पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड June 16, 2026, 09:55 IST
सारांश
भारत में फिक्सड डिपॉजिट यानी एफडी निवेश का सबसे लोकप्रिय माध्यम है। लेकिन बैंक और पोस्ट ऑफिस की एफडी में सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अंतर होता है। पोस्ट ऑफिस में मिलने वाली शत-प्रतिशत संप्रभु गारंटी इसे बैंकों के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाती है।

पोस्ट ऑफिस और बैंकों में फिक्सड डिपॉजिट सुरक्षित रखने के नियम पूरी तरह अलग होते हैं। | Image: Shutterstock
भारत में आज भी अधिकांश लोग अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने और उस पर तय रिटर्न पाने के लिए फिक्सड डिपॉजिट यानी एफडी पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। पैसा निवेश करते समय हर व्यक्ति के मन में सबसे पहला सवाल सुरक्षा को लेकर ही आता है। वैसे तो बैंक और पोस्ट ऑफिस दोनों ही जगह एफडी की सुविधा मिलती है, लेकिन इन दोनों संस्थाओं में आपके पैसे की सुरक्षा को लेकर नियम बिल्कुल अलग होते हैं। बहुत से लोग यह सोचते हैं कि बैंकों में उनका पूरा पैसा हमेशा सुरक्षित रहता है, जबकि हकीकत इससे थोड़ी अलग है। सुरक्षा के मामले में पोस्ट ऑफिस को बैंकों से कहीं बेहतर और सुरक्षित माना जाता है। अगर आप 6 लाख रुपये का निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आपको यह जरूर जान लेना चाहिए कि बैंक और पोस्ट ऑफिस में से कहां आपका पैसा ज्यादा सुरक्षित रहेगा और इसके पीछे का असली कारण क्या है।
जब आप पोस्ट ऑफिस की किसी स्कीम या टर्म डिपॉजिट में अपना पैसा जमा करते हैं, तो उस निवेश पर सरकार की संप्रभु गारंटी यानी सॉवरेन गारंटी मिलती है। इसका सीधा मतलब यह है कि पोस्ट ऑफिस में जमा आपके पैसे की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सीधे भारत सरकार की होती है। इसमें आपके निवेश की गई मूल रकम यानी प्रिंसिपल और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों ही पूरी तरह से कवर होते हैं। फ्यूचर में अगर पोस्ट ऑफिस को किसी भी तरह का नुकसान होता है, तब भी सरकार की जिम्मेदारी आपके पूरे पैसे की भरपाई करने की होती है। इसी वजह से बेहद सतर्क और सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले लोग बैंकों के मुकाबले पोस्ट ऑफिस में पैसा लगाना ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि यहां रिस्क बिल्कुल जीरो होता है।
दूसरी तरफ, जब आप किसी बैंक में फिक्सड डिपॉजिट या अन्य अकाउंट में पैसा रखते हैं, तो वहां सुरक्षा का नियम पूरी तरह बदल जाता है। बैंकों में जमा आपकी रकम को डिपॉजिट इंश्योरेंस क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन यानी डीआईसीजीसी की तरफ से सुरक्षा मिलती है। इस इंश्योरेंस स्कीम के तहत एक बैंक में सिर्फ 5 लाख रुपये तक का ही बीमा कवर मिलता है। इस 5 लाख रुपये की सीमा में आपके उस बैंक में मौजूद सभी अकाउंट जैसे सेविंग्स अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट यानी आरडी और फिक्सड डिपॉजिट यानी एफडी को मिलाकर कुल बैलेंस देखा जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी बैंक में आपकी कुल जमा राशि 5 लाख रुपये से अधिक है, तो भी संकट के समय आपको सिर्फ 5 लाख रुपये तक का ही इंश्योरेंस कवर मिलेगा।
इस पूरे नियम को हम 6 लाख रुपये के निवेश के उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं। मान लीजिए कि आपने किसी बैंक में 6 लाख रुपये की फिक्सड डिपॉजिट की है। किसी अनहोनी या बैंक के डूबने की स्थिति में DICGC के नियम के अनुसार, आपकी सिर्फ 5 लाख रुपये तक की रकम ही सुरक्षित रहेगी। बाकी का जो 1 लाख रुपये है, उस पर कोई इंश्योरेंस कवर नहीं मिलेगा और वह रकम पूरी तरह से रिस्क पर रहेगी। इसके उलट, अगर आप यही 6 लाख रुपये पोस्ट ऑफिस के फिक्सड डिपॉजिट में निवेश करते हैं, तो सरकार की संप्रभु गारंटी के कारण आपके पूरे 6 लाख रुपये और उस पर बनने वाला ब्याज पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। वहां आपकी रकम डूबने का कोई खतरा नहीं होता है।
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