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3 min read | अपडेटेड May 06, 2026, 15:17 IST
सारांश
सर्कुलर में उन सरकारी कर्मचारियों के लिए संशोधित एनपीएस के एग्जिक्यूशन का डीटेल्ड प्रोसेस बताया गया है, जो इसे अपनाने का ऑप्शन चुनते हैं। इसमें क्लियर किया गया कि यह योजना केवल उन्हीं पर लागू होगी जो निर्धारित समयसीमा के भीतर विकल्प का प्रयोग करेंगे।

कर्मचारियों के लिए संशोधित एनपीएस वैकल्पिक है: महाराष्ट्र सरकार
महाराष्ट्र सरकार ने मौजूदा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (National Pension System, NPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए संशोधित एनपीएस को ऑप्शनल बना दिया है। यह जानकारी राज्य के वित्त विभाग द्वारा बुधवार को जारी एक सर्कुलर में दी गई। सर्कुलर में उन सरकारी कर्मचारियों के लिए संशोधित एनपीएस के एग्जिक्यूशन का पूरा प्रोसेस बताया गया है, जो इसे अपनाने का ऑप्शन चुनते हैं। इसमें क्लियर किया गया कि यह योजना केवल उन्हीं पर लागू होगी जो निर्धारित समयसीमा के अंदर ऑप्शन का इस्तेमाल करेंगे। सरकार ने पहले पात्र और इच्छुक कर्मचारियों को 31 दिसंबर 2026 तक संशोधित योजना में शामिल होने का ऑप्शन देने की अनुमति दी थी। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने कुछ साल पहले केंद्र की एकीकृत पेंशन योजना (Unified Pension Scheme, UPS) के अनुरूप राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए संशोधित एनपीएस लागू करने को मंजूरी दी थी।
सरकार की वेबसाइट पर जारी नए सर्कुलर के मुताबिक निर्धारित आयु में रिटायर होने वाले और 20 साल या उससे अधिक समय तक सर्विस पूरी कर चुके और संशोधित योजना का सिलेक्शन करने वाले कर्मचारियों को अंतिम सैलरी का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा, साथ ही महंगाई भत्ता भी दिया जाएगा। 10 से 20 साल की सेवा वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन, अंतिम वेतन के आधार पर सर्विस पीरियड के अनुपात में तय की जाएगी। सरकार ने संशोधित योजना के तहत कम से कम 10 साल की सर्विस के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये प्रति माह तय की है जबकि 10 साल से कम सर्विस देने वाले कर्मचारी पेंशन लाभ के पात्र नहीं होंगे। सर्कुलर के अनुसार, परिवार पेंशन के रूप में स्वीकृत पेंशन का 60% महंगाई राहत के साथ दिया जाएगा। इसमें यह भी अनिवार्य किया गया कि संशोधित योजना का चयन करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) से प्राप्त कुल संचित राशि का 60% सरकार के पास आहरण एवं वितरण अधिकारी (Drawing and Disbursing Officer, DDO) के माध्यम से जमा करना होगा।
संचित निधि का बचा 40% हिस्सा ‘एन्युटी’ (नियमित पेंशन देने वाली बीमा योजना) खरीदने के लिए उपयोग किया जाएगा और ‘एन्युटी’ की राशि को राज्य सरकार द्वारा देय पेंशन के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा। सर्कुलर में कहा गया कि एनपीएस फंड से पहले की गई किसी भी निकासी को संशोधित योजना चुनने वाले कर्मचारियों को 10% ब्याज सहित वापस करना होगा, अन्यथा उनकी पेंशन पात्रता उसी अनुपात में घटा दी जाएगी।
सेवा से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी संशोधित योजना के तहत पेंशन के पात्र नहीं होंगे और उन्हें केवल मौजूदा एनपीएस के तहत ही लाभ मिलेगा। सरकार ने यह भी क्लियर किया कि संशोधित योजना चुनने वालों पर मार्च 2023 में जारी पूर्व आदेशों के अनुसार सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी लागू होगी। सर्कुलर में उल्लेखित प्रावधान आवश्यक संशोधनों के साथ सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और संबद्ध गैर-सरकारी महाविद्यालयों के कर्मचारियों तथा जिला परिषद एवं पंचायत समितियों के कर्मचारियों पर भी लागू होंगे। वित्त विभाग ने कहा कि संशोधित योजना के तहत पेंशन के वितरण के लिए अलग से विस्तृत प्रक्रिया जारी की जाएगी।
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