पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड June 05, 2026, 13:30 IST
सारांश
अगर आपको कोर्ट, सरकार या कंपनी से कोई मुआवजा मिला है, तो उस पर इनकम टैक्स लगेगा या नहीं, यह जानना बेहद जरूरी है। बजट 2026 में इसके नियमों में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। इन्वेस्टमेंट और फाइनेंशियल एक्सपर्ट बलवंत जैन ने मुआवजे पर टैक्स लगने के इस पूरे कंफ्यूजन को दूर किया है।

मुआवजे की रकम पर इनकम टैक्स के नियमों की पूरी डिटेल। | Image: Shutterstock
मान लीजिए किसी सड़क हादसे में कोर्ट ने आपको 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया है या सरकार ने आपकी जमीन का अधिग्रहण करके उसके बदले आपको पेमेंट किया है। इसके अलावा ऐसा भी हो सकता है कि नौकरी खत्म होने पर कंपनी ने आपको कोई कंपनसेशन पैकेज दिया हो। ऐसे किसी भी मामले में सबसे पहला सवाल दिमाग में यही आता है कि क्या इस मिली हुई रकम पर इनकम टैक्स देना होगा। इस सवाल का जवाब सिर्फ हां या ना में नहीं दिया जा सकता है क्योंकि यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपको मुआवजा किस वजह से मिला है और उसका असली स्वरूप क्या है। मुआवजे पर टैक्स लगने के इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए अपस्टॉक्स ने इन्वेस्टमेंट और फाइनेंशियल एक्सपर्ट बलवंत जैन से बात की है, जिन्होंने इसके हर नियम को बहुत ही आसान तरीके से समझाया है।
देश में कई न्यायिक फैसलों और टैक्स के सिद्धांतों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को उसके व्यक्तिगत नुकसान या किसी चोट की भरपाई के लिए मुआवजा मिलता है, तो उसे आमतौर पर कैपिटल रिसीट माना जाता है। इस तरह की रकम पर सामान्य तौर पर इनकम टैक्स नहीं लगाया जाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति को सड़क दुर्घटना में कोई मुआवजा मिलता है या किसी शारीरिक चोट या विकलांगता के बदले कोई रकम मिलती है, तो वह टैक्स के दायरे से बाहर होती है। इसके अलावा किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिवार को मिलने वाला क्षतिपूर्ति भुगतान, मानसिक पीड़ा या नुकसान की भरपाई के लिए मिलने वाली रकम और कुछ विशेष मामलों में कोर्ट द्वारा दिए गए हर्जाने पर भी आमतौर पर टैक्स नहीं लगता है।
टैक्स के नियमों में सबसे बड़ा बदलाव तब आता है जब मुआवजे का संबंध आपकी नौकरी, व्यापार, किसी कॉन्ट्रैक्ट या आय से जुड़ी गतिविधि से होता है। अगर आपको इस तरह की किसी वजह से मुआवजा मिल रहा है, तो उस पर टैक्स लग सकता है। जैसे नौकरी समाप्त होने पर मिलने वाला कंपनसेशन परिस्थितियों के अनुसार टैक्सेबल हो सकता है। इसी तरह व्यावसायिक कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर मिलने वाला भुगतान भी टैक्स के दायरे में आ सकता है। इसके अलावा अगर आपको रिट्रेंचमेंट की लिमिट से अधिक कंपनसेशन मिलता है, तो वह अतिरिक्त हिस्सा भी टैक्सेबल हो जाता है।
आमतौर पर मुआवजे की रकम पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है, लेकिन हाल ही में आए बजट 2026 में सरकार ने इसे लेकर एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को सड़क दुर्घटना में मिले मुआवजे पर कोई ब्याज मिलता है, तो अब उस ब्याज पर भी कोई टैक्स नहीं लगेगा। यह नया नियम इनकम टैक्स में फाइनेंसियल ईयर 2026-27 से लागू हो गया है, जिसका सीधा फायदा अगले साल आईटीआर फाइल करते वक्त मिलेगा। वैसे सामान्य नियमों के तहत आयकर विभाग मुआवजे या एनहांस्ड कंपनसेशन पर मिलने वाले ब्याज को इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज के तहत टैक्सेबल मानता है और यह उसी साल टैक्स के दायरे में आता है जब यह प्राप्त होता है। पहले इसके लिए सेक्शन 56 के तहत 50 पर्सेंट की मानक कटौती मिलती थी, लेकिन अब नए इनकम टैक्स एक्ट में यह सेक्शन 92 में बदल गया है।
भूमि अधिग्रहण यानी जमीन लेने के मामलों में टैक्स के नियम बिल्कुल अलग हो सकते हैं। सरकार द्वारा कुछ विशेष कानूनों के तहत ली गई जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे को टैक्स से छूट मिल सकती है। हाल के बजट प्रस्तावों में भी RFCTLARR एक्ट के तहत मिलने वाले कुछ मुआवजों को आयकर से छूट देने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि इसमें जमीन का प्रकार कैसा है, अधिग्रहण किस कानून के तहत हुआ है और भुगतान की प्रकृति क्या है, इन सब बातों के आधार पर ही टैक्स के नियम तय होते हैं। इसे हम दो केस से समझ सकते हैं।
पहले केस में अगर किसी को सड़क दुर्घटना में 15 लाख रुपये का मुआवजा और 2 लाख रुपये का ब्याज मिला है, तो पुराने नियमों में ब्याज पर टैक्स लगता था लेकिन नए नियम के मुताबिक अब इस पूरे ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। दूसरे केस में अगर नौकरी जाने पर किसी को 8 लाख रुपये का कंपनसेशन मिला है, तो यह राशि नौकरी की शर्तों, उपलब्ध छूटों और संबंधित आयकर प्रावधानों के आधार पर टैक्सेबल हो सकती है। इसलिए मुआवजा मिलने पर हमेशा यह जांचना चाहिए कि वह किस कारण मिला है, उस पर कोई ब्याज मिला है या नहीं, कोई विशेष छूट है या नहीं, वह कोर्ट या सरकार से मिला है और आईटीआर में उसे किस हेड में दिखाना है।
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