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  1. ITR Refund Status: आईटीआर भरने के बाद भी नहीं आया टैक्स रिफंड? पोर्टल पर तुरंत चेक करें ये 5 बातें

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ITR Refund Status: आईटीआर भरने के बाद भी नहीं आया टैक्स रिफंड? पोर्टल पर तुरंत चेक करें ये 5 बातें

Upstox

3 min read | अपडेटेड August 28, 2026, 16:05 IST

सारांश

अगर आपका आईटीआर प्रोसेस होने के बाद भी रिफंड नहीं मिला है, तो ई-फाइलिंग पोर्टल पर कुछ कागजी और तकनीकी कमियों की जांच करें। समय पर रिफंड न मिलने पर विभाग सेक्शन 244A के तहत 0.5% प्रतिमाह का ब्याज भी देता है।

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इनकम टैक्स रिफंड अटकने पर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके 5 जरूरी बातें चेक करें। | Image: Shutterstock.

इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर दाखिल करने के बाद लाखों टैक्सपेयर अपने टैक्स रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। अगर आपका रिटर्न प्रोसेस हो चुका है लेकिन खाते में पैसा नहीं आया है, तो इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कुछ तकनीकी या कागजी कमियों की तुरंत जांच करना बेहद जरूरी है। सही समय पर कदम न उठाने से आपका रिफंड महीनों तक अटक सकता है। इनकम टैक्स नियमों के तहत तय समय में रिफंड न मिलने पर टैक्सपेयर्स को सेक्शन 244A के तहत 0.5% प्रतिमाह का ब्याज भी मिलता है। हालांकि अगर गलती आपकी तरफ से दर्ज की गई जानकारी में है, तो विभाग रिफंड रोक देता है। इसलिए पोर्टल पर लॉगिन करके 5 मुख्य बिंदुओं की जांच करना और जरूरी सुधार पूरा करना आवश्यक है।

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बैंक खाता प्री-वैलिडेट और नाम मिसमैच की जांच करें

रिफंड न आने की सबसे आम वजह बैंक खाते का प्री-वैलिडेट न होना या पैन कार्ड के नाम से बैंक खाते के नाम का मेल न खाना है। इनकम टैक्स विभाग केवल उसी बैंक खाते में रिफंड भेजता है जो पोर्टल पर वैलिडेटेड हो और जिसमें ई-रिफंड यानी ईवीसी इनेबल हो। अगर आपका बैंक खाता इनएक्टिव है या आईएफएससी कोड बदल गया है, तो रिफंड प्रोसेस फेल हो जाता है। ऐसी स्थिति में आपको पोर्टल पर जाकर अपना बैंक अकाउंट स्टेटस अपडेट करना चाहिए।

आईटीआर का ई-वेरिफिकेशन स्टेटस जरूर चेक करें

केवल रिटर्न दाखिल करना ही काफी नहीं होता है, बल्कि फाइलिंग की तारीख से 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन पूरा होना अनिवार्य है। अगर आपने आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या ईवीसी के जरिए वेरिफिकेशन नहीं किया है, तो आपका रिटर्न इनवैलिड मान लिया जाता है। ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स विभाग आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू ही नहीं करता और रिफंड जारी नहीं होता है। इसलिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर वेरिफिकेशन स्टेटस तुरंत चेक कर लें।

पुराने साल का बकाया टैक्स और सेक्शन 245 का नोटिस

कई बार टैक्सपेयर को लगता है कि उसका रिफंड रुका हुआ है, लेकिन असल में विभाग ने पिछले किसी वित्तीय वर्ष के बकाया टैक्स के बदले उस रकम को एडजस्ट कर दिया होता है। सेक्शन 245 के तहत विभाग आपको ईमेल या पोर्टल पर सूचना भेजता है। अगर आपको ऐसा कोई नोटिस मिला है, तो पोर्टल के 'पेंडिंग एक्शंस' में जाकर 30 दिनों के अंदर अपनी सहमति या असहमति दर्ज करानी होती है।

AIS और Form-26s से TDS का मिसमैच

अगर आपके Form-16, Form-26s या एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी AIS में दर्ज TDS और आपके द्वारा क्लेम किए गए TDS में अंतर है, तो विभाग रिटर्न को डिफेक्टिव मान सकता है। सेक्शन 139(9) के तहत डिफेक्टिव नोटिस आने पर रिफंड रुक जाता है। ऐसी स्थिति में पोर्टल पर 'ई-फाइल' सेक्शन में जाकर चेक करें कि क्या कोई रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की जरूरत है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर यानी सीपीसी जब तक रिटर्न को सेक्शन 143(1) के तहत प्रोसेस करके इंटिमेशन नहीं भेजता, तब तक रिफंड प्रोसेस नहीं होता है। आप ई-फाइलिंग पोर्टल के 'व्यू फाइल्ड रिटर्न्स' सेक्शन में जाकर स्टेटस चेक कर सकते हैं। अगर वहां स्टेटस 'रिफंड डिटरमाइंड' या 'रिफंड फेल्ड' दिख रहा है, तो आपको 'रिफंड री-इश्यू' रिक्वेस्ट सबमिट करनी होगी।

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Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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