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  1. तमिलनाडु में नवजात बच्चों को मिलेगी सोने की अंगूठी, सीएम विजय ने लॉन्च की ‘थाईमामन थंगा मोथिरम’ योजना

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तमिलनाडु में नवजात बच्चों को मिलेगी सोने की अंगूठी, सीएम विजय ने लॉन्च की ‘थाईमामन थंगा मोथिरम’ योजना

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड September 28, 2026, 19:03 IST

सारांश

राज्य सरकार ने इस योजना के लिए हर साल 755.83 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसका मकसद मां बनने की परंपरा का सम्मान करने के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और ज्यादा परिवारों को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है।

CM Vijay

योजना की शुरुआत मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल से हुई, जहां मुख्यमंत्री ने 25 नवजात बच्चों को सोने के छल्ले दिए।

Thaaimaman Thanga Mothiram Thittam Scheme: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने आज 28 सितंबर को थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले पात्र नवजात बच्चों को राज्य सरकार की ओर से एक ग्राम का 22 कैरेट सोने का छल्ला दिया जाएगा। योजना की शुरुआत मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल से हुई, जहां मुख्यमंत्री ने 25 नवजात बच्चों को सोने के छल्ले दिए।

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राज्य सरकार ने इस योजना के लिए हर साल 755.83 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसका मकसद मां बनने की परंपरा का सम्मान करने के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और ज्यादा परिवारों को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है।

कौन ले सकता है इस योजना का लाभ?

इस योजना का लाभ लेने के लिए नवजात की मां का तमिलनाडु की स्थायी निवासी होना जरूरी है। बच्चे का जन्म राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में होना चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी का प्रेग्नेंसी एंड इन्फैंट कोहोर्ट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन (PICME) सिस्टम में रजिस्ट्रेशन और रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ (RCH) आईडी होना जरूरी है। पात्र बच्चे को अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय सोने का छल्ला दिया जाएगा।

कैसा होगा सोने का छल्ला?

हर पात्र नवजात को एक ग्राम, 22 कैरेट सोने का छल्ला मिलेगा। सरकार के मुताबिक, इन छल्लों पर अलग-अलग सीरियल नंबर होंगे। इन्हें छेड़छाड़ से सुरक्षित पैकेजिंग में रखा जाएगा, ताकि इनके वितरण में पारदर्शिता बनी रहे। योजना के पहले चरण के लिए 1.28 लाख सोने के छल्ले तैयार किए जा चुके हैं।

कहां लागू होगी योजना?

यह योजना पूरे तमिलनाडु में लागू होगी। हालांकि, मदुरंथकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों को फिलहाल इससे बाहर रखा गया है, जहां 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। योजना की निगरानी के लिए हर जिले में संबंधित जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष निगरानी समिति बनाई गई है। यह समिति योजना के क्रियान्वयन, छल्लों के स्टॉक और उनके वितरण की निगरानी करेगी।

क्यों शुरू की गई यह योजना?

सरकार के मुताबिक इस योजना का नाम तमिल परंपरा से जुड़ा है, जिसमें नवजात बच्चे को मामा की ओर से उपहार दिया जाता है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का भरोसा बढ़ाना और अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है। तमिलनाडु में हर साल करीब 7.80 लाख बच्चों का जन्म होता है। इनमें लगभग 4.20 लाख यानी 53% प्रसव सरकारी अस्पतालों में होते हैं।

कब हुई थी घोषणा?

इस योजना को मूल रूप से 15 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई की जयंती पर शुरू किया जाना था। हालांकि, मुख्यमंत्री विजय के लंदन दौरे के कारण लॉन्च टाल दिया गया। योजना के क्रियान्वयन का सरकारी आदेश 23 जून 2026 को जारी किया गया था। सोने के छल्लों की सप्लाई के लिए जॉयालुक्कास और कल्याण ज्वेलर्स को वर्क ऑर्डर दिए गए हैं।

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