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  1. दुनिया की आर्थिक सुस्ती के बीच भारत मजबूत, IMF ने ऊर्जा झटकों के लिए रुपये को बताया सुरक्षा कवच

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दुनिया की आर्थिक सुस्ती के बीच भारत मजबूत, IMF ने ऊर्जा झटकों के लिए रुपये को बताया सुरक्षा कवच

Upstox

3 min read | अपडेटेड October 30, 2026, 08:24 IST

सारांश

कोजैक ने कहा कि अगर रुपये की गिरावट के कारण महंगाई बढ़ने लगती है, तो कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए IMF मौद्रिक नीति को सख्त करने की सलाह देगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत को ऊर्जा संकट से बचाव में रुपये को ढाल बनाने की IMF की सलाह (Photo: Shutterstock)

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund, IMF) ने गुरुवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को एनर्जी झटकों से निपटने में मदद करने के लिए 'विनिमय दर में लचीलापन' अपनाना सबसे बेहतर नीतिगत कदम होना चाहिए। यह बात ऐसे समय में कही गई है जब ऐसी खबरें आ रही हैं कि रुपये को सहारा देने के लिए RBI ने बाजार में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया है। IMF की कम्युनिकेशंस डायरेक्टर जूली कोजैक ने कहा, 'हमारा मानना है कि इन झटकों के सामने रुपया फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस होना चाहिए। इसलिए, भारतीय अर्थव्यवस्था को इन झटकों के अनुकूल ढलने में मदद करने के लिए, विनिमय दर को इन झटकों के असर के हिसाब से स्वतंत्र रूप से बदलने देना महत्वपूर्ण है।'

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PTI के एक सवाल के जवाब में कोजैक ने कहा कि अगर रुपये की गिरावट के कारण महंगाई बढ़ने लगती है, तो कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए IMF मौद्रिक नीति को सख्त करने की सलाह देगा। इसके अलावा IMF का मानना है कि सुपर अल नीनो का असर भारत में अभी दिखाई नहीं दिया है, हालांकि इससे फसलों की पैदावार घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम है।

IMF ने कहा कि भारत ग्लोबल आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है। IMF ने आशंका जताई कि सुपर अल नीनो के कारण भारत में फसलों की पैदावार घट सकती है, खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं और इससे लोगों की खरीदने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। जूली कोजैक ने कहा, 'भारत के सामने ये जोखिम हैं, लेकिन फिलहाल इनका असर दिखाई नहीं दिया है।' उन्होंने कहा कि यदि इन आशंकाओं का असर सामने आता है, तो IMF जनवरी में जारी होने वाले विश्व आर्थिक परिदृश्य के नए अनुमान में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान की फिर से समीक्षा करेगा।

IMF ने इस महीने की शुरुआत में फाइनेंशियल ईयर 2026-27 और 2027-28 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7-7% कर दिया था। इससे पहले जुलाई में इन दोनों फाइनेंशियल ईयर के लिए क्रम से 6.4% और 6.7% वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। कोजैक ने कहा, 'फिलहाल इसे भविष्य में पैदा हो सकने वाली एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इसका असर सामने आने के आधार पर हम जनवरी में विश्व आर्थिक परिदृश्य के नए अनुमान में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान की फिर से समीक्षा करेंगे।' उन्होंने कहा, 'फिलहाल भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि की रफ्तार काफी मजबूत है और वह दुनिया की आर्थिक वृद्धि को गति देने में अहम भूमिका निभा रहा है।'

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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