return to news
  1. डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंक की लापरवाही से डूबे पैसे तो पूरा हर्जाना भरेगा बैंक

बिजनेस न्यूज़

डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंक की लापरवाही से डूबे पैसे तो पूरा हर्जाना भरेगा बैंक

Upstox

4 min read | अपडेटेड October 29, 2026, 17:00 IST

सारांश

डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक की लापरवाही से ग्राहक के पैसे डूबे हैं, तो बैंक को पूरे नुकसान की भरपाई करनी होगी।

supreme-court-digital-arrest-rbi-banks

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट से देश को 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर किसी बैंक या वित्तीय संस्थान की लापरवाही की वजह से कोई ग्राहक डिजिटल अरेस्ट का शिकार होता है, तो उस बैंक को पीड़ित के पूरे नुकसान की भरपाई करनी होगी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि बैंकों की यह जिम्मेदारी है कि वे संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखें और नजदीकी पुलिस स्टेशन को तुरंत इसकी सूचना दें। देश भर में इस साल साइबर ठगी से लगभग 800 करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान हुआ है, जिस पर कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

बैंक की लापरवाही पर मिलेगा पूरा मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई द्वारा प्रस्तावित नियमों में ऐसा कड़ा प्रावधान होना चाहिए, जिससे पीड़ित को उसके नुकसान के बराबर या उससे अधिक मुआवजा मिले। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर यह पाया जाता है कि वित्तीय संस्थान ने उचित जांच-पड़ताल यानी ड्यू डिलिजेंस में लापरवाही बरती और इसी वजह से धोखाधड़ी हुई, तो पीड़ित को पूरा हर्जाना देना होगा। कोर्ट ने कहा कि वह एमिकस क्यूरी और केंद्र सरकार द्वारा सुझाए गए निर्देशों को जारी करने के पक्ष में है। इसके लिए कोर्ट पहले आरबीआई के प्रस्तावित केवाईसी संशोधन निर्देश 2026 की समीक्षा करेगा, जिसे 30 नवंबर 2026 तक अधिसूचित और 31 दिसंबर 2026 तक लागू किया जाना है।

संदिग्ध लेनदेन पर पुलिस को अलर्ट और फिजिकल जांच

अदालत ने बैंकों के लिए बचाव के कुछ जरूरी नियम तय करने पर जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी खाते में उसके पुराने रिकॉर्ड से हटकर कोई असामान्य लेनदेन होता है, तो बैंक को उस भुगतान को तुरंत अस्थायी तौर पर रोक देना चाहिए। इसके साथ ही बैंक के सिस्टम से अपने आप पास के पुलिस स्टेशन को अलर्ट पहुंचना चाहिए। इसके बाद लेनदेन सही है या नहीं, यह पता लगाने के लिए फिजिकल जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने आरबीआई को अगली सुनवाई पर सभी मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थानों की पूरी सूची सौंपने का आदेश दिया है, ताकि इन नियमों को सभी बैंकों पर एक साथ लागू कराया जा सके और अलग-अलग बैंकों को पक्षकार न बनाना पड़े।

म्यूल अकाउंट्स पर सख्त एक्शन और व्हाट्सएप का कदम

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बताया कि तमाम कोशिशों के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था को इस साल लगभग 800 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। इसमें म्यूल अकाउंट यानी फर्जी या किराए के बैंक खाते सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं। आरबीआई को इन खातों की बहुत बारीकी से जांच करने और नए म्यूल खातों को तुरंत बंद करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। वहीं इस मामले में कोर्ट ने व्हाट्सएप को भी अपनी बात रखने की अनुमति दी। व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि उसने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में अब तक 9,400 संदिग्ध अकाउंट्स को पूरी तरह बैन कर दिया है।

राज्यों से मांगी गई एफआईआर और जांच की रिपोर्ट

मामले में एमिकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं और यह ठगी बिना रुके जारी है। इस पर उन्होंने राज्य की कानून लागू करने वाली एजेंसियों से दर्ज एफआईआर, जांच की मौजूदा स्थिति और ठगी से बचाव के उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 4 अगस्त 2026 को जारी अंतरिम निर्देशों के तहत जांच को तेज करने, खातों को फ्रीज करने और पीड़ितों के नुकसान की भरपाई के लिए एक मजबूत व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिसमें सभी बैंकों को पूरी गंभीरता दिखानी होगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख

End of additional stories