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PPF, SSY, SCSS पर कितना मिलेगा ब्याज? 30 सितंबर को सरकार करेगी बड़ा ऐलान

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड September 28, 2026, 14:26 IST

सारांश

अगर सरकार अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए दरों में बदलाव करती है, तो उसका असर 1 अक्टूबर से नई जमा और संबंधित योजनाओं पर दिखाई देगा। अगर दरें नहीं बदली जाती हैं, तो मौजूदा ब्याज दरें आगे भी जारी रहेंगी।

Small Saving Schemes

अंतिम ब्याज दर तय करने और उसे अधिसूचित करने का फैसला सरकार के पास रहता है।

Small Savings Scheme: छोटी बचत योजनाओं में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए 30 सितंबर अहम दिन हो सकता है। सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों का ऐलान 30 सितंबर को कर सकती है। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार मौजूदा ब्याज दरों में बदलाव करती है या उन्हें पहले की तरह बरकरार रखती है। पीपीएफ, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, सुकन्या समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और किसान विकास पत्र जैसी योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए यह फैसला अहम है। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी।
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अभी कितनी है ब्याज दरें

मौजूदा समय में पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ पर सालाना 7.1% ब्याज मिल रहा है। सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम और सुकन्या समृद्धि योजना पर ब्याज दर 8.2% है। नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट पर 7.7% ब्याज मिल रहा है। पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम पर 7.4% और किसान विकास पत्र पर 7.5% ब्याज दर है। किसान विकास पत्र की मैच्योरिटी अवधि मौजूदा दर के आधार पर तय होती है।

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट में 1 साल की अवधि पर 6.9%, 2 साल पर 7%, 3 साल पर 7.1% और 5 साल पर 7.5% ब्याज मिल रहा है। वहीं, 5 साल की पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपॉजिट पर ब्याज दर 6.7% है।

अक्टूबर-दिसंबर में क्या हो सकता है?

इसके पहले जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए सरकार ने सभी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। यह लगातार नौवीं तिमाही थी, जब इन योजनाओं की ब्याज दरें पहले जैसी ही रखी गईं।

30 सितंबर को मौजूदा तिमाही खत्म होने के साथ निवेशक सरकार के अगले फैसले का इंतजार कर रहे हैं। वित्त मंत्रालय आम तौर पर हर तिमाही के अंत में छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करता है। इसके बाद नई दरें अगली तिमाही के पहले दिन से लागू होती हैं।

अगर सरकार अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए दरों में बदलाव करती है, तो उसका असर 1 अक्टूबर से नई जमा और संबंधित योजनाओं पर दिखाई देगा। अगर दरें नहीं बदली जाती हैं, तो मौजूदा ब्याज दरें आगे भी जारी रहेंगी।

कैसे तय होती हैं छोटी बचत योजनाओं की दरें?

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा सरकारी सिक्योरिटीज यानी G-sec की यील्ड से जुड़े एक फॉर्मूले के आधार पर की जाती है। इसमें अलग-अलग योजनाओं के लिए संबंधित अवधि की G-sec यील्ड के ऊपर एक तय स्प्रेड जोड़ा जाता है।

इसका मतलब है कि बाजार में G-sec यील्ड में होने वाले बदलाव छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अंतिम ब्याज दर तय करने और उसे अधिसूचित करने का फैसला सरकार के पास रहता है। छोटी बचत योजनाओं की आधिकारिक दरों का रिकॉर्ड आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा रखा जाता है।

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