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जीडीपी के 7.8% आंकड़ों पर सरकार ने कही ये बात, जानिए नए बेस ईयर और कमाई का पूरा गणित

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड September 03, 2026, 14:53 IST

सारांश

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही है। सरकार ने पीआईबी के जरिए नए बेस ईयर, डबल डिफ्लेशन और आंकड़ों के रिवीजन पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। इसके साथ ही वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने भी अर्थव्यवस्था की मजबूती का समर्थन किया है।

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भारत की पहली तिमाही की जीडीपी ग्रोथ और नए बेस ईयर पर सरकार का स्पष्टीकरण।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की आर्थिक रफ्तार काफी मजबूत रही है। इस दौरान देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का बड़ा योगदान रहा है। वहीं रियल GVA में 8.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान निवेश में 11.9%, घरेलू खपत में 7.1% और एक्सपोर्ट में 12.0% का उछाल आया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P ने भी भारत की रेटिंग को स्टेबल आउटलुक के साथ बरकरार रखा है।

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आंकड़ों को लेकर खड़े हो रहे सवाल पर सरकार का आया जवाब

जीडीपी के इन आंकड़ों और नए 2022-23 बेस ईयर को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार ने पीआईबी के माध्यम से विस्तृत जानकारी शेयर की है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बताया कि 31 अगस्त 2026 को जारी सीरीज में डबल डिफ्लेशन मैथड और नए प्राइस इंडेक्स का इस्तेमाल किया गया है। मंत्रालय ने साफ किया कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नेगेटिव डिफ्लेटर का मतलब यह नहीं है कि उत्पाद के दाम गिरे हैं। असल में जब इनपुट की कीमतें आउटपुट की कीमतों से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो नॉमिनल GVA ग्रोथ रियल GVA से कम हो जाती है। पहली तिमाही में इनपुट की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिससे नॉमिनल जीवीए 7.7% और रियल जीवीए 9.2% रहा।

पुराने बेस ईयर की तुलना पर दिया जवाब

मंत्रालय ने पिछले साल के जीडीपी आंकड़ों में हुए बदलाव पर भी स्थिति साफ की है। सरकार के अनुसार पिछले साल की पहली तिमाही का आंकड़ा 86 लाख करोड़ रुपये से बदलकर 80 लाख करोड़ रुपये होना कोई जानबूझकर किया गया बदलाव नहीं है। यह बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने और नए डेटा को शामिल करने का नतीजा है। पुराने 2011-12 बेस की तुलना सीधे नई सीरीज से नहीं की जा सकती है। चालू कीमतों पर इस साल की पहली तिमाही का 88.27 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा नई सीरीज के 80.32 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से ही तुलना योग्य है।

माइनिंग सेक्टर और डिफ्लेटर का गणित क्या कहता है?

माइनिंग सेक्टर में रियल और नॉमिनल जीवीए के बड़े अंतर पर सरकार ने बताया कि इस दौरान क्रूड पेट्रोलियम, नेचुरल गैस और मेटल ओर्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते माइनिंग का नॉमिनल जीवीए 22.3% रहा, जबकि आईआईपी आंकड़ों के आधार पर रियल जीवीए माइनस 2.4% दर्ज हुआ। वहीं जीडीपी डिफ्लेटर के 2.5% रहने और सीपीआई के 3.9% रहने के सवाल पर सरकार ने कहा कि जीडीपी डिफ्लेटर पूरी अर्थव्यवस्था को कवर करता है, जिसमें सरकारी खर्च, कॉर्पोरेट निवेश और सर्विसेज शामिल हैं। इसलिए यह सीधे सीपीआई या डब्ल्यूपीआई से मेल नहीं खाता है।

नीलकंठ मिश्रा ने भी अर्थव्यवस्था पर दिया बयान

विश्व बैंक में भारत के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने भी जीडीपी डेटा का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि नई सीरीज ने वास्तविक उत्पादन के अनुमानों की विश्वसनीयता को बढ़ाया है। उनका कहना है कि पुराने बेस का हवाला देकर ग्रोथ को कम बताना गलत है। उन्होंने बताया कि ऑटो सेल्स में भारी बढ़त, मजबूत टैक्स कलेक्शन और क्रेडिट ग्रोथ में आई तेजी दिखाती है कि आर्थिक गतिविधियां काफी मजबूत हैं। इसके साथ ही मॉर्गन स्टेनली ने भी भारत के वित्त वर्ष 2027 के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 7.3% कर दिया है।

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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