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4 min read | अपडेटेड October 27, 2026, 15:55 IST
सारांश
8 अक्टूबर को हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में रिटर्न फाइलिंग से जुड़े बदलावों की सिफारिश की गई। वित्त मंत्रालय 1 नवंबर को GSTR-1, GSTR-1A और इनवॉइस फर्निशिंग फैसिलिटी (IFF) के नए ड्राफ्ट फॉर्म myGov पोर्टल पर जारी करेगा।

पात्र जीएसटी रिफंड को ऑटोमैटिक तरीके से मंजूरी देने की सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव है।
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) से जुड़े नियमों में कारोबारियों को राहत देने के लिए कई बदलावों की सिफारिश की गई है। इनका मकसद जीएसटी रिटर्न भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी गड़बड़ियों को कम करना और टैक्स रिफंड जल्द दिलाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन बदलावों के लिए कानून में संशोधन जरूरी नहीं है, उन्हें 1 नवंबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। वहीं, कुछ कानूनी बदलावों के लिए 1 अप्रैल 2027 का लक्ष्य रखा गया है।
8 अक्टूबर को हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में रिटर्न फाइलिंग से जुड़े बदलावों की सिफारिश की गई। वित्त मंत्रालय 1 नवंबर को GSTR-1, GSTR-1A और इनवॉइस फर्निशिंग फैसिलिटी (IFF) के नए ड्राफ्ट फॉर्म myGov पोर्टल पर जारी करेगा। इन पर 30 नवंबर तक सुझाव दिए जा सकेंगे। नए फॉर्म 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य GSTR-1 और GSTR-3B में दर्ज टैक्स देनदारी के बीच अंतर कम करना है, क्योंकि रिटर्न में गड़बड़ी के कारण कारोबारियों को नोटिस मिलते हैं।
जीएसटी काउंसिल ने 5 करोड़ रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले उन कारोबारियों के लिए वैकल्पिक सालाना रिटर्न योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जो केवल बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन वाले ग्राहकों को सामान या सेवाएं बेचते हैं। प्रस्तावित ARQP योजना के तहत कारोबारी साल में एक बार रिटर्न भर सकेंगे, जबकि टैक्स का भुगतान हर तिमाही करना होगा।
इसके अलावा, 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले कारोबारियों को राहत देने के लिए लेट फीस माफ करने की सिफारिश की गई है। यह छूट तभी मिलेगी, जब वे बकाया रिटर्न संबंधित महीने के अंत तक दाखिल कर देंगे, जिसमें रिटर्न की समयसीमा समाप्त हुई थी।
पात्र जीएसटी रिफंड को ऑटोमैटिक तरीके से मंजूरी देने की सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह सुविधा भविष्य में किए जाने वाले दावों के लिए होगी, पहले से लंबित दावों के लिए नहीं। रिफंड आवेदन की रसीद या कमी बताने वाला मेमो जारी करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश भी की गई है।
जीरो-रेटेड सप्लाई और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़े पात्र मामलों में जोखिम के आधार पर 90% तक प्रोविजनल रिफंड दिया जा सकता है। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में इनपुट सर्विसेज पर जमा अतिरिक्त ITC के रिफंड का प्रस्ताव भी है। इसके लिए 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट और लागू कानूनी बदलावों से जुड़ी शर्तें पूरी करनी होंगी।
छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को कुछ शर्तों के तहत उन राज्यों में प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को अपना मुख्य कारोबारी स्थान घोषित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है, जहां उनकी कोई भौतिक मौजूदगी नहीं है। इसके तहत रजिस्टर्ड खरीदारों को ट्रांसफर किए जाने वाले ITC की मासिक सीमा 2.5 लाख रुपये होगी।
वहीं, 1 अप्रैल 2027 से जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की शक्तियां हटाने, अभियोजन की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने और ई-वे बिल नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है। काउंसिल ने शो-कॉज नोटिस जारी करने के लिए कुल टैक्स राशि की न्यूनतम सीमा 10,000 रुपये रखने की भी सिफारिश की है।
ये बदलाव अलग-अलग नोटिफिकेशन, सर्कुलर, नियमों और कानूनी संशोधनों के जरिए लागू होंगे। इसलिए कारोबारियों को किसी भी प्रस्ताव को लागू नियम मानने से पहले आधिकारिक अधिसूचना जरूर जांचनी चाहिए।
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