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  1. ग्लोबल एनर्जी संकट के बीच 'समुद्र मंथन स्कीम' पर सरकार खर्चेगी ₹84,084 करोड़, क्या है पूरा प्लान?

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ग्लोबल एनर्जी संकट के बीच 'समुद्र मंथन स्कीम' पर सरकार खर्चेगी ₹84,084 करोड़, क्या है पूरा प्लान?

Upstox

3 min read | अपडेटेड August 03, 2026, 08:09 IST

सारांश

योजना का 84,084 करोड़ रुपये का परिव्यय अन्वेषण सीरीज के सबसे जोखिम भरे हिस्से पर केंद्रित है। इसमें से आधे से अधिक (43,200 करोड़ रुपये) साल 2031 तक पांच सालों में विशेष रूप से गहरे समुद्र में खुदाई के लिए दिए किए जाएंगे।

समुद्र मंथन योजना

भारत में 60 समुद्री कुओं की खुदाई होगी, प्रत्येक के लिए 650 करोड़ रुपये देगी सरकार (Photo: Shutterstock)

भारत बजटीय सहायता के जरिये जोखिम भरे अपतटीय तेल (ऑफशोर ऑयल) और गैस खोज की फाइनेंसिंग करने वाले दुनिया के पहले बड़े कार्यक्रमों में से एक की शुरुआत करने जा रहा है। सरकार का यह कदम देश के विशाल अप्रयुक्त गहरे जल भंडारों (इस्तेमाल ना होने वाले डीप वॉटर रिजर्व्स) के जरिए आयातित कच्चे तेल और गैस पर बढ़ती निर्भरता को कम करने की एक कोशिश है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह 84,084 करोड़ रुपये की 'समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना' (नैशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम) को मंजूरी दी। इसके तहत सरकार गहरे समुद्र और अत्यधिक गहरे जल में अन्वेषण कुएं की खुदाई की आधी लागत या 650 करोड़ रुपये (जो भी कम हो) का प्रत्यक्ष रूप से फाइनेंस करेगी। एक अधिकारी ने कहा, 'शायद यह पहली बार है जब दुनिया की कोई सरकार बजट से जोखिम अन्वेषण का वित्तपोषण कर रही है।'

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उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में कुल मिलाकर 60 गहरे जल और अत्यधिक गहरे जल वाले अन्वेषण कुओं की फाइनेंसिंग बजट से की जाएगी। अन्वेषण कुओं की खुदाई की लागत का एक हिस्सा वहन करने के अलावा, सरकार साझा बुनियादी ढांचे का भी आंशिक वित्तपोषण करेगी। इससे कई परिचालकों को साझा परिसंपत्तियों का इस्तेमाल करके हाइड्रोकार्बन खोज का व्यावसायिक उपयोग करने की अनुमति मिलेगी। अधिकारियों ने कहा कि निजी कंपनियां जोखिम भरे अन्वेषण से बड़े पैमाने पर बचती रही हैं, क्योंकि अगर कोई व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हाइड्रोकार्बन खोज नहीं होती है, तो निवेश को बट्टे खाते में डालना पड़ता है। एक अधिकारी ने कहा कि वे केवल पहले से स्थापित खोज से उत्पादन पर पैसा खर्च कर रहे थे। जोखिम अन्वेषण में शायद ही कोई पैसा गया, जो नए संसाधनों को खोजने के लिए महत्वपूर्ण है।

इक्रा लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि यह योजना गहरे जल/अत्यधिक गहरे जल वाले कुओं की ड्रिलिंग के लिए सहायता देती है, जहां घरेलू अपस्ट्रीम क्षेत्र के पास सीमित अनुभव और इसका दोहन अत्यधिक पूंजी-गहन और जोखिम भरा बना हुआ है। योजना का 84,084 करोड़ रुपये का परिव्यय अन्वेषण सीरीज के सबसे जोखिम भरे हिस्से पर केंद्रित है। इसमें से आधे से अधिक (43,200 करोड़ रुपये) साल 2031 तक पांच सालों में विशेष रूप से गहरे समुद्र में खुदाई के लिए दिए किए जाएंगे। यह योजनाबद्ध 60 कुओं में प्रत्येक के लिए लगभग 650 करोड़ रुपये बैठता है।

PTI इनपुट के साथ

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