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4 min read | अपडेटेड October 05, 2026, 13:07 IST
सारांश
GST व्यवस्था में छोटे टैक्स विवादों को कम करने के लिए भी बड़ा प्रस्ताव है। इसके तहत ₹10,000 से कम की टैक्स मांग पर GST नोटिस जारी नहीं करने का प्रस्ताव रखा गया है। ऐसे मामले संख्या में कुल मामलों के करीब 20% हैं, लेकिन इनसे मिलने वाला टैक्स बहुत कम है।

GST काउंसिल वास्तविक बायर्स के Input Tax Credit (ITC) को सुरक्षित करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है।
GST काउंसिल बुधवार को GST 2.0 के तहत कई बड़े प्रक्रिया सुधारों पर विचार कर सकती है। इन प्रस्तावों का मकसद कारोबारियों के लिए GST कंप्लायंस को आसान बनाना, रिटर्न फाइलिंग को सरल करना, सामान की आवाजाही को बेहतर बनाना और टैक्स विवादों को कम करना है। इनमें छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए खास राहत का प्रस्ताव भी शामिल है।
प्रस्ताव के तहत छोटे विक्रेता उन राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को अपना रजिस्टर्ड प्लेस ऑफ बिजनेस मान सकेंगे, जहां उनका खुद का कोई ऑफिस या दूसरी व्यावसायिक जगह नहीं है। विक्रेता को सिर्फ एक राज्य में वास्तविक कारोबारी मौजूदगी रखनी होगी, जहां फिजिकल वेरिफिकेशन और आधार ऑथेंटिकेशन पूरा किया जाएगा। इसके बाद दूसरे राज्यों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की सहमति से GST रजिस्ट्रेशन लिया जा सकेगा और हर जगह टैक्स अधिकारी की अलग से भागीदारी की जरूरत नहीं होगी।
इस बदलाव से करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को फायदा मिलने की उम्मीद है। वे हर राज्य में अलग से ऑफिस खोले बिना देशभर में अपना कारोबार कर सकेंगे। इससे अलग-अलग ई-कॉमर्स मॉडल के बीच टैक्स व्यवस्था में समानता लाने में भी मदद मिल सकती है।
GST काउंसिल वास्तविक बायर्स के Input Tax Credit (ITC) को सुरक्षित करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है। अगर किसी खरीदार के पास सही इनवॉइस है, लेकिन उसके सप्लायर ने टैक्स जमा नहीं किया है, तो खरीदार का ITC सीधे खत्म नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में टैक्स वसूली की कार्रवाई उस सप्लायर के खिलाफ की जाएगी, जिसने टैक्स का भुगतान नहीं किया।
यह बदलाव उन कंपनियों के लिए अहम हो सकता है, जो छोटे या नए सप्लायर्स से सामान खरीदती हैं। अभी ऐसे मामलों में खरीदार और टैक्स विभाग के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है।
GST व्यवस्था में छोटे टैक्स विवादों को कम करने के लिए भी बड़ा प्रस्ताव है। इसके तहत ₹10,000 से कम की टैक्स मांग पर GST नोटिस जारी नहीं करने का प्रस्ताव रखा गया है। ऐसे मामले संख्या में कुल मामलों के करीब 20% हैं, लेकिन इनसे मिलने वाला टैक्स बहुत कम है।
₹10,000 से ज्यादा की मांग वाले मामलों में भी पहले टैक्सपेयर को सूचना देकर जवाब देने का मौका देने का प्रस्ताव है। इसके बाद ही औपचारिक नोटिस जारी किया जाएगा। लंबित मामलों पर भी यह threshold लागू करने पर विचार हो सकता है।
GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को भी नए तरीके से तैयार करने का प्रस्ताव है। सिस्टम आवेदन भरते समय कारोबारियों को हर चरण पर जरूरी जानकारी देगा और केवल वही सेक्शन दिखाए जाएंगे, जो उनके लिए रिलेवेंट होंगे। जरूरी डॉक्यूमेंट की tailored list भी उपलब्ध कराई जाएगी।
अगर किसी कंपनी का दूसरे राज्य में पहले से GST रजिस्ट्रेशन है, तो उसकी जानकारी नए रजिस्ट्रेशन में इस्तेमाल की जा सकेगी। कई राज्यों में रजिस्ट्रेशन लेने वाले कारोबारियों को सभी एप्लिकेशन एक साथ पूरा करने की सुविधा भी मिल सकती है। MSMEs के लिए सिंपलीफाइड एनुअल रिटर्न और केवल कंज्यूमर्स को सामान बेचने वाले कारोबारियों के लिए क्वाटर्ली टैक्स पेमेंट का विकल्प भी प्रस्तावित है।
GST 2.0 में लॉजिस्टिक्स और ट्रांजिट चेक्स को भी ज्यादा टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस आधारित बनाने का प्रस्ताव है। सामान लेकर जा रहे वाहनों को केवल सीनियर ऑफिसर की पहले से दी गई अनुमति के आधार पर रोका जा सकेगा और सामान्य तौर पर जांच ओरिजिन स्टेट में ही होगी। इससे राज्यों की सीमाओं पर बार-बार होने वाली व्हीकल चेकिंग कम हो सकती है। इसका फायदा ट्रांजिट टाइम और freight cost घटने के रूप में मिल सकता है और घरेलू तथा एक्सपोर्ट कार्गो की आवाजाही ज्यादा प्रेडिक्टेबल हो सकती है।
इसके अलावा ई-कॉमर्स से ऑर्डर किए गए गुड्स की डिलीवरी पर इनपुट टैक्स क्रेडिंट के बिना एक समान 5% GST रेट लागू करने का प्रस्ताव भी है। वहीं, ओवरसीज ब्रांच के जरिए दी जाने वाली सर्विसेज के एक्सपोर्ट स्टेटस को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और कुछ बैंकों व नॉमिनेटेड एजेंसीज द्वारा गोल्ड, सिल्वर और प्लेटिनम के इंपोर्ट्स पर IGST exemption हटाने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है।
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