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3 min read | अपडेटेड May 15, 2026, 07:32 IST
सारांश
भारत सरकार के डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने गोल्ड इंपोर्ट के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब एडवांस ऑथराइजेशन के तहत सोना मंगाने की लिमिट 100 किलो तय कर दी गई है। इसके साथ ही पहली बार अप्लाई करने वालों के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन और CA से रिपोर्ट लेना भी जरूरी कर दिया गया है।

गोल्ड इंपोर्ट को लेकर सरकार ने जारी किए नए सख्त नियम। ॉ
भारत सरकार ने ज्वैलरी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए गोल्ड इंपोर्ट के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड यानी DGFT ने एडवांस ऑथराइजेशन के तहत सोना मंगाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। इनका मुख्य मकसद सोने के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट पर बेहतर तरीके से नजर रखना है और यह पक्का करना है कि नियमों का पालन सही तरीके से हो रहा है। इसके लिए सरकार ने हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर 2023 के तहत स्टैंडर्ड इनपुट आउटपुट नॉर्म्स (SION) में 5 नए पॉइंट्स जोड़े हैं।
अब किसी भी कारोबारी को एडवांस ऑथराइजेशन के तहत 100 किलो से ज्यादा सोना इंपोर्ट करने की परमिशन नहीं मिलेगी। सरकार ने इसकी मैक्सिमम लिमिट 100 किलोग्राम तय कर दी है। इसका मतलब है कि एक बार में इससे ज्यादा सोना मंगाने के लिए अब कड़ी शर्तों और लिमिट का पालन करना होगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि मार्केट में सोने की सप्लाई और उसके इस्तेमाल पर कंट्रोल रखा जा सके।
अगर कोई कारोबारी पहली बार एडवांस ऑथराइजेशन के लिए अप्लाई कर रहा है, तो उसके लिए नियम अब और भी कड़े हो गए हैं। ऐसे मामलों में रीजनल अथॉरिटी सबसे पहले कारोबारी की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी यानी जहां गहने बनाने का काम होता है, वहां का फिजिकल इंस्पेक्शन करेगी। अधिकारी वहां जाकर खुद चेक करेंगे कि क्या वहां काम करने की कैपेसिटी है और क्या वह यूनिट सच में ऑपरेशनल है या नहीं। जब तक अधिकारी संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक इंपोर्ट की इजाजत नहीं दी जाएगी।
पिछला टारगेट पूरा करना होगा अनिवार्य
नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई कारोबारी दोबारा सोना मंगाने के लिए अप्लाई करता है, तो उसे यह साबित करना होगा कि उसने पुराने ऑथराइजेशन के तहत मिले कोटे का कम से कम 50 पर्सेंट एक्सपोर्ट टारगेट पूरा कर लिया है। जब तक पिछले ऑर्डर का आधा एक्सपोर्ट पूरा नहीं होगा, तब तक नया एडवांस ऑथराइजेशन जारी नहीं किया जाएगा। इससे यह पक्का हो सकेगा कि जो सोना मंगाया जा रहा है, उसका इस्तेमाल गहने बनाकर बाहर भेजने में किया जा रहा है और प्रोग्रेसिव कंप्लायंस बना हुआ है।
CA से सर्टिफाइड रिपोर्ट देना होगा जरूरी
अब हर 15 दिन में यानी फोर्टनाइटली बेसिस पर कारोबारियों को अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट देनी होगी। यह रिपोर्ट संबंधित रीजनल अथॉरिटी के पास जमा करानी होगी। खास बात यह है कि इस रिपोर्ट को एक इंडिपेंडेंट चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से सर्टिफाई कराना होगा। इस रिपोर्ट में सोने के इंपोर्ट और उससे जुड़े एक्सपोर्ट ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इससे सरकार को ऑपरेशनल लेवल पर हो रहे काम की सटीक जानकारी मिलती रहेगी और निगरानी करना आसान होगा।
मंथली रिपोर्टिंग और सख्त निगरानी
रीजनल अथॉरिटी को भी अब हर महीने अपनी एक कंसोलिडेटेड रिपोर्ट बनाकर DGFT हेडक्वार्टर को भेजनी होगी। इस रिपोर्ट में एडवांस ऑथराइजेशन जारी करने और सोने के इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से जुड़े सभी ट्रांजेक्शन की डिटेल होगी। इससे पूरे देश में हो रहे सोने के कारोबार की मॉनिटरिंग को सेंट्रलाइज्ड किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इन नए नियमों के आने से गोल्ड सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो जाएगी। इन बदलावों से फ्यूचर में सोने के व्यापार को और भी संगठित बनाने में मदद मिलेगी।
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