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4 min read | अपडेटेड September 03, 2026, 09:42 IST
सारांश
एजेंसी ने कहा, ‘भारत की ठोस आर्थिक वृद्धि, वृद्धि की बुनियाद मजबूत करने वाली आर्थिक नीतियों की दक्षता और वित्तीय प्रणाली की मजबूती को देखते हुए भारत की विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा में दीर्घकालिक जारीकर्ता साख को एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दिया है।’

35 साल बाद भारत को मिली A- रेटिंग, JCR के फैसले से निवेशकों को क्या फायदा? (Photo: Shutterstock)
जापान की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर ने बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दी। एजेंसी ने भारत की ‘मजबूत’ आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिति में सुधार के आधार पर रेटिंग बढ़ाई। 35 साल के अंतराल के बाद भारत ने ‘ए-’ रेटिंग हासिल की है। जेसीआर की ‘ए’ रेटिंग वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की उच्च स्तर की निश्चितता को बताती है। जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (जेसीआर) ने भारत की रेटिंग ‘बीबीबी+’ से बढ़ाकर ‘ए-’ किए जाने की घोषणा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा उम्मीद से बेहतर जीडीपी आंकड़े जारी किए जाने के कुछ ही दिन बाद हुई है। आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन के कारण पहली तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.8% रही।
एजेंसी ने कहा, ‘भारत की ठोस आर्थिक वृद्धि, वृद्धि की बुनियाद मजबूत करने वाली आर्थिक नीतियों की दक्षता और वित्तीय प्रणाली की मजबूती को देखते हुए भारत की विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा में दीर्घकालिक जारीकर्ता साख को एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दिया है।’ वित्त मंत्रालय ने कहा कि जेसीआर की रेटिंग में बढ़ोतरी ‘भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, राजकोषीय गुणवत्ता में सुधार, मजबूत वित्तीय प्रणाली और ठोस बाह्य स्थिति’ को दर्शाती है।
15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन. के. सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘रेटिंग बढ़ाया जाना भारत की आर्थिक वृद्धि की गति, वृहद आर्थिक स्थिरता, मजबूत संरचनात्मक सुधारों और केंद्र-राज्य साझेदारी की मजबूती की मान्यता है।’ सिंह ने कहा, ‘35 से अधिक साल बाद ‘ए’ रेटिंग वापस आई है।’ उन्होंने कहा कि मूडीज ने आखिरी बार 1988 में भारत को ‘ए2’ रेटिंग दी थी। 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के समय भारत की रेटिंग घटा दी गई थी।’ पिछले साल प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भारत की साख बढ़ाई है। मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने पिछले साल मई में भारत की रेटिंग बढ़ाई थी। वहीं एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अगस्त, 2025 में और जापान की रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन इंक (आरएंडआई) ने सितंबर, 2025 में भारत की रेटिंग बढ़ाई थी।
जेसीआर ने कहा कि केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2024-25 में 4.7% से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4% रहा, जबकि पूंजीगत व्यय ऊंचा बना रहा। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह रेटिंग बढ़ोतरी चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच हुई है और यह भारत के आर्थिक बुनियाद में लगातार हो रही मजबूती को बताती है। इसे निरंतर आर्थिक वृद्धि, प्रभावी आर्थिक नीतियों, राजकोषीय गुणवत्ता में सुधार और मजबूत वित्तीय प्रणाली का समर्थन मिला है।
जेसीआर ने कहा कि मजबूत निजी खपत और सार्वजनिक निवेश के समर्थन से भारतीय अर्थव्यवस्था ने करीब सात प्रतिशत की ऊंची वृद्धि दर कायम रखी है। पहली तिमाही में दर्ज 7.8% की आर्थिक वृद्धि आरबीआई के 7% की जीडीपी वृद्धि के अनुमान से अधिक रही। जेसीआर ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी और मौजूदा मूल्य पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में 6% से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखने की उम्मीद है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर बीते वित्त वर्ष 7.8% रही।
एजेंसी ने कहा कि भारत सरकार ने उत्पादकता वृद्धि और आर्थिक विकास के अनुकूल नीतियों को लगातार लागू किया है। इनमें डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का विकास और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करना शामिल है। इससे देश की आर्थिक बुनियाद पहले से मजबूत हुई है। जेसीआर ने भारत की वित्तीय प्रणाली की मजबूती का भी उल्लेख किया। उसने कहा कि दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता का लागू करना, सरकार के पूंजी डालने और आरबीआई की मजबूत निगरानी के कारण बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
पिछले महीने दो वैश्विक रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी और फिच ने भी भारत की निवेश-ग्रेड रेटिंग बरकरार रखी थी। उन्होंने भारत की गतिशील और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, नीतियों के मोर्चे पर स्थिरता तथा बुनियादी ढांचे में उच्च निवेश को इसका आधार बताया था। हालांकि, जेसीआर ने भारत के समक्ष मौजूद कुछ संरचनात्मक चुनौतियों का भी उल्लेख किया है। इनमें राजकोषीय घाटे का ऊंचा होना, राज्यों के बीच असमानताओं को कम करने के लिए राजकोषीय हस्तांतरण व्यवस्था और चुनावों को लेकर राजकोषीय प्रबंधन की संवेदनशीलता शामिल हैं।
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