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4 min read | अपडेटेड July 15, 2026, 16:23 IST
सारांश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए 'सेमिकॉन 2.0' योजना को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है, जिससे देश को इस सेक्टर में ग्लोबल मैप पर लाया जा सके।
भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने सेमिकॉन 2.0 को दी मंजूरी।
भारत को दुनिया के सेमीकंडक्टर मैप पर एक प्रमुख देश के रूप में स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने सेमिकॉन 2.0 (Semicon 2.0) योजना को अपनी हरी झंडी दे दी है। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को होलिस्टिक तरीके से विकसित करना है। सरकार ने इस दूरगामी और लंबे समय की नीतिगत सहायता के लिए कुल 1,27,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया है। यह बड़ा कदम देश में पहले चरण यानी सेमिकॉन 1.0 से मिली सफलता और बने मोमेंटम को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
सरकार ने सेमिकॉन 2.0 के तहत पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए छह प्रमुख स्तंभों यानी पिलर्स पर अपना पूरा फोकस रखा है। इसका पहला स्तंभ चिप डिजाइन का है, जिसके तहत देश के 105 स्टार्टअप्स पहले से ही चिप्स विकसित करने के काम में जुटे हैं। अब इस इकोसिस्टम को और गहरा किया जाएगा ताकि भारत चिप डिजाइन आईपी कंट्री के रूप में उभर सके। दूसरा स्तंभ मशीन और मटेरियल का है, जिसमें सेमीकंडक्टर बनाने के लिए जरूरी मशीनों, रसायनों और गैसों के निर्माण और R&D में लगी कंपनियों को इंसेंटिव दिया जाएगा।
तीसरा स्तंभ नए फैब्स की स्थापना का है। साल 2028 में देश का पहला फैब शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद सरकार और भी कंपनियों को आकर्षित कर सिलिकॉन फैब्स और डिस्प्ले फैब्स लगवाएगी। चौथा स्तंभ एटीएमपी और ओएसएटी इंडस्ट्री को मजबूत करना है ताकि भारत दुनिया के लिए एक बड़ा विकल्प बन सके। पांचवां स्तंभ रिसर्च और डेवलपमेंट का है, जिसमें एडवांस टेक्नोलॉजी पर ग्लोबल सेंटर्स के साथ मिलकर काम होगा। छठा स्तंभ टैलेंट डेवलपमेंट का है, जिसके तहत 315 यूनिवर्सिटीज में करीब 68,000 छात्रों को एडवांस टूल्स की ट्रेनिंग दी जा चुकी है और कॉलेज स्तर पर इसे और गहरा किया जाएगा।
देश में सेमिकॉन 1.0 के तहत अब तक शानदार प्रगति देखी गई है। मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अब तक कुल 12 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कुल निवेश शामिल है। इन मंजूर किए गए प्रस्तावों में एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं। यह सभी यूनिट्स कंज्यूमर अप्लाइंसेज, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण सेक्टर्स की चिप जरूरतों को पूरा करेंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इन 12 मंजूर प्रस्तावों में से तीन कंपनियों, जिनमें माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी शामिल हैं, उन्होंने अपना कमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया है, जबकि एक और कंपनी द्वारा साल 2026 में अपना प्रोडक्शन शुरू करने की पूरी उम्मीद जताई गई है।
चिप डिजाइन के क्षेत्र में भी सरकार ने देश के छोटे बिजनेस और स्टार्टअप्स को बड़ा सपोर्ट दिया है। अब तक करीब 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता देने के लिए मंजूर किया गया है। इसके साथ ही 105 स्टार्टअप्स और एमएसएमई को इंडस्ट्री स्टैंडर्ड इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी ईडीए टूल्स तक पहुंच दी गई है। यह सभी कंपनियां सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ड्रोन, सर्विलांस कैमरा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी आईओटी डिवाइसेज, AI सिस्टम और स्मार्ट मीटर्स के लिए चिप और SOC डिजाइन करने के काम में जुटी हैं।
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