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3 min read | अपडेटेड June 08, 2026, 18:59 IST
सारांश
ITR-1 उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी सालाना कुल आय 50 लाख रुपये तक है। इसमें वेतन, पेंशन, एक मकान से आय, 5,000 रुपये तक की कृषि आय और बैंक ब्याज जैसी अन्य आय शामिल हो सकती है। यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फॉर्म है।

Income Tax Return: रिटर्न फाइल करने से पहले अपनी आय के सभी स्रोतों की जांच करें।
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय सबसे अहम काम सही ITR फॉर्म चुनना होता है। अगर आपने गलत फॉर्म में रिटर्न फाइल कर दिया, तो आयकर विभाग आपकी रिटर्न को अमान्य घोषित कर सकता है और आपको टैक्स नोटिस मिल सकता है। ऐसी स्थिति में आमतौर पर 15 दिनों के भीतर गलती सुधारने का मौका दिया जाता है। समय पर सुधार नहीं करने पर रिटर्न अमान्य मानी जा सकती है, जिससे रिफंड में देरी, जुर्माना या जांच जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
आयकर विभाग ने अलग-अलग तरह के टैक्सपेयर्स के लिए कुल 7 ITR फॉर्म बनाए हैं। सही फॉर्म का चुनाव आपकी आय के स्रोत, रेजिडेंशियल स्टेटस और पेशे पर निर्भर करता है।
ITR-1 उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी सालाना कुल आय 50 लाख रुपये तक है। इसमें वेतन, पेंशन, एक मकान से आय, 5,000 रुपये तक की कृषि आय और बैंक ब्याज जैसी अन्य आय शामिल हो सकती है। यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फॉर्म है।
हालांकि, यदि आपकी आय 50 लाख रुपये से अधिक है, आपके पास एक से ज्यादा मकान हैं, आप NRI हैं, बिजनेस करते हैं या आपकी कैपिटल गेन तय सीमा से ज्यादा है, तो आप ITR-1 नहीं भर सकते।
ITR-2 उन व्यक्तियों और HUF के लिए है जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से नहीं आती, लेकिन उन्हें वेतन, पेंशन, एक से अधिक मकानों, कैपिटल गेन, विदेशी संपत्तियों या विदेशी आय से कमाई होती है।
यह फॉर्म NRI, RNOR और 50 लाख रुपये से अधिक आय वाले लोगों के लिए भी उपयुक्त है। लेकिन यदि आपकी बिजनेस या प्रोफेशनल आय है, तो आप ITR-2 नहीं भर सकते।
अगर आप बिजनेस करते हैं, फ्रीलांसर हैं, कंसल्टेंट हैं या किसी पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर हैं और वहां से सैलरी, कमीशन या अन्य भुगतान प्राप्त करते हैं, तो आपको ITR-3 फाइल करना होगा। यह फॉर्म उन लोगों के लिए भी है जिनके पास बिजनेस आय के साथ-साथ वेतन, मकान, कैपिटल गेन या अन्य स्रोतों से आय भी है।
ITR-4 उन व्यक्तियों, HUF और फर्मों के लिए है जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम (Sections 44AD, 44ADA और 44AE) का लाभ लेते हैं। यह छोटे व्यापारियों, प्रोफेशनल्स और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के लिए आसान फॉर्म माना जाता है। इस फॉर्म का उपयोग केवल वे लोग कर सकते हैं जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और जो निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं।
ITR-5 मुख्य रूप से पार्टनरशिप फर्म, LLP (लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप), AOP (Association of Persons), BOI (Body of Individuals) और इसी तरह की अन्य संस्थाओं के लिए है। व्यक्तिगत करदाता इस फॉर्म का उपयोग नहीं कर सकते।
भारत में काम करने वाली अधिकांश कंपनियों को ITR-6 फाइल करना होता है। हालांकि, जो कंपनियां धार्मिक या चैरिटेबल उद्देश्यों के लिए कर छूट का दावा करती हैं, उन्हें ITR-7 भरना पड़ता है।
ITR-7 धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्ट, राजनीतिक दल, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, रिसर्च संस्थान, बिजनेस ट्रस्ट और अन्य कर-मुक्त संस्थाओं के लिए बनाया गया है। यह उन संस्थाओं पर लागू होता है जिन्हें आयकर अधिनियम की विशेष धाराओं के तहत रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
ITR भरते समय सही फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है। रिटर्न फाइल करने से पहले अपनी आय के सभी स्रोतों की जांच करें और उसी के अनुसार सही ITR फॉर्म चुनें, ताकि नोटिस, जुर्माने और रिफंड में देरी जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
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