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4 min read | अपडेटेड March 08, 2026, 13:49 IST
सारांश
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस मौके पर केंद्र सरकार महिलाओं और बेटियों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। सुकन्या समृद्धि से लेकर लखपति दीदी तक, ये योजनाएं महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत कर रही हैं। जानें इन 5 खास स्कीम के बारे में जो बदल रही हैं तस्वीर।

भारत सरकारी द्वारा महिलाओं के लिए शुरू की गई टॉप-5 स्कीम्स।
आज पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन महिलाओं के संघर्ष, उनकी सफलता और समाज में उनके योगदान को सम्मान देने का है। भारत में भी पिछले कुछ सालों में महिलाओं और बेटियों की स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। 'नारी शक्ति' को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने ऐसी कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनका मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना और बेटियों के फ्यूचर को सुरक्षित करना है। आज इस खास मौके पर हम आपको सरकार की उन 5 बड़ी योजनाओं के बारे में बताएंगे, जिन्होंने करोड़ों महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है।
बेटियों के सुरक्षित फ्यूचर के लिए सुकन्या समृद्धि योजना सरकार की सबसे लोकप्रिय स्कीम्स में से एक है। इसकी शुरुआत साल 2015 में हुई थी। इस योजना के तहत 10 साल से कम उम्र की बेटी के नाम पर बैंक या पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाया जा सकता है। इसमें निवेश करने पर सरकार की ओर से अभी 8.2% का ब्याज मिलता है और इनकम टैक्स में भी छूट का फायदा मिलता है। यह पैसा बेटी की 18 साल की उम्र के बाद उसकी पढ़ाई या 21 साल की उम्र में उसकी शादी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस योजना ने गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को अपनी बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार दिया है।
महिलाओं को छोटे बिजनेस से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लखपति दीदी योजना एक गेम चेंजर साबित हो रही है। इस योजना का लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों यानी सेल्फ हेल्प ग्रुप्स से जुड़ी महिलाओं की सालाना इनकम को कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाना है। इसके तहत महिलाओं को अलग-अलग तरह के स्किल की ट्रेनिंग दी जाती है, जैसे कि एलईडी बल्ब बनाना, ड्रोन चलाना या सिलाई-कढ़ाई करना। सरकार ने इस योजना के तहत 3 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य रखा है। ट्रेनिंग मिलने के बाद महिलाएं अपना खुद का काम शुरू कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक मदद कर पा रही हैं।
गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए सरकार प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना चला रही है। इस योजना के तहत पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। सरकार महिला के खाते में किस्तों में पैसे ट्रांसफर करती है ताकि वह अपनी और अपने होने वाले बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा कर सके। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी की वजह से किसी भी मां या बच्चे की सेहत पर बुरा असर न पड़े। यह योजना ग्रामीण इलाकों में काफी असरदार साबित हुई है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच अब भी एक चुनौती है।
महिलाओं में बचत की आदत डालने के लिए सरकार ने महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र यानी एमएसएससी स्कीम शुरू की है। यह एक छोटी अवधि की बचत योजना है, जिसमें कोई भी महिला या लड़की 2 साल के लिए अपना पैसा जमा कर सकती है। इस पर सरकार 7.5 प्रतिशत की फिक्स्ड ब्याज दर देती है, जो कई बैंक एफडी के मुकाबले काफी ज्यादा है। इसमें जमा की गई राशि पर मिलने वाला ब्याज महिलाओं को छोटी-छोटी बचत से बड़ी रकम जोड़ने में मदद करता है। यह योजना उन महिलाओं के लिए बहुत अच्छी है जो सुरक्षित तरीके से अपने पैसे को बढ़ाना चाहती हैं।
लिंगानुपात में सुधार लाने और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान एक बड़ा सामाजिक आंदोलन बन चुका है। साल 2015 में शुरू हुई इस योजना का मकसद समाज की सोच को बदलना और बेटियों के प्रति हो रहे भेदभाव को खत्म करना है। इस योजना के जरिए स्कूलों में लड़कियों के एडमिशन और उनके पढ़ाई जारी रखने पर खास जोर दिया जाता है। इसके साथ ही कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराधों को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। आज इस योजना की वजह से देश के कई राज्यों में लिंगानुपात में सुधार हुआ है और बेटियां हर क्षेत्र में लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
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