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3 min read | अपडेटेड May 26, 2026, 12:21 IST
सारांश
एक एक्सपोर्ट अवार्ड कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने साफ किया कि सरकार टैक्स सिस्टम और खासकर LTCG व STCG टैक्स पर निवेशकों से इनपुट लेने को हमेशा तैयार है। हालांकि उन्होंने टैक्स में किसी तुरंत बदलाव का एलान नहीं किया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
शेयर मार्केट के निवेशकों और ट्रेडर के लिए एक बड़ी खबर आ रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को कहा है कि सरकार स्टॉक मार्केट निवेशकों की उन सभी चिंताओं और दिक्कतों को सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो टैक्स सिस्टम से जुड़ी हुई हैं। इसमें खासकर LTCG और STCG टैक्स से जुड़े मामले शामिल हैं। एक अवार्ड इवेंट के दौरान मीडिया से बात करते हुए वित्त मंत्री ने साफ किया कि सरकार इस मामले पर निवेशकों से सुझाव और फीडबैक लेने के लिए हमेशा अपने दरवाजे खुले रखती है।
वित्त मंत्री ने मार्केट के लोगों की मांग पर जवाब देते हुए कहा कि इस खास मुद्दे पर या किसी भी दूसरे मुद्दे पर सरकार हमेशा लोगों की बात सुनने और समझने के लिए तैयार रहती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निवेशकों से मिलने वाले इनपुट पर सरकार जरूर ध्यान देगी। आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से मार्केट के निवेशकों के बीच इस बात को लेकर काफी चर्चा चल रही है कि कैपिटल गेन्स टैक्स की वजह से शेयर मार्केट में लोगों के निवेश करने के तरीके और उनके भरोसे पर असर पड़ रहा है।
LTCG और STCG वह टैक्स होते हैं जो शेयरों या दूसरे फाइनेंशियल एसेट्स को बेचने पर मिलने वाले मुनाफे पर लगते हैं। कम समय में शेयर बेचने पर STCG और लंबे समय तक निवेश रखने के बाद बेचने पर LTCG टैक्स लगता है। हालांकि वित्त मंत्री ने टैक्स स्ट्रक्चर में किसी भी तरह के तुरंत बदलाव या समीक्षा का कोई औपचारिक एलान नहीं किया है, लेकिन उनके इस बयान को निवेशक एक अच्छे संकेत के रूप में देख रहे हैं।
वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब घरेलू शेयर मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव, विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने और बढ़ती महंगाई व ब्याज दरों की चिंताओं के कारण मार्केट का माहौल थोड़ा गर्म है। ऐसे में निवेशकों को लग रहा है कि सरकार उनकी दिक्कतों को समझने और टैक्स से जुड़े मामलों पर बातचीत करने के लिए गंभीर है। इसके अलावा वित्त मंत्री ने देश की आर्थिक स्थिति से जुड़े कई दूसरे जरूरी मामलों पर भी खुलकर बात की और सरकार का रुख साफ किया।
टैक्स के अलावा वित्त मंत्री ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ की। उन्होंने कहा कि कीमतों में यह बढ़ोतरी किसी सरकारी पॉलिसी में बदलाव की वजह से नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से ऑपरेशनल है और ग्लोबल मार्केट से होने वाली खरीद के हालातों पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए खुद बहुत बड़ा आर्थिक बोझ उठाया था।
सरकार ने केंद्रीय टैक्स में कटौती करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये का बड़ा घाटा सहा था, ताकि दो और ढाई महीने से ज्यादा समय तक आम उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों के झटके से बचाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने गोल्ड ऑप्टिमाइजेशन, RBI डिविडेंड और पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत की ग्रोथ को लेकर भी अपनी बातें रखीं।
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