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  1. शेयर बाजार में नुकसान के बाद ITR फाइल करते वक्त ना करें ये गलती, जानें क्या है नियम?

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शेयर बाजार में नुकसान के बाद ITR फाइल करते वक्त ना करें ये गलती, जानें क्या है नियम?

Upstox

3 min read | अपडेटेड June 18, 2026, 15:39 IST

सारांश

शेयर बाजार में ट्रेडिंग या इन्वेस्टमेंट के दौरान अगर आपको नुकसान हुआ है, तो ITR फाइल करते वक्त सही नियम जानना बहुत जरूरी है। कई लोग नुकसान होने पर उसे अपने टैक्स रिटर्न में नहीं दिखाते हैं, जिससे उन्हें फ्यूचर में टैक्स छूट का फायदा नहीं मिल पाता है।

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शेयर बाजार में हुए नुकसान को ITR में दिखाकर आप फ्यूचर में टैक्स बचा सकते हैं।

शेयर बाजार में हर दिन तेजी रहे, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार निवेशकों और ट्रेडर्स को बाजार में भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में हुआ यह नुकसान आपके बड़े काम आ सकता है? जी हां, इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करते समय आप इस नुकसान को दिखाकर अपना टैक्स बचा सकते हैं। हालांकि, जानकारी की कमी के कारण बहुत से लोग ITR भरते वक्त एक बड़ी गलती कर बैठते हैं, जिससे उन्हें मिलने वाला टैक्स का फायदा पूरी तरह खत्म हो जाता है। अगर आप भी इस साल अपना टैक्स रिटर्न फाइल करने जा रहे हैं, तो इन जरूरी नियमों को अच्छी तरह समझ लें ताकि आपको किसी भी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।

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नुकसान को छिपाना है सबसे बड़ी भूल

अक्सर देखा जाता है कि जब किसी निवेशक को शेयर बाजार में नुकसान होता है, तो वह सोचता है कि जब कोई कमाई ही नहीं हुई तो ITR में इसे क्यों दिखाया जाए। यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है। इनकम टैक्स विभाग आपको शेयर बाजार में हुए घाटे को अपने प्रॉफिट के साथ एडजस्ट करने की सुविधा देता है, जिसे सेट ऑफ कहा जाता है। अगर आप इस नुकसान को अपने रिटर्न में दर्ज नहीं करेंगे, तो आप इसे आगे के सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि फ्यूचर में जब आपको शेयर बाजार से प्रॉफिट होगा, तब आप इस पुराने नुकसान को उसके साथ एडजस्ट करके टैक्स नहीं बचा पाएंगे। इसलिए बाजार के हर छोटे-बड़े घाटे को ITR में दिखाना बेहद फायदेमंद रहता है।

समय पर रिटर्न न भरना पड़ेगा भारी

नुकसान को आगे के सालों में ले जाने यानी कैरी फॉरवर्ड करने का सबसे पहला और जरूरी नियम यह है कि आपका ITR तय समय सीमा के भीतर फाइल होना चाहिए। आमतौर पर व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई होती है। अगर आप इस तय तारीख के बाद अपना रिटर्न फाइल करते हैं, जिसे बिलेटेड रिटर्न कहा जाता है, तो आप अपने नुकसान को कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार खो देते हैं। ऐसी स्थिति में वह नुकसान उसी साल खत्म हो जाता है और फ्यूचर में उसका कोई लाभ नहीं मिलता है। केवल हाउस प्रॉपर्टी से जुड़े नुकसान को ही देर से रिटर्न दाखिल करने पर कैरी फॉरवर्ड करने की इजाजत मिलती है।

शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म लॉस के अलग नियम

शेयर बाजार में होने वाले नुकसान को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जाता है और इनके सेट ऑफ के नियम भी बिल्कुल अलग हैं। अगर आपको शेयरों की बिक्री पर शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो आप इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन दोनों के सामने एडजस्ट कर सकते हैं। इसके विपरीत, अगर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो नियम थोड़े सख्त हैं। लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को केवल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के खिलाफ ही एडजस्ट किया जा सकता है, इसे शॉर्ट टर्म गेन के साथ नहीं मिलाया जा सकता। इन दोनों ही तरह के कैपिटल लॉस को आप अधिकतम 8 असेसमेंट सालों तक आगे ले जा सकते हैं और फ्यूचर के प्रॉफिट से एडजस्ट कर सकते हैं।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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