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  1. इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने शुरू किया SHG सेविंग्स अकाउंट, ना MAB की जरूरत ना कोई फीस, यहां जानें हर खासियत

पर्सनल फाइनेंस

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने शुरू किया SHG सेविंग्स अकाउंट, ना MAB की जरूरत ना कोई फीस, यहां जानें हर खासियत

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड April 30, 2026, 17:27 IST

सारांश

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की स्थापना संचार मंत्रालय के डाक विभाग के अंतर्गत की गई है और इसमें भारत सरकार की 100% हिस्सेदारी है। आईपीपीबी 1 सितंबर, 2018 को शुरू हुआ था।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) ने स्वयं सहायता समूह (SHG) बचत खाता शुरू किया

भारतीय सरकार की 100% स्वामित्व वाले इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी), जो संचार मंत्रालय के डाक विभाग के अधीन है, ने आज स्वयं सहायता समूह (Self Help Group, SHG) सेविंग्स अकाउंट शुरू करने की घोषणा की है। यह अकाउंट ग्रामीण भारत में महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस लॉन्च के बारे में आईपीपीबी के सीईओ आर विश्वेश्वरन ने कहा, ‘आईपीपीबी में हमारा मिशन हर भारतीय के लिए बैंकिंग को आसान, सुलभ और समावेशी बनाना है। एसएचजी सेविंग्स अकाउंट महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को एक विश्वसनीय और किफायती बैंकिंग सॉल्यूशन दे करके उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक कदम है। अपने डोरस्टेप बैंकिंग मॉडल और डिजिटल बुनियादी ढांचे का फायदा उठाकर, हमारा लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने और सतत आर्थिक विकास को गति देने में सक्षम बनाना है।’

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भारत में ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन को गति देने में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और ये ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी प्रमुख पहलों और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा समर्थित कार्यक्रमों से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। डाक विभाग (डीओपी) के डाक नेटवर्क और अपनी डिजिटल क्षमताओं का फायदा उठाते हुए, आईपीपीबी का लक्ष्य डाककर्मियों और ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) के व्यापक नेटवर्क की सहायता से घर-घर जाकर बैंकिंग सर्विसेज को डिजिटल माध्यम से जोड़ने के द्वारा एसएचजी के लिए वित्तीय पहुंच को व्यापक बनाना है।

किन उद्दश्यों को ध्यान में रखकर बनाया गया एसएचजी सेविंग्स अकाउंट

किफायती होने के लिए जीरो बैलेंस और जीरो फीस वाला अकाउंट।

आसान ऑनबोर्डिंग के लिए डिजिटल रूप से सक्षम।

डाकघरों और डाककर्मियों/ग्रामीण डाक सेवकों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से वितरित।

एसएचजी सेविंग्स अकाउंट की खासियत

प्रारंभिक जमा के लिए कोई न्यूनतम राशि की जरूरत नहीं

मासिक औसत शेष (Monthly Average Balance, MAB) की कोई आवश्यकता नहीं

अधिकतम शेष राशि सीमा ₹2,00,000

लागू बचत दरों के अनुसार त्रैमासिक ब्याज भुगतान

नकद जमा और निकासी पर कोई शुल्क नहीं

प्रति माह एक फ्री फिजिकल अकाउंट स्टेटमेंट

खाता बंद करने पर कोई शुल्क नहीं

क्यूआर कार्ड जारी करने पर कोई शुल्क नहीं

स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया, आईपीपीबी एसएचजी सेविंग अकाउंट एक सरल, सुलभ और फ्री बैंकिंग सॉल्यूशन देता है जो समावेशी विकास और सतत आजीविका की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के बारे में

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की स्थापना संचार मंत्रालय के डाक विभाग के अंतर्गत की गई है और इसमें भारत सरकार की 100% हिस्सेदारी है। आईपीपीबी 1 सितंबर, 2018 को शुरू हुआ था। बैंक की स्थापना भारत में आम आदमी के लिए सबसे सुलभ, किफायती और भरोसेमंद बैंक बनाने की दृष्टि से की गई है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का मूल उद्देश्य बैंकिंग सुविधाओं से वंचित और कम बैंकिंग सुविधाओं से वंचित लोगों के लिए बाधाओं को दूर करना और अंतिम छोर तक पहुंचना है, जिसके लिए लगभग 1,65,000 डाकघरों (ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 140,000) और लगभग 3,00,000 डाक कर्मचारियों वाले डाक नेटवर्क का लाभ उठाया जाता है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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