पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड May 21, 2026, 09:46 IST
सारांश
उद्योग से मिली प्रतिक्रिया के बाद, सेबी ने म्यूचुअल फंड में थर्ड पार्टी द्वारा पेमेंट के मौजूदा फ्रेमवर्क की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की। इसके तहत, सेबी ने प्रस्ताव किया है कि कुछ खास और स्पष्ट परिस्थितियों में निवेशक संरक्षण और PMLA के प्रावधानों के अनुपालन के साथ ऐसे भुगतान की अनुमति दी जानी चाहिए।

सेबी का नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों की ओर से म्यूचुअल फंड में निवेश की अनुमति देने का प्रस्ताव (Photo: Shutterstock)
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India, SEBI) ने बुधवार को कुछ निश्चित परिस्थितियों में म्यूचुअल फंड में थर्ड पार्टी से पेमेंट की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा। इनमें पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ नियोक्ता का अपने कर्मचारियों की ओर से निवेश करना और म्यूचुअल फंड यूनिट के रूप में संपत्ति प्रबंधन कंपनियों का कमीशन का भुगतान करना शामिल है। मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के मुताबिक म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने के लिए सभी पेमेंट सीधे इन्वेस्टर के अपने बैंक अकाउंट से होने चाहिए और केवल आरबीआई से अधिकृत पेमेंट एग्रीगेटर या सेबी से मान्यता प्राप्त समाशोधन निगम (क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन) के जरिए ही किए जाने चाहिए। उद्योग से मिली प्रतिक्रिया के बाद, सेबी ने म्यूचुअल फंड में थर्ड पार्टी द्वारा पेमेंट के मौजूदा फ्रेमवर्क की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की। इसके तहत, सेबी ने प्रस्ताव किया है कि कुछ खास और स्पष्ट परिस्थितियों में निवेशक संरक्षण और धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money-Laundering Act, PMLA) के प्रावधानों के अनुपालन के साथ ऐसे भुगतान की अनुमति दी जानी चाहिए।
नियामक ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना है जो वास्तविक मामलों में निवेश को आसान बनाए और साथ ही संभावित दुरुपयोग के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करे।’ इसी के अनुरूप, सेबी ने अपने परामर्श पत्र में एक थर्ड पार्टी पेमेंट परिदृश्य का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत नियोक्ता कर्मचारियों के म्यूचुअल फंड में निवेश का भुगतान सैलरी कटौती के जरिए कर सकता है। सेबी ने कहा, ‘प्रस्तावित परिदृश्य नियोक्ताओं द्वारा अपने कर्मचारियों को विभिन्न लाभ और सेविंग्स के मौके देने की स्थापित गतिविधियों को ध्यान में रखता है। यह व्यवस्था परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को सैलरी कटौती के जरिए म्यूचुअल फंड निवेश के लिए एकीकृत भुगतान स्वीकार करने की अनुमति देगी।’
इसके अलावा, नियामक ने थर्ड-पार्टी पेमेंट से संबंधित एक अन्य परिदृश्य का सुझाव दिया है। इसके तहत समय-समय पर दिया जाने वाले एएमसी कमीशन के बजाय म्यूचुअल फंड वितरकों (एमएफडी) को म्यूचुअल फंड यूनिट के रूप में भुगतान किया जा सकता है। प्रस्तावित परिदृश्य के तहत संपत्ति प्रबंधन कंपनियां और म्यूचुअल फंड वितरक के बीच हुए समझौते के अनुसार नियमित समय पर दिए जाने वाले कमीशन के बजाय म्यूचुअल फंड यूनिट अलॉट की जाएंगी। यह म्यूचुअल फंड वितरकों को म्यूचुअल फंड यूनिट में निवेश करने का एक सुविधाजनक, सुगम और अनुशासित तरीका देगा और लॉन्ग-टर्म बचत और निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके अलावा सेबी ने निवेशकों को राशि या योजना के रिटर्न का एक हिस्सा सोशल वर्क में दान करने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया है। इसका उद्देश्य एक विनियमित, पारदर्शी और निवेशक-सुरक्षित रूपरेखा के माध्यम से सामाजिक कार्यों में निवेशकों के योगदान को सुगम बनाना है। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 10 जून तक लोगों से सुझाव मांगे हैं।
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