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3 min read | अपडेटेड May 12, 2026, 14:40 IST
सारांश
रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षकों के संगठन IRTSA ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इसमें पुरानी पेंशन योजना की वापसी, 40 पर्सेंट तक मकान किराया भत्ता (HRA) और महंगाई भत्ते की गणना के लिए अलग इंडेक्स जैसी मांगें शामिल हैं। साथ ही बच्चों की पढ़ाई के लिए भत्ता बढ़ाने की भी बात कही गई है।

रेलवे और केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। | Image: Shutterstock.
रेलवे कर्मचारियों और केंद्र सरकार के दूसरे वर्कर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन यानी IRTSA ने कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों को लेकर कई अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इस संगठन का कहना है कि वर्तमान नियमों में सुधार की जरूरत है ताकि कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई और लाइफस्टाइल के खर्चों के हिसाब से सही मुआवजा मिल सके। इन प्रस्तावों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली से लेकर मकान किराया भत्ते में भारी बढ़ोतरी जैसी कई बड़ी मांगें शामिल की गई हैं।
संगठन ने मांग की है कि महंगाई भत्ते यानी DA की गणना के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों का एक अलग कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि अभी का तरीका कर्मचारियों के घर के खर्चों को सही तरह से नहीं दर्शाता है। नए प्रस्ताव में इंटरनेट का खर्चा, बोतलबंद पानी, हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम और दूसरे लाइफस्टाइल खर्चों को भी शामिल करने की बात कही गई है। इसके अलावा मकान किराया भत्ते यानी HRA के लिए चार लेवल का सिस्टम बनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें 50 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के लिए 40 पर्सेंट HRA और कम आबादी वाले शहरों के लिए 30, 20 और 10 पर्सेंट के हिसाब से अलाउंस देने की मांग की गई है।
रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी IRTSA ने बहुत ही महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संगठन ने 1 जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को फिर से लागू करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाली ग्रेच्युटी की गणना में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक हर 6 महीने की सर्विस के लिए बेसिक पे और DA का एक तिहाई हिस्सा ग्रेच्युटी के तौर पर तय किया जाना चाहिए। इससे रिटायर होने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों को भविष्य में ज्यादा आर्थिक मजबूती मिल सकेगी।
कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा को लेकर भी प्रस्ताव में बड़ी बात कही गई है। संगठन चाहता है कि चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस यानी CEA को बच्चों की पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी होने तक दिया जाए। इसके साथ ही इस भत्ते को बढ़ाकर 10,000 रुपये महीना या पढ़ाई का वास्तविक खर्चा करने का सुझाव दिया गया है। वहीं करियर में तरक्की के लिए MACPS स्कीम में भी बड़े सुधार की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि 30 साल के करियर के दौरान कर्मचारियों को पांच बार फाइनेंशियल अपग्रेड मिलना चाहिए। यह अपग्रेड सर्विस के 6, 12, 18, 24 और 30 साल पूरे होने पर देने का प्रस्ताव है।
लीव एनकैशमेंट यानी छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे के नियमों को भी आसान बनाने की मांग की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक कर्मचारियों को अपनी सर्विस के दौरान खाते में जमा आधी छुट्टियों को कैश कराने की इजाजत मिलनी चाहिए। रिटायरमेंट के वक्त छुट्टियों को कैश कराने की लिमिट को भी 300 दिन से बढ़ाकर 600 दिन करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा ड्यूटी के सिलसिले में बाहर जाने वाले कर्मचारियों के लिए डेली अलाउंस और यात्रा खर्च को वर्तमान रेट से तीन गुना बढ़ाने की मांग की गई है। नाइट ड्यूटी अलाउंस के लिए वर्तमान फॉर्मूले को ही सही बताया गया है और इसे जारी रखने की सलाह दी गई है।
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