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4 min read | अपडेटेड March 06, 2026, 16:33 IST
सारांश
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य सभा के लिए नामांकन भरकर 20 साल के अपने मुख्यमंत्री काल के अंत का संकेत दे दिया है। उनके 'सुशासन' के दौर में साइकिल योजना, जीविका और नल-जल जैसी योजनाओं ने प्रदेश की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

बिहार में पिछले 20 सालों में शुरू हुईं 5 सरकारी योजनाएं
बिहार की राजनीति में आज एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 5 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ ही बिहार में उनके करीब दो दशक लंबे मुख्यमंत्री के कार्यकाल का अंत होने जा रहा है। माना जा रहा है कि वह अप्रैल 2026 तक अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। नीतीश कुमार ने खुद सोशल मीडिया पर बताया कि उनकी हमेशा से इच्छा थी कि वे संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें। उनके जाने की चर्चा के बीच लोग अब उन बड़े कामों को याद कर रहे हैं जिन्होंने बिहार का चेहरा बदल दिया। नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल में पांच ऐसी योजनाएं रही हैं, जिनका फायदा आज भी बिहार के घर-घर को मिल रहा है।
नीतीश कुमार ने साल 2006 में 'मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना' की शुरुआत की थी। इस योजना का मकसद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली 9वीं क्लास की लड़कियों को साइकिल देना था ताकि वे आसानी से स्कूल पहुंच सकें। इस एक फैसले ने बिहार के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की तस्वीर बदल दी। साइकिल मिलने से लड़कियों का स्कूल में एडमिशन काफी बढ़ गया और स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या में बड़ी गिरावट आई। आज बिहार की सड़कों पर साइकिल से स्कूल जाती लड़कियां नीतीश कुमार के विकास मॉडल की सबसे बड़ी पहचान बन गई हैं।
साल 2007 में वर्ल्ड बैंक की मदद से बिहार में 'जीविका' प्रोग्राम की शुरुआत की गई थी। इसके जरिए ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों यानी एसएचजी से जोड़ा गया। आज बिहार में करीब सवा करोड़ महिलाएं इस योजना से जुड़ी हुई हैं। जीविका ने महिलाओं को न केवल पैसा कमाना सिखाया, बल्कि उन्हें बैंक से लोन लेने और अपना छोटा बिजनेस शुरू करने में भी मदद की। इस योजना की वजह से बिहार की ग्रामीण महिलाएं आज आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो गई हैं और समाज में उनकी भागीदारी काफी बढ़ गई है।
नीतीश कुमार के 'सात निश्चय' प्रोग्राम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'हर घर नल का जल' योजना रही है। इस योजना को 2016 में शुरू किया गया था, जिसका मकसद हर ग्रामीण घर तक पाइप के जरिए साफ पीने का पानी पहुंचाना था। बिहार जैसे राज्य में जहां आर्सेनिक और फ्लोराइड की समस्या थी, वहां इस योजना ने लोगों की सेहत में बड़ा सुधार किया है। आज बिहार के अधिकतर गांवों में नल से जल की सुविधा पहुंच चुकी है, जिससे ग्रामीण जीवन का स्तर काफी ऊपर उठा है।
हायर एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए नीतीश कुमार ने 2 अक्टूबर 2016 को 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' लॉन्च की थी। इस योजना के तहत 12वीं पास छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन दिया जाता है। इस लोन पर ब्याज की दर बहुत कम यानी केवल 4 प्रतिशत रखी गई है, जबकि महिलाओं और दिव्यांगों के लिए यह मात्र 1 प्रतिशत है। इस योजना ने उन गरीब छात्रों के सपनों को पंख दिए जो पैसे की कमी की वजह से इंजीनियरिंग या मेडिकल जैसी पढ़ाई नहीं कर पाते थे।
नीतीश कुमार ने बिहार को अंधेरे से निकालने के लिए 'हर घर बिजली' योजना पर बहुत काम किया। साल 2016 के सात निश्चय प्रोग्राम के तहत इस मिशन को रफ्तार दी गई और बिहार के काफी गांवों तक बिजली पहुंचा दी गई। इस योजना के इंप्लीमेंटेशन के बाद बिहार में बिजली की खपत कई गुना बढ़ गई है और अब गांवों में भी शहरों की तरह बिजली की सुविधा मिल रही है। इन पांचों योजनाओं ने बिहार के आम आदमी की जिंदगी में जो बदलाव लाया है।
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