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4 min read | अपडेटेड July 21, 2026, 17:06 IST
सारांश
सरकार लगातार नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और आर्थिक साझेदारी (CEPA/CECA) कर रही है। इसके अलावा कई बड़े देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार वार्ता भी जारी है। इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजारों में आसान और सस्ती पहुंच दिलाना है।

सरकार का फोकस इस बात पर है कि भारतीय उत्पाद ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंचें और निर्यातकों को बेहतर अवसर मिलें।
भारत सरकार बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक हालात के बीच देश के निर्यात को बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि भारतीय उत्पाद ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंचें और निर्यातकों को बेहतर अवसर मिलें। इसके लिए सरकार ने प्लान तैयार किया है।
सरकार लगातार नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA/CECA) कर रही है। इसके अलावा कई बड़े देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार वार्ता भी जारी है। इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजारों में आसान और सस्ती पहुंच दिलाना, व्यापार बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। सरकार के मुताबिक इन समझौतों से खासतौर पर टेक्सटाइल, अपैरल, चमड़ा और श्रम-प्रधान उद्योगों को फायदा होगा। साथ ही किसानों और उद्योगों के लिए भी नए बाजार खुलेंगे।
सरकार भारतीय मिशनों, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EPC), उद्योग संगठनों और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर निर्यात को बढ़ावा दे रही है। 'डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब (DEH)' पहल के तहत हर जिले में 3 से 5 ऐसे उत्पादों या सेवाओं की पहचान की जा रही है जिनमें निर्यात की अच्छी संभावना है। इन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसके अलावा निर्यातकों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
सरकार दूसरे देशों के साथ मिलकर तकनीकी नियमों, गुणवत्ता मानकों, सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) नियमों और अन्य गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने पर काम कर रही है। इसके लिए संयुक्त समितियों और कार्य समूहों के माध्यम से नियमित बैठकें और बातचीत की जा रही हैं, ताकि भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों में आसानी से प्रवेश मिल सके।
सरकार ने 2025 में एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) शुरू किया है, जिसका कुल बजट 25,060 करोड़ रुपये है। यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इस मिशन के तहत 'निर्यात प्रोत्साहन' योजना के जरिए सस्ता निर्यात ऋण, ब्याज सहायता, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी और अन्य वित्तीय सुविधाएं दी जाएंगी। वहीं 'निर्यात दिशा' के तहत गुणवत्ता सुधार, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार तक पहुंच, लॉजिस्टिक्स और व्यापार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार ने ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट हब (ECEH) की शुरुआत पायलट आधार पर की है, जिससे लॉजिस्टिक्स, कस्टम क्लियरेंस और अन्य निर्यात सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराई जा सकें। छोटे निर्यातकों को राहत देते हुए RBI ने 10 लाख रुपये तक के छोटे निर्यात लेनदेन के नियम आसान किए हैं। वहीं DGFT और CBIC ने कूरियर के जरिए निर्यात पर 10 लाख रुपये प्रति कंसाइनमेंट की सीमा हटा दी है। साथ ही विदेशों से लौटाए गए या रिजेक्ट किए गए सामान को दोबारा भारत लाने की प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है।
सरकार PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के जरिए बेहतर मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है ताकि लॉजिस्टिक्स लागत कम हो सके। इसके अलावा RoDTEP योजना के तहत निर्यातकों को उन टैक्स और ड्यूटी का रिफंड दिया जाता है, जो पहले वापस नहीं मिल पाते थे।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने देशभर में 65 एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर (EFC) स्थापित किए हैं। यहां MSME इकाइयों को निर्यात से जुड़ी सलाह, मार्गदर्शन और सहायता दी जाती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों और खरीदार-विक्रेता बैठकों में भाग लेने के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
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