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Blinkit की एंबुलेंस सर्विस अब नहीं रहेगी पूरी तरह से फ्री, किन लोगों को भरने पड़ेंगे ₹2,500?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड November 05, 2026, 14:08 IST

सारांश

ब्लिंकिट की एंबुलेंस सर्विस अभी तक बिल्कुल फ्री थी, लेकिन अब इसमें कुछ बदलाव किया गया है। इन बदलावों की जानकारी जोमैटो के फाउंडर दीपेंद्र गोयल ने सोशल मीडिया के जरिए दी है।

Blinkit Ambulance

ब्लिंकिट एंबुलेंस सर्विस अब पूरी तरह से फ्री नहीं (Photo: @deepigoyal X account)

जोमैटो के फाउंडर दीपेंद्र गोयल ने ब्लिंकिट एंबुलेंस सर्विस को लेकर कुछ अहम जानकारी शेयर की है। ब्लिंकिट की एंबुलेंस सर्विस पहले पूरी तरह से फ्री थी, लेकिन अब ऐसा नहीं रहेगा। किन लोगों को ब्लिंकिट एंबुलेंस बुक करने के लिए 2,500 रुपये देने होंगे और किनके लिए अभी भी यह सर्विस फ्री रहेगी, चलिए समझते हैं। दरअसल सोशल मीडिया X पर एक यूजर ने लिखा था, 'आज ब्लिंकिट एम्बुलेंस ने मेरी दादी की जान बचा ली। अचानक स्थिति बिगड़ गई थी, लेकिन वे 8 मिनट में घर पहुंच गए और दादी को तुरंत इमरजेंसी वार्ड पहुंचा दिया। मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा। किसी भी हॉस्पिटल की एम्बुलेंस इतनी जल्दी नहीं पहुंच पाती।' इस पोस्ट के जवाब में दीपेंद्र गोयल ने एक लंबी-चौड़ी पोस्ट लिखी। उन्होंने यह भी बताया कि क्यों ब्लिंकिट एंबुलेंस की सभी सर्विसेज अब फ्री नहीं रहेंगी।

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दीपेंद्र गोयल ने लिखा, 'मैंने जोमैटो की शुरुआत सेवा की भावना के साथ की थी। आज 'ब्लिंकिट एम्बुलेंस' उसी सेवा भावना का एक रूप है। पिछले 2 सालों में, हमने लगभग 20,000 इमरजेंसी मामलों (कुल मिलाकर ~42,000 मामले) में मदद की है। इसके लिए हमने एक रुपया भी नहीं लिया है। और हम आगे भी इसे ऐसा ही रखना चाहते हैं। क्योंकि यह सर्विस पूरी तरह से मुफ्त है, इसलिए अब ऐसी बुकिंग्स की संख्या बढ़ रही है जो रूटीन चेकअप, अस्पताल जाने या अस्पताल से घर लौटने के लिए होती हैं, ऐसे काम जिनके लिए उबर (Uber) या कोई अन्य प्राइवेट ट्रांसपोर्ट भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।'

क्यों अब सबके लिए फ्री नहीं रहेगी ब्लिंकिट एंबुलेंस?

दीपेंद्र गोयल ने आगे लिखा, 'ऐसी हर बुकिंग की वजह से, पैरामेडिक्स के साथ पूरी तरह से लैस एक इमरजेंसी एम्बुलेंस सड़क से दूर हो जाती है, जबकि हो सकता है कि उस समय किसी की जान बचाने के लिए उसकी जरूरत हो। इसलिए, अब हम एक बदलाव कर रहे हैं, इमरजेंसी ट्रांसफर हमेशा की तरह फ्री रहेंगे। लेकिन नॉन-इमरजेंसी (सामान्य) ट्रांसफर के लिए ट्रिप के बाद 2,500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह राशि काफी हद तक प्राइवेट एम्बुलेंस के शुल्क के बराबर ही है। यह पैसा 'इटरनल फाउंडेशन' (Eternal Foundation) को जाएगा, जो इन एम्बुलेंसों को ऑपरेट करता है। इससे हमें अपनी सेवाओं का और विस्तार करने में मदद मिलेगी। हमें उम्मीद है कि इस शुल्क के लागू होने से नॉन-इमरजेंसी मामलों में हमारी एम्बुलेंस के इस्तेमाल में काफी कमी आएगी। हमारी 10 मिनट में पहुंचने वाली एम्बुलेंस ने हजारों जानें बचाई हैं और आगे भी बचा सकती हैं। इसलिए, हमें इन्हें उन इमरजेंसी स्थितियों के लिए उपलब्ध रखना होगा, जहां इनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। एक और बात। उच्च गुणवत्ता वाली एम्बुलेंस सेवा का विस्तार करना कोई आसान काम नहीं है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षित और संवेदनशील पैरामेडिक्स की उपलब्धता है। हमारी ट्रेनिंग अकादमी बिना गुणवत्ता से समझौता किए तेजी से काम कर रही है। अलबिंदर ढींडसा और उनकी टीम अगले 2-4 सालों में भारत के सभी प्रमुख शहरों में 'ब्लिंकिट एम्बुलेंस' सेवा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। अपना ख्याल रखें, और मेरी प्रार्थना है कि आपको हमारी जरूरत कभी न पड़े।'

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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