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अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव नहीं, चीन के साथ 'दोस्ती' को लेकर क्या बोले पीयूष गोयल

Namita Shukla

5 min read | अपडेटेड October 14, 2026, 15:37 IST

सारांश

भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते इस समय कैसे हैं, इसको लेकर लगातार चर्चा हो रही है। देश के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका और साथ ही साथ चीन के साथ भारत के रिश्ते को लेकर खुलकर बात की है।

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अमेरिका से रिश्तों में तनाव नहीं, चीन से दोस्ती पर पीयूष गोयल ने क्या कहा? (Photo: Shutterstock)

भारत के साथ अमेरिका और चीन के साथ मौजूदा रिश्ते कैसे हैं? इसको लेकर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने खुलकर बात की है। ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में पीयूष गोयल ने इन दो अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने आज कहा कि भारत, चीन के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इस यात्रा का अंतिम पड़ाव अभी तय नहीं हुआ है। उन्होंने साथ ही कहा कि भारत किसी भी देश के साथ जॉइंट वेंचर के लिए तैयार है, बशर्ते उसे उचित शर्तों पर समझौता मिले।

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गोयल ने कहा, 'हम दुनिया के सभी देशों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते हमें उचित शर्तों पर समझौता मिले, आपसी संपर्क और सहयोग में निरंतरता बनी रहे और भू-राजनीतिक स्थिति खराब न हो। मुझे लगता है कि अतीत में हमारी कुछ चिंताएं थीं। हम चीन के साथ एक बार फिर संबंध बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं लेकिन इस यात्रा का अंतिम पड़ाव अभी तय नहीं हुआ है।' गोयल की ये टिप्पणियां अहम हैं, क्योंकि चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.9% बढ़कर 127.7 अरब डॉलर हो गया, जो फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में 118.39 अरब डॉलर था।

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.62% बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2024-25 में यह 14.25 अरब डॉलर था। दूसरी ओर, इस पीरियड में आयात 16% बढ़कर 131.62 अरब डॉलर हो गया। बीते फाइनेंशियल ईयर में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जो फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में 85 अरब डॉलर था। यह देश के लिए चिंता का विषय है। चीन से निवेश को लेकर भी मुद्दे हैं। भारत ने चीन के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए नियम सख्त किए हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितंबर, 2026 को ‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन’ से इतर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात भी की थी।

वहीं अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध 'काफी अच्छे' हैं और राजनीतिक विचारधारा में बदलाव के बावजूद इनमें और सुधार ही होगा।

क्या ट्रंप के पद छोड़ने से बेहतर होंगे भारत और अमेरिका के रिश्ते?

गोयल ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें डिफेंस, टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिजों और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क जैसे सेक्टर्स भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'बेशक, हमारे संबंध पहले से ही काफी अच्छे हैं। मुझे अब भी कोई समस्या नहीं दिखती। मेरा मानना है कि भारत और अमेरिका के संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और दुनिया के लिए इनके दूरगामी मायने हैं, क्योंकि दोनों बड़े लोकतंत्र हैं।' वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पद छोड़ने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में सुधार होगा।

गोयल ने कहा, 'यह ध्यान रखना चाहिए कि बात सिर्फ व्यापार की नहीं है। बेशक, अमेरिका हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और मुझे लगता है कि आने वाले सालों में भी वह ऐसा बना रहेगा। कुल मिलाकर, मुझे अमेरिका के साथ किसी समझौते को लेकर भी कोई समस्या नहीं दिखती।' गोयल ने कहा, 'यह व्यापार, रक्षा साझेदारी, प्रौद्योगिकी साझेदारी, महत्वपूर्ण खनिजों की साझेदारी और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क से जुड़ा मामला है।'

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बेहद करीबी संबंध बने हुए हैं और दोनों पक्ष रक्षा अभ्यासों के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, वस्तुओं एवं सेवाओं की सप्लाई चेनों को खुला रखने जैसे सेक्टरों में लगातार सहयोग कर रहे हैं। गोयल ने कहा, 'अमेरिका और भारत के संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और इनमें केवल सुधार ही होगा। भारत या अमेरिका, किसी भी देश में राजनीतिक विचारधारा में बदलाव का इन संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा। इन संबंधों को हमारी आर्थिक जरूरतों, राजनीतिक जरूरतों और सुरक्षा संबंधी जरूरतों से मजबूती मिलती है।'

दोनों देशों के बीच कब होगा बीटीए?

उन्होंने कहा, 'इसलिए यह बेहद मजबूत और सुरक्षित संबंध हैं। मुझे नहीं लगता कि दुनिया को इसे लेकर चिंता करने की जरूरत है।' गोयल की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते की रूपरेखा की घोषणा फरवरी में की गई थी, लेकिन अमेरिका में शुल्क व्यवस्था में बदलाव के कारण बातचीत आगे भी जारी है। भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके सामान पर प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम शुल्क लगे।

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा था कि अमेरिका और भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन समझौता तत्काल होने की संभावना नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत अभी जारी है लेकिन ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष बातचीत में एक ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं, जहां आगे रियायत देने की गुंजाइश सीमित रह गई है।

ऊंचे शुल्क के बावजूद, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में अमेरिका को भारत का निर्यात मामूली 0.92% बढ़कर 87.3 अरब डॉलर हो गया। वहीं, इस दौरान आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर रहा। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत का व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में 40.89 अरब डॉलर था।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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