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  1. US Fed के 'पॉज' से चमकेगा सोना या बढ़ेगा दबाव? महंगाई, कच्चा तेल और रुपया तय करेंगे अगली चाल

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US Fed के 'पॉज' से चमकेगा सोना या बढ़ेगा दबाव? महंगाई, कच्चा तेल और रुपया तय करेंगे अगली चाल

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड October 29, 2026, 08:08 IST

सारांश

तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर, युद्ध और तनाव के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने का रुख करते हैं। इसलिए पश्चिम एशिया की स्थिति सोने की कीमतों पर अलग-अलग तरह से असर डाल सकती है।

Gold Silver

अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

Gold-Silver Price: अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ने उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। इस खबर के बीच सोने-चांदी की कीमतों में आज 29 अक्तूबर को तेजी नजर आ रही है। आज COMEX बाजार में सोने की कीमत 0.57 फीसदी बढ़कर 4,074.80 डॉलर प्रति औंस हो गई। वहीं, चांदी की कीमत 0.60 फीसदी उछलकर 53.99 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। फेड के फैसले के बाद निवेशकों का ध्यान अब महंगाई, ब्याज दरों के भविष्य और पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर बना हुआ है। bullion.co.in के अनुसार आज 24 कैरेट वाले 10 ग्राम सोने की कीमत 144,000 रुपये हो गई है। वहीं चांदी भी 194,990 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है।
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फेडरल रिजर्व के फैसले का सोने-चांदी पर असर

अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरों को 3.75%-4.00% पर स्थिर रखा। बैंक ने कहा कि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर है और आगे का फैसला लेने से पहले उसे और जानकारी की जरूरत है। ऐसे में भविष्य में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 12 में से 2 सदस्यों ने इस बार भी 0.25% दरें बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया। फेड ने माना है कि अमेरिका में महंगाई अभी भी 2% के लक्ष्य से ऊपर है, जिसके कारण दिसंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका लगभग 85% तक बढ़ गई है।

बाजार में यह आशंका है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए इस साल के अंत तक ब्याज दरें फिर बढ़ाई जा सकती हैं। आमतौर पर ब्याज दरें ज्यादा होने पर सोने और चांदी की मांग पर दबाव पड़ता है, क्योंकि इनसे निवेशकों को ब्याज के रूप में कमाई नहीं होती। वहीं, ब्याज दरें घटने की उम्मीद से इन धातुओं की कीमतों को सहारा मिल सकता है। हालांकि, फेड के इस फैसले से यह तय नहीं होता कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें किस दिशा में जाएंगी। महंगाई की स्थिति भी बाजार के लिए अहम बनी हुई है।

पश्चिम एशिया में तनाव से कीमतों पर असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भी निवेशक सोने और चांदी की कीमतों पर नजर रख रहे हैं। यमन के हूती समूह के हमलों में तेजी की खबरों से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर, युद्ध और तनाव के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने का रुख करते हैं। इसलिए पश्चिम एशिया की स्थिति सोने की कीमतों पर अलग-अलग तरह से असर डाल सकती है।

आगे सोने और चांदी की कीमतों में क्या होगा?

आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें कई बातों पर निर्भर करेंगी। इनमें अमेरिका की महंगाई से जुड़े आंकड़े, फेडरल रिजर्व के अगले फैसले, पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की चाल शामिल हैं।

अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। लेकिन अगर युद्ध का तनाव बढ़ता है या ब्याज दरें घटने की उम्मीद मजबूत होती है, तो इन धातुओं की कीमतों को समर्थन मिल सकता है।

भारत में सोना या चांदी खरीदने वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में खुदरा कीमतें भी उतने ही प्रतिशत से बढ़ेंगी। रुपये की विनिमय दर, स्थानीय बाजार की स्थिति और अन्य लागतें भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं।

भारत में सोने की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि रुपये और डॉलर की विनिमय दर का भी बड़ा असर पड़ता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो भारत के लिए विदेश से सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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