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4 min read | अपडेटेड July 02, 2026, 13:35 IST
सारांश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सानाए ताकाइची के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनने की उम्मीद है। दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के लिए AI आधारित समाधान विकसित करने पर साथ काम करेंगे।

जापान की पीएम के इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा हो सकती है।
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची (Sanae Takaichi) बुधवार को अपने पहले भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं। उनके दौरे के दौरान भारत और जापान के बीच 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। इस बैठक में दोनों देश आर्थिक, तकनीक, रक्षा और व्यापार से जुड़े कई अहम समझौतों पर चर्चा करेंगे। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब जापान और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। ऐसे में जापान की पीएम का यह दौरा दोनों ही देशों के लिए अहम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सानाए ताकाइची के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनने की उम्मीद है। दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के लिए AI आधारित समाधान विकसित करने पर साथ काम करेंगे।
इसके अलावा, रिसर्च संस्थानों, टेक कंपनियों और विश्वविद्यालयों के बीच लंबे समय के सहयोग का ढांचा तैयार किया जा सकता है। इसमें मल्टी-लैंग्वेज AI, बड़े भाषा मॉडल (LLMs), AI सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और डेटा सेंटर व सेमीकंडक्टर जैसी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने पर भी फोकस रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान वर्ष 2030 तक 500 उच्च कौशल वाले भारतीय IT प्रोफेशनल्स को अपने यहां काम करने का अवसर देने की योजना बना रहा है।
भारत और जापान डॉलर की बजाय येन और रुपये में सीधे व्यापार करने की व्यवस्था पर भी काम कर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच लेन-देन में डॉलर की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने की लागत कम होगी, पैसे का ट्रांसफर तेज होगा और व्यापार करना आसान बनेगा। यह कदम रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ाने की भारत की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।
इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा हो सकती है। इसमें सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण तकनीक, मजबूत सप्लाई चेन, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा।
बैठक में एडवांस बैटरी टेक्नोलॉजी, फार्मास्युटिकल्स, बायोगैस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग पर भी चर्चा होगी। जापान ओडिशा में प्रस्तावित एक बड़े ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट को समर्थन दे सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन मजबूत करने पर भी दोनों देश साथ काम कर सकते हैं।
भारत और जापान रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत करेंगे। दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर देंगे।
ताइवान को लेकर जापानी प्रधानमंत्री के हालिया बयान के बाद चीन ने जापान पर कई व्यापारिक और निर्यात संबंधी प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में जापान चीन पर निर्भरता कम करने और भारत जैसे साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस दौरे के दौरान भारत और जापान की कंपनियों के बीच करीब 120 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ये समझौते मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों से जुड़े होंगे।
वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.47 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। वहीं भारत में 1,400 से ज्यादा जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं।
गुरुवार को सानाए ताकाइची का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता कई समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे और संयुक्त प्रेस वार्ता को भी संबोधित करेंगे।
इसके अलावा जापानी प्रधानमंत्री इंडिया-जापान बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगी। यह दौरा 2027 में भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने से पहले दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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