पर्सनल फाइनेंस

4 min read | अपडेटेड June 04, 2026, 13:28 IST
सारांश
खिलाड़ी से लेकर आज के डिजिटल क्रिएटर्स तक, कम उम्र में बंपर कमाई करने वाले बच्चों पर इनकम टैक्स के नियम सामान्य वयस्कों से अलग होते हैं। आयकर कानून के अनुसार, बच्चों की सामान्य कमाई को पैरेंट्स की इनकम में जोड़ा जाता है, लेकिन खुद के हुनर से कमाए पैसों पर बच्चे को खुद टैक्स देना होता है।

टैलेंटेड माइनर बच्चों की अपनी कमाई पर टैक्स और आईटीआर के नियमों की पूरी जानकारी। | Image: Shutterstock.
आज के समय में खिलाड़ी से लेकर कंटेंट क्रिएटर्स तक की हो रही बंपर कमाई ने हर किसी को हैरान किया है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि आखिर इतनी कम उम्र में होने वाली बंपर कमाई पर इनकम टैक्स के नियम कैसे काम करते हैं। आजकल सोशल मीडिया पर एक्टिव छोटे क्रिएटर्स तक, कई बच्चे अपनी कम उम्र में ही मोटी कमाई कर रहे हैं। भारत में माइनर यानी 18 साल से कम उम्र के बच्चों की कमाई पर टैक्स के नियम वयस्कों से काफी अलग होते हैं, जिन्हें समझना पैरेंट्स के लिए बहुत जरूरी है।
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 64(1A) के मुताबिक, अगर कोई माइनर बच्चा किसी भी जरिए से कमाई करता है, तो उसकी इस आय को सामान्य तौर पर उसके माता या पिता में से उस पैरेंट की इनकम के साथ जोड़ दिया जाता है जिसकी टैक्सेबल इनकम ज्यादा होती है। इसे क्लबिंग ऑफ इनकम कहा जाता है और इसके बाद पैरेंट को ही उस पैसे पर अपनी आय मानकर टैक्स चुकाना पड़ता है। आमतौर पर बच्चे बैंक अकाउंट में जमा पैसों के ब्याज या पैरेंट्स द्वारा उनके नाम पर किए गए फिक्स डिपॉजिट और इनवेस्टमेंट से कमाई करते हैं।
अगर किसी फाइनेंशियल ईयर में बच्चे की ऐसी आय 1,500 रुपये से कम होती है, तो इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(32) के तहत पैरेंट हर माइनर बच्चे के लिए 1,500 रुपये तक की टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। अगर कमाई 1,500 रुपये से ज्यादा है, तो सिर्फ 1,500 रुपये पर ही छूट मिलती है और बाकी बची रकम पैरेंट की कुल आय में टैक्स के लिए जोड़ दी जाती है।
अगर बच्चे के माता और पिता दोनों ही कामकाजी हैं और कमा रहे हैं, तो बच्चे की आय को उस पैरेंट की सालाना इनकम में जोड़ा जाएगा, जिसकी कमाई अधिक होगी। यदि पैरेंट्स का तलाक हो चुका है, तो माइनर बच्चे की इनकम को उस पैरेंट की आय में शामिल किया जाएगा, जिसके पास बच्चे की कस्टडी होगी। एक और खास परिस्थिति यह है कि अगर बच्चे के माता-पिता दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं, तो बच्चे की कमाई को उसके गार्जियन यानी कानूनी अभिभावक की इनकम के साथ कभी नहीं जोड़ा जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे के नाम पर एक अलग इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल किया जाता है।
इसके अलावा, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80U के तहत आने वाले किसी स्पेशल डिसेबिलिटी या दिव्यांगता से पीड़ित माइनर बच्चे की कमाई को भी पैरेंट्स की आय के साथ क्लब नहीं किया जाता है। दिव्यांगता की कैटेगरी में 40 पर्सेंट से अधिक का अंधापन, कमजोर नजर, सुनने में परेशानी, लोकोमोटर डिसेबिलिटी और मानसिक बीमारी शामिल हैं।
टैक्स नियमों में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण अपवाद तब आता है जब कोई माइनर बच्चा अपनी खुद की मेहनत, हुनर, स्पेशल नॉलेज, टैलेंट या मैन्युअल काम के दम पर पैसा कमाता है। जैसे कि अगर कोई बच्चा कंटेंट क्रिएशन, एक्टिंग, क्रिकेट, चेस, सिंगिंग या ब्रांड एंडोर्समेंट के जरिए मोटी कमाई कर रहा है, तो उस पैसे को पैरेंट्स की इनकम में नहीं जोड़ा जाएगा। यह नियम इसलिए लागू होता है क्योंकि यह कमाई पैरेंट्स द्वारा ट्रांसफर की गई किसी संपत्ति या फंड से नहीं हुई है, बल्कि बच्चे के अपने पर्सनल एफर्ट और उसकी काबिलियत का नतीजा है। वैभव सूर्यवंशी के मामले में भी यही नियम काम करता है। चूंकि उनकी आईपीएल और एंडोर्समेंट से होने वाली कमाई उनके खुद के क्रिकेट टैलेंट से हो रही है, इसलिए उन्हें इस पर खुद टैक्स देना होगा। यही बात टीवी शो, रियलिटी शो के प्रतिभागियों, सिंगर्स और सोशल मीडिया क्रिएटर्स पर भी पूरी तरह लागू होती है।
माइनर बच्चे द्वारा अपने टैलेंट से की गई कमाई पर देश के नॉर्मल टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से ही टैक्स कैलकुलेट किया जाता है। बच्चे के काम के नेचर को देखते हुए इस कमाई को मुख्य रूप से "प्रॉफिट्स एंड गेन्स फ्रॉम बिजनेस और प्रोफेशन" यानी PGBP के तहत रिपोर्ट किया जाता है, खासकर जब मामला प्रोफेशनल सर्विसेज, स्पॉन्सरशिप, एंडोर्समेंट या टूर्नामेंट से होने वाली जीत का हो। ऐसी स्थिति में जहां बच्चा कोई प्रोफेशन या बिजनेस चला रहा है, वहां आमतौर पर ITR-3 फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है।
वहीं अगर प्रिजम्पटिव टैक्सेशन की शर्तें पूरी होती हैं, तो ITR-4 फॉर्म का उपयोग भी किया जा सकता है। यह रिटर्न बच्चे के नाम पर ही भरा जाता है, लेकिन इसमें पैरेंट या किसी लीगल गार्जियन को रेस्ट्रेजेंटेटिव असेसी यानी प्रतिनिधि निर्धारित किया जाता है जो इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करता है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है।
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