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सरकार का नया फैसला: डीजल-एटीएफ पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स, पेट्रोल पर हुआ शून्य

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड October 31, 2026, 18:03 IST

सारांश

सरकार ने आज से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) बढ़ा दिया और पेट्रोल पर इस शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया।

पेट्रोल-डीजल

पश्चिम एशिया तनाव के बीच ईंधन निर्यात शुल्क में फेरबदल (Photo: Shutterstock)

केंद्र सरकार ने ईंधन के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर (Windfall Tax) की दरों में बदलाव किया है। सरकार ने 31 अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पखवाड़े के लिए डीजल और विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया है। वहीं, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नई दरें 31 अक्टूबर यानी कि आज से प्रभावी हैं।

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डीजल और एटीएफ के निर्यात पर बढ़ा शुल्क

सरकार के नए फैसले के तहत एटीएफ के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 10.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब विमान ईंधन का निर्यात करने वाली कंपनियों को पहले के मुकाबले अधिक शुल्क देना होगा।

इसी तरह डीजल के निर्यात पर भी टैक्स का बोझ बढ़ाया गया है। डीजल पर सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर (Road and Infrastructure Cess) के साथ विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) की कुल दर 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 11.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इस बदलाव से डीजल निर्यात पर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।

पेट्रोल निर्यातकों को मिली बड़ी राहत

जहां डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया गया है, वहीं पेट्रोल के निर्यात पर सरकार ने राहत दी है। नए पखवाड़े के लिए पेट्रोल पर लगने वाले निर्यात शुल्क को 2.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है। यानी 31 अक्टूबर से पेट्रोल के निर्यात पर यह विंडफॉल टैक्स नहीं लगेगा।

इस फैसले से पेट्रोल निर्यात करने वाली कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सरकार ने घरेलू बाजार में बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

हर पखवाड़े होती है टैक्स की समीक्षा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी यह शुल्क लागू किया गया। सरकार इन दरों की हर पखवाड़े समीक्षा करती है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के साथ-साथ ईंधन बाजार की स्थिति के अनुसार इनमें बदलाव करती है।

घरेलू ईंधन उपलब्धता पर सरकार का जोर

विंडफॉल टैक्स लगाने का प्रमुख उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखना है। पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसी परिस्थितियों में सरकार घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने और ईंधन की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए निर्यात शुल्क में बदलाव करती है।

कुल मिलाकर, सरकार के ताजा फैसले में डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया गया है, जबकि पेट्रोल निर्यात को टैक्स से राहत दी गई है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरें पहले जैसी ही रखी गई हैं।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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