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4 min read | अपडेटेड September 30, 2026, 15:56 IST
सारांश
सरकार ने कर्मचारियों के लिए EPF वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। यह नया नियम सितंबर 2026 से लागू हो गया है। इस बदलाव से कर्मचारियों का मासिक पीएफ योगदान बढ़ेगा, जिससे फ्यूचर की सेविंग्स तो मजबूत होगी, लेकिन टेक होम सैलरी पर असर पड़ सकता है।

EPFO की वेज सीलिंग 15,000 रुपये से बढ़कर 25,000 रुपये हो गई है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF में वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है। यह नया बदलाव 17 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है। इस फैसले के बाद EPF की वेज सीलिंग अपने इतिहास में पहली बार 25,000 रुपये के स्तर पर पहुंची है। इस बदलाव से 15,000 रुपये से ज्यादा और 25,000 रुपये तक की बेसिक वेज वाले नए कर्मचारी भी अनिवार्य EPF कवरेज के दायरे में आ सकेंगे। इससे कर्मचारियों का पीएफ योगदान बढ़ेगा जिससे उनके फ्यूचर के लिए रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा।
EPF की शुरुआत आज से करीब 74 साल पहले हुई थी। नवंबर 1952 में जब EPF स्कीम शुरू की गई थी, तब इसकी वेज सीलिंग केवल 300 रुपये महीने तय की गई थी। इसके बाद जून 1957 में इसे बढ़ाकर 500 रुपये और दिसंबर 1962 में 1,000 रुपये किया गया था। साल 1952 से लेकर 2026 तक वेज सीलिंग में कुल 9 बार बदलाव किया जा चुका है। दिसंबर 1976 में यह लिमिट 1,600 रुपये, सितंबर 1985 में 2,500 रुपये, नवंबर 1990 में 3,500 रुपये, अक्टूबर 1994 में 5,000 रुपये और जून 2001 में 6,500 रुपये की गई थी। जून 2001 की 6,500 रुपये की लिमिट करीब 13 साल तक चली। इसके बाद सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया, जो 16 सितंबर 2026 तक लागू रही। अब 17 सितंबर 2026 से यह सीमा 25,000 रुपये हो गई है, जो शुरुआती दौर की तुलना में 83 गुना से भी ज्यादा है।
इस नई वेज सीलिंग का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनकी बेसिक वेज 15,000 रुपये से ज्यादा और 25,000 रुपये तक है। अगर किसी कर्मचारी की बेसिक वेज 25,000 रुपये है और उसका योगदान पूरी सीमा पर होता है, तो उसका 12% पीएफ योगदान 3,000 रुपये महीना बनेगा। पुरानी 15,000 रुपये की सीलिंग के हिसाब से यह योगदान 1,800 रुपये महीना होता था। यानी अधिकतम वेज सीलिंग पर कर्मचारी का मासिक योगदान सीधे 1,200 रुपये बढ़ जाएगा। हालांकि, वास्तविक योगदान कर्मचारी की बेसिक वेज, पात्रता और EPF के लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
EPF में केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि नियोक्ता यानी कंपनी भी बराबर का योगदान करती है। 25,000 रुपये की नई लिमिट पर कंपनी का कुल 12% योगदान 3,000 रुपये बैठता है। कंपनी के इस योगदान में कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS का हिस्सा भी शामिल होता है। 25,000 रुपये की सीमा पर 8.33% के हिसाब से अधिकतम EPS योगदान अब 2,083 रुपये महीना हो सकता है। पुरानी 15,000 रुपये की लिमिट में अधिकतम EPS योगदान 1,250 रुपये था। इस तरह वेज सीलिंग बढ़ने से पात्र कर्मचारियों के लिए EPF और EPS दोनों में जमा होने वाली कुल रकम बढ़ जाएगी।
वेज सीलिंग बढ़ने से कर्मचारियों की सैलरी पर दो अलग-अलग तरह के असर देखने को मिलेंगे। हर महीने पीएफ का कटाव बढ़ने की वजह से कर्मचारियों की हाथ में आने वाली यानी टेक होम सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है। इससे कर्मचारियों के मासिक बजट पर थोड़ा दबाव पड़ सकता है। लेकिन दूसरी तरफ, हर महीने EPF अकाउंट में ज्यादा पैसा जमा होने से उनके फ्यूचर की रिटायरमेंट सेविंग्स काफी मजबूत होगी। इस तरह यह फैसला वर्तमान की टेक होम सैलरी को थोड़ा कम करके फ्यूचर के लिए बड़ी बचत बनाने में मदद करेगा।
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