भारतीय शेयर बाजार में आज 21 अगस्त को शुरुआती कारोबार में तेजी नजर आई। आज के कारोबार में BSE Sensex में 188 अंकों की बढ़त देखी गई और यह 77725.67 के लेवल पर पहुंच गया। इसके अलावा Nifty 50 भी करीब 53 अंक उछलकर 24284.05 के लेवल पर पहुंच गया। हालांकि, इसके बाद बाजार में प्रॉफिट बुकिंग भी देखने को मिली, जिसके चलते बाजार ने अपनी बढ़त का बड़ा हिस्सा गंवा दिया। रिपोर्ट लिखे जाने के समय बाजार में लगभग फ्लैट ट्रेडिंग हो रही थी। यहां हम जानेंगे कि बाजार में आज दबाव की क्या वजहें हैं।

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अमेरिका-ईरान तनाव

अमेरिका अब ईरान पर सीधे हमले के बजाय आर्थिक दबाव बनाने की तैयार कर रहा है। इसके चलते बाजार में यह डर बन गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव और लंबा चल सकता है। US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि वॉशिंगटन ईरान पर "इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध" लगाएगा। इसके साथ ही उन्होंने तेहरान की मदद करने वाले देशों को भी चेतावनी दी है। बेसेंट की बातों से अब ईरान के अलावा चीन समेत उन देशों के साथ भी तनाव बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जो तेहरान के साथ व्यापार करते हैं। यही वजह है कि निवेशकों का बाजार पर भरोसा कमजोर हुआ है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें

अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 93.23 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। महंगे कच्चे तेल के कारण देश का चालू खाता घाटा (CAD) और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उछाल

अमेरिका में 30-साल के ट्रेजरी यील्ड में फिर से बढ़ोतरी हुई है और यह लगभग 5.25 फीसदी पर पहुंच गया है। इसके अलावा 10-साल का यील्ड 4.71 फीसदी तक पहुंच गया। जब भी अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक भारतीय बाजार जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी सुरक्षित बॉन्ड में लगाने लगते हैं। यह भी बाजार में दबाव की एक बड़ी वजह है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बना है। बीते कारोबारी दिन यानी 20 अगस्त को FIIs ने भारतीय बाजार में 583.36 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। FIIs की बिकवाली से शेयर बाजार पर दबाव तो पड़ता ही है, इसके साथ ही रुपये में भी कमजोरी आती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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