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4 min read | अपडेटेड June 18, 2026, 13:07 IST
सारांश
भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक व्यापार और सामाजिक सुरक्षा समझौता आगामी 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से मुलाकात के बाद इसकी घोषणा की। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

भारत और यूके के बीच हुए डील से देश को कितना फायदा? (PTI Photo)
भारत और ब्रिटेन के व्यापारिक रिश्तों में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। दोनों देशों के बीच होने वाला बड़ा आर्थिक और व्यापार समझौता आगामी 15 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू हो जाएगा। इसके साथ ही सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट यानी दोहरा अंशदान समझौता भी इसी तारीख से अमल में आएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ एक बेहद अहम मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी और बताया कि दोनों देश इस समझौते को 15 जुलाई से लागू करने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इसे भारत और ब्रिटेन के रिश्तों के लिए एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है।
इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होने से भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में भारी उछाल आने की उम्मीद है। पीएम मोदी के मुताबिक, इस डील से भारतीय किसानों, कामगारों, छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME), स्टार्टअप्स और इनोवेशन के सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए कमाई और तरक्की के नए और शानदार अवसर पैदा होंगे। यह समझौता साल 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में भी एक बहुत बड़ी और सार्थक भूमिका निभाएगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस कामयाबी पर दोनों देशों के नेताओं को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह अगली पीढ़ी का समझौता है, जिससे भारत से होने वाले एक्सपोर्ट को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा।
इस व्यापक व्यापार साझेदारी के तहत भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले लगभग 99 पर्सेंट सामान पर जीरो ड्यूटी लगेगी, यानी कोई टैक्स नहीं देना होगा। इससे भारतीय कपड़ा, चमड़ा, मरीन प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड सेक्टर्स को ग्लोबल मार्केट में बराबरी का मौका मिलेगा। इस समझौते के लागू होते ही प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स पर लगने वाला 70 पर्सेंट तक का भारी टैक्स पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसी तरह मरीन प्रोडक्ट्स पर 21.5 पर्सेंट तक का टैक्स समाप्त हो जाएगा। इंजीनियरिंग सामान और गाड़ियों के कलपुर्जों पर 18 पर्सेंट तक की टैक्स कटौती होगी, जबकि जूते-चप्पल और चमड़े के सामान पर 16 पर्सेंट तक का टैक्स पूरी तरह हट जाएगा। कपड़ा और कपड़ों से जुड़े सामान पर 12 पर्सेंट और केमिकल तथा फार्मा प्रोडक्ट्स पर 8 पर्सेंट तक का ड्यूटी टैक्स खत्म हो जाएगा। इसके अलावा करीब 137 उप-क्षेत्रों में सर्विस एक्सपोर्ट का भी बड़ा विस्तार होगा, जिसमें आईटी, एजुकेशन और प्रोफेशनल सर्विसेज शामिल हैं।
इस व्यापार समझौते का एक और सबसे बड़ा फायदा ब्रिटेन में काम कर रहे भारतीय कर्मचारियों को मिलने जा रहा है। सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के तहत ब्रिटेन में अस्थाई रूप से काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स और उनकी कंपनियों को दोहरे सोशल सिक्योरिटी अंशदान से पूरी तरह छूट मिल जाएगी। इसका मतलब है कि उन्हें दोनों देशों में दोहरा टैक्स या योगदान नहीं देना होगा। इस फैसले से ब्रिटेन में मौजूद 75 हजार से ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स और 900 से ज्यादा भारतीय कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचेगा। सरकार ने इस छूट की समय सीमा को भी तीन साल से बढ़ाकर अब पांच साल कर दिया है, जो विदेश में काम करने वाले भारतीयों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स की ताकत और मार्केट में उनकी पकड़ और भी ज्यादा मजबूत होगी।
भारत और ब्रिटेन के बीच इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। दोनों पक्षों के बीच करीब 14 दौर की लंबी और गंभीर बातचीत हुई, जिसके बाद 6 मई 2025 को इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सका था। इसके बाद 24 जुलाई 2025 को लंदन में पीएम मोदी और कीर स्टारमर की मौजूदगी में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इस समझौते पर दस्तखत किए थे। वहीं डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन पर इसके बाद 10 फरवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए थे। अब 15 जुलाई से इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के व्यापार में एक नए सुनहरे युग की शुरुआत होने जा रही है।
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