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  1. न्यू टैक्स रिजीम में भी बचेगा टैक्स, बस फॉलो करने होंगे ये कमाल के तरीके

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न्यू टैक्स रिजीम में भी बचेगा टैक्स, बस फॉलो करने होंगे ये कमाल के तरीके

Upstox

4 min read | अपडेटेड June 18, 2026, 17:01 IST

सारांश

आम तौर पर माना जाता है कि नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स बचाने का कोई मौका नहीं मिलता है। लेकिन यह बात पूरी तरह सच नहीं है। न्यू टैक्स रिजीम में भी सैलरीड कर्मचारियों के लिए कई ऐसी छूट और कटौतियां मौजूद हैं, जिनकी मदद से वे अपना टैक्स का बोझ आसानी से कम कर सकते हैं।

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नई टैक्स व्यवस्था के तहत भी सैलरीड कर्मचारी इन तरीकों से टैक्स बचा सकते हैं। | Image: Shutterstock.

बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि नई टैक्स व्यवस्था यानी न्यू टैक्स रिजीम को चुनने के बाद टैक्स बचाने का कोई भी मौका नहीं बचता है। लोग सोचते हैं कि इस नई व्यवस्था में पुरानी सभी छूट खत्म हो चुकी हैं, इसलिए टैक्स प्लानिंग का कोई फायदा नहीं है। लेकिन आपको बता दें कि यह सोच पूरी तरह से सही नहीं है। नई टैक्स व्यवस्था के भीतर भी कुछ ऐसी खास छूट, टैक्स कटौतियां और आपकी कंपनी यानी एम्प्लायर की तरफ से मिलने वाले फायदे शामिल हैं, जिनकी मदद से नौकरीपेशा कर्मचारी अपने टैक्स के बोझ को काफी हद तक कम कर सकते हैं। अगर आप सही तरीके से प्लानिंग करते हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था में भी अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स में जाने से बचा सकते हैं।

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एनपीएस में कंपनी का योगदान देता है बड़ा फायदा

नई टैक्स व्यवस्था के तहत नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में अगर आपकी कंपनी योगदान करती है, तो आपको धारा 80CCD(2) के तहत टैक्स में बड़ी छूट मिलती है। अगर कंपनी आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते यानी DA का कुल 14 पर्सेंट तक हिस्सा NPS में जमा करती है, तो वह पूरी राशि टैक्स कटौती के दायरे में आती है। यह फायदा आपको मिलने वाले 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन से बिल्कुल अलग मिलता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA मिलाकर 12 लाख रुपये है और कंपनी उसकी तरफ से 14 पर्सेंट यानी 1.68 लाख रुपये एनपीएस में जमा करती है, तो इस पूरी रकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि, ध्यान रहे कि कर्मचारी द्वारा खुद किए गए NPS योगदान पर इसमें कोई छूट नहीं मिलती है।

ईपीएफ में कंपनी के योगदान पर भी है छूट

न्यू टैक्स रिजीम में कर्मचारी खुद जो ईपीएफ यानी एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड में योगदान करता है, उस पर धारा 80C के तहत कोई छूट नहीं मिलती है। लेकिन कंपनी की तरफ से आपके ईपीएफ अकाउंट में जो पैसा डाला जाता है, उस पर एक तय सीमा तक टैक्स लाभ मिलता है। हालांकि, इसके लिए टैक्स नियम में एक शर्त भी जुड़ी हुई है। यदि कंपनी द्वारा आपके EPF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड में किया गया कुल सालाना योगदान 7.5 लाख रुपये से ऊपर निकल जाता है, तो उस अतिरिक्त रकम पर आपको टैक्स देना पड़ेगा। इसके नीचे की रकम पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन और होम लोन ब्याज का लाभ

नई टैक्स व्यवस्था अपनाने वाले सभी सैलरीड कर्मचारियों और पेंशन पाने वाले लोगों को सरकार की तरफ से सीधे 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया जाता है। इस बड़ी छूट का दावा करने के लिए आपको किसी भी तरह का बिल या खर्च का प्रूफ देने की कोई जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा, यदि आपने कोई मकान किराये पर उठा रखा है और उस संपत्ति के लिए होम लोन ले रखा है, तो उसके ब्याज पर मिलने वाली टैक्स कटौती का फायदा भी नई टैक्स व्यवस्था में बरकरार रहता है। लेकिन याद रहे कि इस कटौती का इस्तेमाल केवल हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली इनकम के खिलाफ ही किया जा सकता है।

ऑफिशियल भत्ते और मोबाइल रीइम्बर्समेंट

इस नई व्यवस्था में भी कंपनी की तरफ से मिलने वाली कुछ सुविधाएं और रीइम्बर्समेंट पूरी तरह टैक्स फ्री रहते हैं। जैसे ऑफिस के काम के लिए इस्तेमाल होने वाले मोबाइल और इंटरनेट बिल का रीइम्बर्समेंट, ऑफिस की तरफ से मिलने वाला फोन, हेल्थ प्रोग्राम और कुछ खास मामलों में मिलने वाले मील वाउचर पर टैक्स नहीं लगता है। साथ ही, ऑफिशियल यात्रा, ट्रांसफर या ड्यूटी के दौरान होने वाले खर्च और दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाला ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी टैक्स फ्री होता है। ऑफिस की जरूरी यूनिफॉर्म की खरीद और उसके रखरखाव के लिए मिलने वाला भत्ता भी शर्तों के साथ छूट के दायरे में आता है।

कंपनी से मिले गिफ्ट और फैमिली पेंशन में राहत

टैक्स नियमों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की तरफ से मिलने वाले 5,000 रुपये तक के गिफ्ट पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा शादी, वसीयत या विरासत के जरिए मिलने वाले उपहार भी टैक्स से मुक्त रखे गए हैं। वहीं, अगर किसी मृत कर्मचारी के परिवार का सदस्य फैमिली पेंशन पा रहा है, तो उसे भी नई व्यवस्था में कटौती का लाभ मिलता है। यह कटौती फैमिली पेंशन के एक-तिहाई हिस्से या 25,000 रुपये सालाना, जो भी कम हो, तक मिलती है। साफ है कि पुरानी छूट खत्म होने के बाद भी स्मार्ट टैक्स प्लानिंग से नया टैक्स सिस्टम आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है और आप अपना फ्यूचर बेहतर कर सकते हैं।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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