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RBI MPC: क्या फरवरी 2023 के बाद पहली बार होगी रेट हाइक? 5-7 अक्टूबर को होने वाली है आरबीआई की बैठक

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड October 03, 2026, 15:53 IST

सारांश

RBI MPC: महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इसके अलावा, दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर भी दबाव बढ़ रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5% कर सकता है।

RBI MPC

अगर RBI अगले सप्ताह रेपो रेट बढ़ाता है, तो फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक होने वाली है। इस बैठक में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या RBI रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा या बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों के बीच ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि RBI अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा सकता है। 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का मतलब है कि ब्याज दर में 0.25 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।

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क्यों बढ़ सकता है रेपो रेट?

महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इसके अलावा, दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर भी दबाव बढ़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5% कर सकता है। दिसंबर में भी एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी

अगर RBI अगले सप्ताह रेपो रेट बढ़ाता है, तो फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। फरवरी 2023 में RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी और इसे 6.5% किया था। इस साल RBI ने अब तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। वहीं, 2025 में RBI ने कुल मिलाकर रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट यानी 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी।

5 से 7 अक्टूबर तक MPC की बैठक

RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच मुंबई में होगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 7 अक्टूबर को समिति के फैसले की घोषणा करेंगे। SBI Research के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की जरूरत पहले की तुलना में ज्यादा दिखाई दे रही है। इसके पीछे बढ़ती महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव, बाजार में नकदी की स्थिति और दुनिया भर में बढ़ता आर्थिक जोखिम प्रमुख कारण हैं।

महंगाई RBI के लक्ष्य से ऊपर

भारत में खुदरा महंगाई, जिसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से मापा जाता है, अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई। जुलाई में यह 4.45% थी। यानी महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। सितंबर की महंगाई के आंकड़े इस महीने के मध्य में जारी किए जाएंगे। SBI Research का कहना है कि महंगाई अब केवल कुछ चीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में इसका असर दिखाई दे रहा है। इससे आने वाले समय में कीमतें और बढ़ने का खतरा हो सकता है।

रेपो रेट क्या है?

रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो आम तौर पर बैंकों के लिए पैसा उधार लेना महंगा हो जाता है। इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI बढ़ सकती है या कर्ज चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है।

आम लोगों पर क्या असर होगा?

ब्याज दर बढ़ने का असर रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और महंगे उपभोक्ता सामान जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि लोगों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है और उनकी खरीदारी कम हो सकती है। दूसरी ओर, FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा रखने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है। ब्याज दरों का माहौल ऊंचा रहने पर कुछ बैंक FD पर ज्यादा ब्याज दे सकते हैं। हालांकि, इसका फायदा बैंक और उसकी जमा दरों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

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