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4 min read | अपडेटेड June 10, 2026, 12:56 IST
सारांश
हवाई यात्रियों और एयरलाइंस कंपनियों के लिए बड़ी खबर है। सरकार के नए फैसले के बाद बुधवार से एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में 10 पर्सेंट की बढ़ोतरी हो गई है। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में नए रेट लागू हो गए हैं, जिससे हवाई टिकट महंगे हो सकते हैं।

देश में जेट फ्यूल की कीमतों में 10 पर्सेंट की बड़ी बढ़ोतरी की गई है। Image: Shutterstock
देश में हवाई सफर करने वाले यात्रियों और एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकार के एक नए फैसले के बाद बुधवार से विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 10 पर्सेंट की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकार समर्थित एक नए प्राइसिंग फ्रेमवर्क के तहत यह बदलाव किया गया है, जो एयरलाइंस कंपनियों को तीन साल तक के लिए ईंधन की दरें फिक्स करने की अनुमति देता है। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य एयरलाइंस को ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में होने वाले उतार चढ़ाव के रिस्क से बचाना है। हालांकि इस बढ़ोतरी के बाद आने वाले दिनों में आम जनता के लिए हवाई टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि एयरलाइंस के कुल ऑपरेशन खर्च में अकेले ईंधन का हिस्सा करीब 40 पर्सेंट होता है।
नए प्राइसिंग फ्रेमवर्क के लागू होने के बाद देश के प्रमुख महानगरों में जेट फ्यूल के रेट बदल गए हैं। देश की राजधानी दिल्ली में अब जेट फ्यूल की कीमत बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 104.927 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में इसका नया रेट 114.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। इसके अलावा दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में हवाई ईंधन की कीमत सबसे ज्यादा यानी 139 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वेस्ट एशिया में चल रहे संकट के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं, जिससे विमानन कंपनियों के खर्चों को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
विमानन सेक्टर को इस संकट से उबारने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी है। इस फंड का मुख्य मकसद एयरलाइंस कंपनियों और हवाई यात्रियों को जेट फ्यूल की कीमतों में होने वाले अचानक उछाल से सुरक्षा देना है। इस योजना के तहत सरकारी तेल विपणन कंपनियों यानी OMC को 10,000 करोड़ रुपये का वन टाइम बजटीय सपोर्ट दिया जाएगा, जिससे वे भारतीय एयरलाइंस के लिए ATF की कीमतों को स्थिर रख सकें। सरकार के मुताबिक यह स्टेबलाइजेशन फंड पूरी तरह से सेल्फ सस्टेनिंग रिवॉल्विंग मैकेनिज्म के रूप में काम करेगा और इसका फायदा घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के हवाई ऑपरेशन्स को मिलेगा।
इस नए सिस्टम के तहत काम करने के लिए इच्छुक एयरलाइंस कंपनियों को OMC के साथ एक समझौता यानी एमओयू साइन करना होगा। इसके बाद वे कंपनियां अगले तीन साल तक सिर्फ उन्हीं OMC से फिक्स रेट पर ईंधन खरीद सकेंगी। इस पूरे अरेंजमेंट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय भी शामिल रहेंगे। सरकार का प्लान है कि फ्यूचर में जब इंटरनेशनल मार्केट में ईंधन की कीमतें कम होंगी, तब इस योजना के तहत दी गई अंतर की रकम को OMC से वापस रिकवर कर लिया जाएगा और उसे भारत के कंसोलिडेटेड फंड में जमा करा दिया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक जो एयरलाइंस इस स्कीम को चुनेंगी वे तीन साल तक फिक्स रेट पर तेल पाएंगी, जबकि इस स्कीम से बाहर रहने वाली कंपनियों को मार्केट लिंक्ड रेट पर ही तेल खरीदना होगा, जो इस समय लगभग 142 रुपये प्रति लीटर अनुमानित है।
आपको बता दें कि वेस्ट एशिया संकट शुरू होने से पहले इंटरनेशनल मार्केट में जेट फ्यूल का दाम लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर था, जो मई के महीने में बढ़कर करीब 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था। इसके बावजूद दिल्ली में घरेलू ATF की कीमतें दो महीने से अधिक समय तक लगभग 105 रुपये प्रति लीटर पर ही स्थिर रखी गई थीं। इस वजह से सरकारी तेल कंपनियों यानी OMC को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
इस योजना का एलान करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि ग्लोबल मार्केट में लगातार जारी उतार चढ़ाव जब हमारी तेल कंपनियों को प्रभावित करने लगा, तब सरकार को इसमें दखल देना पड़ा। उन्होंने साफ किया कि यह कदम एयरलाइंस, OMC और देश के नागरिकों तीनों के फायदे को ध्यान में रखकर उठाया गया एक बेहतरीन समाधान है, जिससे सभी को राहत मिलेगी और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस बेहतर होगी।
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