पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड March 04, 2025, 09:04 IST
सारांश
महिलाओं का योगदान किस तरह से भारत की फाइनेंशियल ग्रोथ में बढ़ा है, इसका जिक्र नीति आयोग की एक रिपोर्ट में किया गया है। भारतीय महिलाओं अपने फाइनेंसेज को लेकर कितनी जागरूक हो गई हैं और इसका असर किस तरह से भारतीय इकॉनमी पर पड़ रहा है, इसका जिक्र रिपोर्ट में किया गया है।

भारतीय फाइनेंशियल ग्रोथ में महिलाओं का योगदान
नीति आयोग ने 3 मार्च को बॉरोअर्स टू बिल्डर्सः भारतीय फाइनेंशियल ग्रोथ में महिलाओं का रोल टाइटल से एक रिपोर्ट जारी की है। नीति आयोग के सीईओ श्री बीवीआर सुब्रह्मण्यम द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में अधिक महिलाएं कर्ज लेना चाहती हैं और काफी ऐक्टिवली अपने क्रेडिट स्कोर पर नजर बनाए रखती हैं। दिसंबर 2024 तक 27 मिलियन महिलाएं अपने क्रेडिट स्कोर की जांच कर चुकी हैं, जो पिछले साल की तुलना में 42% की ग्रोथ दिखाता है और साथ ही यह फाइनेंशियल अवेयरनेस की ग्रोथ को भी दर्शाता है। इस रिपोर्ट को ट्रांसयूनियन CIBIL, नीति आयोग के विमेन एंटरप्रेनॉरशिप प्लैटफॉर्म (डब्ल्यूईपी) और माइक्रोसेव कंसल्टिंग (एमएससी) द्वारा पब्लिश किया गया है।
लॉन्च के दौरान, नीति आयोग के सीईओ श्री बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने महिला एंटरप्रेनॉर को सशक्त बनाने में फाइनेंस तक पहुंच के अहम रोल पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा, ‘सरकार मानती है कि फाइनेंस तक पहुंच महिला एंटरप्रेनॉर के लिए एक बुनियादी प्रवर्तक है। डब्ल्यूईपी का एक समावेशी इको-सिस्टम बनाने की दिशा में काम करना जारी है, जो वित्तीय साक्षरता, ऋण तक पहुंच, मेंटॉरशिप और बाजार लिंकेज को बढ़ावा देता है। हालांकि, न्यायसंगत वित्तीय पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक सामूहिक कोशिश की जरूरत है। महिलाओं की जरूरतों के हिसाब से प्रोडक्ट्स को डिजाइन करने में फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स का रोल, साथ ही स्ट्रक्चरल बैरियर्स को संबोधित करने वाली नीतिगत पहलें, इसको बढ़ाने में सहायक होंगी। डब्ल्यूईपी ने इस गोल को हासिल करने के लिए, फाइनेंसिंग वूमेन कोलैबोरेटिव (एफडब्ल्यूसी) का गठन किया गया है। हम चाहते हैं कि वित्तीय क्षेत्र के और अधिक हितधारक एफडब्ल्यूसी से जुड़ें और इस मिशन में अपना योगदान दें।’
नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार और डब्ल्यूईपी की मिशन निदेशक अन्ना रॉय ने कहा, ‘महिला एंटरप्रेनॉरशिप को बढ़ावा देना भारतीय वर्कफोर्स में आने वाली महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने का एक तरीका है। यह समान आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक सही स्ट्रैटजी के रूप में भी काम करता है। महिला एंटरप्रेनॉरशिप को बढ़ावा देने से 150 से 170 मिलियन लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और साथ ही इससे लेबर फोर्स में महिलाओं की अधिक भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है।’ रिपोर्ट के मुताबिक कुल सेल्फ मॉनिटरिंग बेस में महिलाओं की हिस्सेदारी दिसंबर 2024 में बढ़कर 19.43% हो गई है, जो 2023 में 17.89% थी। गैर-मेट्रो क्षेत्रों की महिलाएं, मेट्रो क्षेत्रों की तुलना में, अपने क्रेडिट स्कोर की सक्रिय रूप से खुद निगरानी कर रही हैं, गैर-मेट्रो क्षेत्रों में 48% और मेट्रो क्षेत्रों में 30% की वृद्धि हुई है। 2024 में, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में सभी सेल्फ मॉनिटरिंग महिलाओं का 49% हिस्सा होगा, जिसमें दक्षिणी क्षेत्र 10.2 मिलियन के साथ सबसे आगे है।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित उत्तरी और मध्य राज्यों में पिछले पांच सालों में एक्टिव विमेन बॉरोअर्स में सबसे अधिक कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखी गई है। 2019 से, बिजनेस लोन उत्पत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी में 14% की वृद्धि हुई है और गोल्ड लोन में उनकी हिस्सेदारी 6% बढ़ी है, दिसंबर 2024 तक बिजनेस बॉरोअर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 35% थी। हालांकि, क्रेडिट से बचने, खराब बैंकिंग अनुभव, ऋण तत्परता में बाधाएं और कलैटरल और गारंटर के साथ समस्याएं जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। बढ़ती ऋण जागरूकता और बेहतर स्कोर के साथ, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के पास महिलाओं की अनूठी आवश्यकताओं के हिसाब से जेंडर-स्मार्ट फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स पेश करने का मौका है।
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