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  1. रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी, कुसुम का दाम 675 रुपये बढ़ा; गेहूं समेत 6 फसलों के नए रेट जारी

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रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी, कुसुम का दाम 675 रुपये बढ़ा; गेहूं समेत 6 फसलों के नए रेट जारी

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 30, 2026, 17:29 IST

सारांश

सरकार के अनुसार नए MSP में उत्पादन लागत के मुकाबले अलग-अलग फसलों के लिए अलग मार्जिन रखा गया है। गेहूं में उत्पादन लागत के ऊपर 106% का मार्जिन है। इसके बाद रेपसीड और सरसों में 96%, मसूर में 92%, चने में 59%, जौ में 58% और कुसुम में 50% का मार्जिन है।

MSP Rabi Crops

सरकार पिछले कुछ वर्षों से अनाज के अलावा दालों और तिलहनों जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा दे रही है।

केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए सभी निर्धारित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने यह फैसला लिया है। सरकार के मुताबिक, रबी फसलों का MSP बढ़ाने का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी कीमत दिलाना है।

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कुसुम के MSP में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए कुसुम (Safflower) के MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद रेपसीड और सरसों (Rapeseed & Mustard) के MSP में 413 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

मसूर (Lentil) के MSP में 390 रुपये, जौ (Barley) में 136 रुपये, चने (Gram) में 83 रुपये और गेहूं (Wheat) के MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। अब 2027-28 के लिए गेहूं का MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल, जौ का 2,286 रुपये, चने का 5,958 रुपये, मसूर का 7,390 रुपये, रेपसीड और सरसों का 6,613 रुपये और कुसुम का 7,215 रुपये प्रति क्विंटल होगा।

उत्पादन लागत से कितना ज्यादा है MSP?

सरकार के अनुसार नए MSP में उत्पादन लागत के मुकाबले अलग-अलग फसलों के लिए अलग मार्जिन रखा गया है। गेहूं में उत्पादन लागत के ऊपर 106% का मार्जिन है। इसके बाद रेपसीड और सरसों में 96%, मसूर में 92%, चने में 59%, जौ में 58% और कुसुम में 50% का मार्जिन है।

यह बढ़ोतरी 2018-19 के केंद्रीय बजट में किए गए उस ऐलान के अनुरूप है, जिसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर रखने की बात कही गई थी। सरकार द्वारा बताई गई उत्पादन लागत में खेत में काम करने वाले मजदूरों की लागत, बैल या मशीन से होने वाली मजदूरी, लीज पर ली गई जमीन का किराया, बीज, खाद, सिंचाई, कृषि उपकरण और भवनों का मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, डीजल-बिजली और परिवार के श्रम का अनुमानित मूल्य जैसी लागत शामिल हैं।

दाल और तिलहन की खेती को बढ़ावा

सरकार पिछले कुछ वर्षों से अनाज के अलावा दालों और तिलहनों जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए इन फसलों के लिए ज्यादा MSP की पेशकश की जा रही है। सरकार के अनुसार, रबी फसलों के MSP में यह बढ़ोतरी किसानों को बेहतर कीमत दिलाने के साथ-साथ फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहित करेगी।

गेहूं और रबी फसलों की खरीद बढ़ी

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं की खरीद बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन (LMT) हो गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 LMT थी। इसी तरह छह रबी फसलों की खरीद 2014-15 से 2025-26 के दौरान बढ़कर 3,921 LMT हो गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह 2302 LMT थी।

MSP के तहत किसानों को कितना भुगतान हुआ?

2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं उगाने वाले किसानों को MSP के तहत 7.31 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह रकम 2.56 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, छह रबी फसलों के किसानों को 2014-15 से 2025-26 के बीच MSP के तहत कुल 8.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह रकम 2.65 लाख करोड़ रुपये थी।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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