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3 min read | अपडेटेड June 17, 2026, 08:32 IST
सारांश
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर को 60 दिनों के लिए बढ़ाने और हॉर्मुज जलडमरू को दोबारा खोलने के एलान के बाद ब्रेंट क्रूड मार्च के बाद पहली बार 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है। इस बीच निवेशक नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में होने वाली फेडरल रिजर्व की मीटिंग पर नजर बनाए हुए हैं।

सोना-चांदी की कीमतों में दिख सकती है हलचल| Image: Shutterstock
वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। इस समझौते की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिसने सर्राफा बाजार के सेंटिमेंट को भी प्रभावित किया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए की तरफ से सोने के गहनों के रिटेल दाम जारी कर दिए गए हैं। युद्ध के कारण पिछले काफी समय से दबाव झेल रहे सोने को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे नए संकेतों से थोड़ा सपोर्ट मिलता हुआ दिखाई दे रहा है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा 16 जून 2026 की शाम को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में सोने के अलग-अलग कैरेट के दाम तय हो गए हैं। बाजार में फाइन गोल्ड यानी 999 प्योरिटी वाले सोने की कीमत 15,066 रुपये प्रति ग्राम दर्ज की गई है। वहीं, आम तौर पर गहने बनाने के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 14,705 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया है। इसके अलावा, बाजार में 20 कैरेट सोने का दाम 13,409 रुपये प्रति ग्राम, 18 कैरेट सोने का दाम 12,204 रुपये प्रति ग्राम और सबसे कम प्योरिटी वाले 14 कैरेट सोने का भाव 9,718 रुपये प्रति ग्राम रहा है। यह सभी दरें प्रति ग्राम के हिसाब से हैं और इनमें 3 पर्सेंट जीएसटी और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं, जो ग्राहकों को शोरूम में अलग से देने होंगे।
घरेलू बाजार से अलग अगर इंटरनेशनल मार्केट की बात करें, तो 17 जून को सुबह 7:55 बजे के आंकड़ों के अनुसार, यूएस कॉमेक्स पर सोने का भाव 0.22 पर्सेंट की मामूली बढ़त के साथ 4,364.10 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान चांदी का भाव भी 0.84 पर्सेंट की मजबूती के साथ 70.60 डॉलर प्रति औंस पर देखा गया। बाजार में इस स्थिरता के पीछे अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का वह एलान है जिसमें उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते की बात कही है। इस समझौते के तहत अप्रैल में हुए सीजफायर को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है और हॉर्मुज जलडमरू को दोबारा खोल दिया गया है, जिसे ईरान ने फरवरी में अमेरिकी और इजराइली हमले के बाद ब्लॉक कर दिया था। इस एलान के बाद ब्रेंट क्रूड के दाम मार्च के बाद पहली बार 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गए हैं। सोमवार को इस अंतरिम समझौते के एलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 पर्सेंट की भारी गिरावट देखी गई थी।
हाई रिज फ्यूचर्स के मेटल्स ट्रेडिंग डायरेक्टर डेविड मेगर का कहना है कि पिछले दो कारोबारी सत्रों से बाजार को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने के समझौते की उम्मीदों से बड़ा सपोर्ट मिल रहा है। इसके परिणामस्वरूप शॉर्ट टर्म ब्याज दरों में कमी आई है और एनर्जी की कीमतें भी नीचे आई हैं। इससे इस बात की संभावना काफी कम हो गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को इस साल के आखिर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, बाजार ने अब दिसंबर में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद को 70 पर्सेंट से घटाकर 58 पर्सेंट कर दिया है। जब से यह युद्ध शुरू हुआ था, तब से तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका थी, जिससे बिना ब्याज देने वाले सोने पर दबाव बना हुआ था।
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