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Crude Oil: 19 अप्रैल को खत्म हो रही ईरानी तेल खरीदने की छूट, भारत समेत अन्य देशों पर क्या हो सकता है असर

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड April 15, 2026, 14:07 IST

सारांश

Crude Oil: इस छूट का मकसद यह था कि अचानक सप्लाई रुकने से तेल के दाम बहुत ज्यादा न बढ़ जाएं। अब जब यह राहत खत्म हो रही है, तो इसका असर खासकर एशियाई देशों जैसे India और China पर पड़ने की आशंका है।

Crude Oil

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए इस छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।

Iran Crude Oil: अमेरिका ने ईरानी तेल पर जो 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी, उसे अब खत्म करने का फैसला लिया है। इसका मतलब है कि अब ईरान के तेल पर पूरी तरह सख्ती लागू होगी। 20 मार्च को घोषित यह छूट इस हफ्ते यानी 19 अप्रैल की रात को खत्म होने वाली है। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए इस छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। बता दें कि दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ चुका है, हालांकि बातचीत की उम्मीद भी बनी हुई है।
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क्या हो सकता है असर

इस छूट का मकसद यह था कि अचानक सप्लाई रुकने से तेल के दाम बहुत ज्यादा न बढ़ जाएं। अब जब यह राहत खत्म हो रही है, तो इसका असर खासकर एशियाई देशों जैसे India और China पर पड़ने की आशंका है। ये देश ईरान से तेल खरीदते रहे हैं, इसलिए अब इन्हें दूसरी जगह से तेल खरीदना पड़ेगा, जो महंगा हो सकता है।

स्थिति को और गंभीर बनाता है Strait of Hormuz, जहां अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी कर दी है। यह रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। अगर यहां से सप्लाई प्रभावित होती है, तो अनुमान है कि रोजाना करीब 20 लाख बैरल तेल वैश्विक बाजार से कम हो सकता है, जिससे सप्लाई क्रंच यानी कमी पैदा हो सकती है।

क्यों दी गई थी छूट?

पहले यह छूट इसलिए दी गई थी क्योंकि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं, इसमें करीब 50% तक उछाल आया था। ऐसे में अमेरिका ने एक बैलेंस बनाने की कोशिश की थी, ताकि ईरान पर दबाव भी रहे और बाजार भी पूरी तरह अस्थिर न हो।

लेकिन अब पहले दौर की बातचीत फेल हो चुकी है। हालांकि दूसरे दौर की बातचीत जल्द ही होने की उम्मीद भी है। इस बीच Donald Trump प्रशासन ने सख्ती बढ़ाते हुए 13 अप्रैल को ईरान के बंदरगाहों और जहाजों पर नाकेबंदी लागू कर दी।

अमेरिका के अंदर भी इस फैसले को लेकर दबाव था। दोनों पार्टियों के नेताओं का कहना था कि ऐसे छूट देने से ईरान की अर्थव्यवस्था को मदद मिल रही है, जबकि अमेरिका उससे टकराव में है। इसी तरह रूस को लेकर भी ऐसी चिंताएं थीं।

इसके अलावा, अमेरिका ने चीन, UAE, हांगकांग और ओमान जैसे देशों के बैंकों को चेतावनी दी है कि वे ईरान से जुड़े लेन-देन को रोकें। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने 2024 में करीब 9 बिलियन डॉलर का पैसा अलग-अलग चैनलों के जरिए ट्रांसफर किया था, जिसमें कुछ फ्रंट कंपनियों का इस्तेमाल हुआ। कुल मिलाकर, इस फैसले का मतलब है कि दुनिया में तेल की सप्लाई कम हो सकती है, कीमतें बढ़ सकती हैं और भारत जैसे देशों के लिए तेल खरीदना महंगा हो सकता है।

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