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4 min read | अपडेटेड October 11, 2026, 15:03 IST
सारांश
आरबीआई द्वारा रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% करने के बाद 1 से 2 करोड़ रुपए के बड़े होम लोन काफी महंगे हो गए हैं। 1 करोड़ के लोन पर हर महीने 1,589 रुपए और 2 करोड़ के लोन पर 3,177 रुपए ज्यादा देने होंगे।

आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद 1 से 2 करोड़ रुपए के बड़े होम लोन की EMI पर असर।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद रेपो रेट बढ़कर 5.50% हो गया है। फरवरी 2023 के बाद से यह पहला मौका है जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गई है। अगर आपने 1 करोड़ रुपए या 2 करोड़ रुपए जैसी बड़ी रकम का होम लोन ले रखा है और वह रेपो रेट से लिंक्ड है, तो बढ़ती महंगाई के बीच आपकी मंथली EMI का बजट काफी बढ़ने वाला है। 1 से 2 करोड़ रुपए के बड़े होम लोन पर इस 0.25% की बढ़ोतरी का कितना असर पड़ेगा और आपकी हर महीने की किस्त कितनी महंगी हो जाएगी, आइए आसान भाषा में इसका पूरा कैलकुलेशन समझते हैं।
अगर आपने 20 साल की अवधि के लिए 8.50% की मौजूदा ब्याज दर पर 1 करोड़ रुपए का होम लोन लिया है, तो आपकी पुरानी EMI 86,782 रुपए आती थी। अब रेपो रेट 0.25% बढ़कर 8.75% होने से आपकी नई EMI 88,371 रुपए हो जाएगी। यानी आपको हर महीने 1,589 रुपए ज्यादा देने होंगे और 20 साल में कुल 3.81 लाख रुपए का अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ेगा। वहीं अगर आपका होम लोन 1.5 करोड़ रुपए का है, तो EMI 1,30,173 रुपए से बढ़कर 1,32,557 रुपए हो जाएगी, जिससे हर महीने 2,383 रुपए का बोझ बढ़ेगा और कुल एक्स्ट्रा ब्याज 5.72 लाख रुपए बैठेगा। इसी तरह 2 करोड़ रुपए के भारी-भरकम लोन पर आपकी मंथली EMI 1,73,565 रुपए से बढ़कर 1,76,742 रुपए हो जाएगी। इसका मतलब है कि आपको हर महीने 3,177 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे और 20 साल के टेन्यूर में कुल 7.63 लाख रुपए का भारी अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा। इसके अलावा 8.00% की दर पर 2 करोड़ के लोन की EMI 1,67,288 रुपए से बढ़कर 1,70,413 रुपए हो जाएगी।
रेपो रेट में 0.25% की तेजी से ओवरऑल EMI में लगभग 1.8% का इजाफा होता है, यानी हर 50 लाख के लोन पर करीब 794 रुपए महीना बढ़ जाता है। अगर कोई ग्राहक हर महीने बढ़ी हुई EMI देने के बजाय अपनी पुरानी EMI ही जारी रखना चाहता है, तो बैंक उसके लोन का टेन्यूर यानी अवधि बढ़ा देता है। 8.50% की दर वाले लोन पर अगर EMI नहीं बढ़ाई जाती है, तो जो लोन 240 महीने यानी 20 साल में खत्म होना था, उसे चुकाने में अब 253 महीने यानी 21.1 साल का समय लगेगा। यानी ग्राहक को 13 महीने ज्यादा EMI भरनी पड़ेगी। वहीं अगर यह केवल एक बार की बढ़ोतरी न होकर रेट हाइक सायकल की शुरुआत होती है, तो 1 करोड़ के लोन पर 50, 75 या 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी होने पर EMI बढ़कर क्रमशः 89,973 रुपए, 91,587 रुपए और 93,213 रुपए तक पहुंच सकती है।
रेपो रेट बढ़ने के बाद 1 से 2 करोड़ रुपए के बड़े लोन लेने वाले ग्राहकों को कुछ अहम बातें चेक कर लेनी चाहिए। सबसे पहले यह देखें कि आपका लोन रेपो रेट यानी EBLR से लिंक्ड है या फिर MCLR से। रेपो रेट से जुड़े लोन की ब्याज दरें बैंक तुरंत एक महीने या एक तिमाही के भीतर बढ़ा देते हैं, जबकि MCLR से जुड़े लोन में यह बदलाव धीरे-धीरे होता है। वहीं फिक्स्ड रेट वाले होम लोन ग्राहकों पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं पड़ेगा। दूसरी बात यह है कि बैंक का स्प्रेड सैंक्शन के वक्त फिक्स होता है, इसलिए रेपो रेट बढ़ने से सिर्फ बेंचमार्क वाला हिस्सा ही बदलता है। तीसरी बात यह ध्यान रखें कि कम टेन्यूर वाले लोन पर ब्याज दर बढ़ने का असर कम होता है, जैसे 50 लाख के 15 साल के लोन पर EMI केवल 735 रुपए ही बढ़ती है।
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