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3 min read | अपडेटेड September 18, 2025, 14:34 IST
सारांश
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर फोन खरीदते समय ग्राहक से स्पष्ट सहमति (consent) ली जाए और शर्तों में यह प्रावधान रखा जाए, तो इसे कानूनी रूप से लागू किया जा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे बैंक गाड़ी का लोन न चुकाने पर वाहन जब्त कर सकते हैं।

RBI: फिलहाल भारत में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि बैंक या कोई संस्था किसी का फोन दूर से लॉक कर सके।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) छोटे कर्जों में बढ़ते डिफॉल्ट को रोकने के लिए एक नई व्यवस्था लाने पर विचार कर रहा है। इसके तहत, अगर कोई ग्राहक लोन पर मोबाइल फोन (Smartphone) खरीदने के बाद किस्त नहीं चुकाता है, तो बैंक उस फोन को दूर से (Remotely) लॉक कर सकेंगे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक RBI इसके लिए अपनी Fair Practices Code (FPC) में बदलाव की योजना बना रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या किसी बैंक या वैधानिक निकाय के लिए मोबाइल फोन को दूर से लॉक करना कानूनी रूप से संभव है? अपस्टॉक्स ने इस मुद्दे को समझने के लिए चार वकीलों से बात की। आइए जानते हैं कानून इस मामले में क्या कहता है।
फिलहाल भारत के Consumer Protection Act, 2019 और Information Technology Act, 2000 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि बैंक या कोई संस्था किसी का फोन दूर से लॉक कर सके। SKV लॉ ऑफिसेस में पार्टनर और कॉर्पोरेट प्रैक्टिस प्रमुख प्रणव भास्कर ने बताया कि RBI या अन्य किसी वित्तीय संस्था के पास अभी ऐसा कानूनी अधिकार नहीं है।
इसके अलावा, Legum Solis के फाउंडर शशांक अग्रवाल का कहना है कि IT एक्ट तो यह भी कहता है कि किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से बिना मालिक की अनुमति छेड़छाड़ करना गलत है। Victoriam Legalis के मैनेजिंग पार्टनर आदित्य चोपड़ा ने कहा कि भले ही RBI के पास व्यापक नियामक अधिकार हैं, लेकिन ग्राहकों के स्मार्टफोन तक सीधी पहुंच एक जटिल कानूनी मुद्दा है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर फोन खरीदते समय ग्राहक से स्पष्ट सहमति (consent) ली जाए और शर्तों में यह प्रावधान रखा जाए, तो इसे कानूनी रूप से लागू किया जा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे बैंक गाड़ी का लोन न चुकाने पर वाहन जब्त कर सकते हैं। हालांकि, आरबीआई को इसके लिए नई गाइडलाइंस लानी होंगी।
वकीलों का कहना है कि अगर यह नियम लागू होता है, तो फोन को केवल अस्थायी रूप से लॉक किया जाएगा ताकि वह काम न करे, लेकिन बैंक को ग्राहक के निजी डेटा तक पहुंचने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, आरबीआई को यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंकों के पास ऐसा कोई अधिकार न हो जिससे वे ग्राहकों की निजी जानकारी का दुरुपयोग कर सकें।
मोबाइल फोन आज काम, शिक्षा, आपात स्थिति और सरकारी योजनाओं तक पहुंच का अहम साधन है। ऐसे में फोन लॉक करना सीधे तौर पर व्यक्ति की गोपनीयता और मौलिक अधिकारों पर असर डाल सकता है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही 2017 के K.S. Puttaswamy केस में गोपनीयता को मौलिक अधिकार मान चुका है। इस वजह से, अगर RBI ऐसा नियम लाता है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि यह कानून और संविधान के अनुरूप हो।
अभी किसी भी बैंक या संस्था को फोन दूर से लॉक करने का अधिकार नहीं है। लेकिन अगर आरबीआई नई गाइडलाइंस लाता है और ग्राहक की सहमति ली जाती है, तो यह संभव हो सकता है। इसके बावजूद, इसमें डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और संवैधानिक अधिकारों जैसी बड़ी चुनौतियां बनी रहेंगी।
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