पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड July 08, 2026, 16:24 IST
सारांश
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एलान किया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 पर्सेंट का ब्याज 15 जुलाई तक करीब 34 करोड़ पीएफ खातों में जमा कर दिया जाएगा। नए सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) सिस्टम के जरिए कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।

पीएफ खाताधारकों के खातों में 15 जुलाई तक आ जाएगा ब्याज का पैसा। | Image: Shutterstock.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के करोड़ों मेंबर्स के लिए एक बेहद बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। अगर आप भी नौकरीपेशा हैं और आपका पीएफ कटता है, तो आपके खाते में जल्द ही ब्याज का पैसा आने वाला है। EPFO ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% की दर से ब्याज का पैसा 15 जुलाई तक करीब 34 करोड़ ईपीएफ खातों में क्रेडिट कर दिया जाएगा। इस बार EPFO अपने नए सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज यानी साइट्स (CITES) सिस्टम के जरिए बड़े पैमाने पर ब्याज ट्रांसफर करने जा रहा है। इसके तहत कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम सब्सक्राइबर्स के खातों में डाली जाएगी। वर्तमान में इस पूरी प्रक्रिया की फील्ड लेवल पर वेरिफिकेशन चल रही है ताकि खाताधारकों के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर करते समय किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो।
पहले के समय में पीएफ सब्सक्राइबर्स को ब्याज की रकम अपने खाते में देखने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता था। आमतौर पर ब्याज दर की घोषणा होने के बाद अक्टूबर या नवंबर के महीने में जाकर पैसा खातों में दिखता था। लेकिन EPFO के नए सेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म की मदद से अब इस पूरी प्रक्रिया को ऑटोमेटिक बना दिया गया है। इसी इंप्लीमेंटेशन के कारण इस बार ब्याज का पैसा बहुत पहले ही कर्मचारियों के खातों में पहुंच जाएगा।
साइट्स (CITES) प्रोजेक्ट दरअसल EPFO का एक बड़ा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन इनिशिएटिव है। इसका मुख्य उद्देश्य ऑटोमेशन और नियमों पर आधारित प्रोसेसिंग के जरिए सेवाओं को बेहतर बनाना है। इस सिस्टम के आने से EPFO का काम पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और आसान हो गया है। इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा यह है कि अब EPFO के पुराने डिसेंट्रलाइज्ड सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। पहले हर क्षेत्रीय या फील्ड ऑफिस का अपना अलग डेटाबेस होता था, लेकिन अब सभी मेंबर्स के रिकॉर्ड को एक सिंगल नेशनल डेटाबेस यानी केंद्रीय प्लेटफॉर्म पर कंसोलिडेटेड कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब मेंबर्स को अपने किसी भी काम के लिए केवल अपने रीजनल ऑफिस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। देश के किसी भी ऑथराइज्ड EPFO ऑफिस से उनके दावों और रिक्वेस्ट को प्रोसेस किया जा सकेगा।
इस नए सिस्टम के तहत ईपीएफ मेंबर्स के लिए एक यूनिफाइड मेंबर पोर्टल की सुविधा दी गई है। इस सिंगल इंटरफेस के जरिए मेंबर्स अपनी मेंबरशिप डिटेल्स, पीएफ बैलेंस, क्लेम स्टेटस और पेंशन से जुड़े रिकॉर्ड आसानी से देख सकते हैं। इसके अलावा साइट्स प्लेटफॉर्म में दावों के प्री-वैलिडेशन की ऑटोमेटिक व्यवस्था की गई है। यानी जब भी कोई मेंबर पैसे निकालने के लिए रिक्वेस्ट डालेगा, तो ऑफिस पहुंचने से पहले ही सिस्टम उसकी एलिजिबिलिटी चेक कर लेगा और किसी भी कमी के बारे में मेंबर को तुरंत बता देगा। इससे क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना बहुत कम हो जाएगी।
EPFO ने ऑटोमेटिक क्लेम सेटलमेंट के दायरे को भी काफी बढ़ा दिया है। अब पूरी तरह से केवाईसी कंप्लायंट एडवांस क्लेम के लिए ऑटो सेटलमेंट की लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 लाख रुपये कर दिया गया है। यानी 5 लाख रुपये तक का एडवांस क्लेम अब पूरी तरह ऑटोमेटिक प्रोसेस से सेटल हो जाएगा। अगर सिस्टम को किसी अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होगी, तो मेंबर ऑफिस जाए बिना ऑनलाइन ही अपनी बात रख सकेंगे। नए सेंट्रलाइज्ड पेमेंट आर्किटेक्चर की वजह से क्लेम सेटल होने वाले दिन ही पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगा। इसके अलावा फाइनल पीएफ सेटलमेंट पर मिलने वाले ब्याज के नियमों को भी बदल दिया गया है। अब केवल पिछले महीने के अंत तक का नहीं, बल्कि जिस दिन फाइनल पेमेंट ऑथराइज्ड होगी, उस दिन तक का ब्याज कर्मचारियों को मिलेगा जिससे उन्हें ज्यादा पैसा मिलेगा।
EPFO ने आंशिक निकासी यानी पार्शियल विड्रॉल के पुराने 13 नियमों को छोटा करके केवल तीन व्यापक कैटेगरीज में बदल दिया है। इनमें जरूरी जरूरतें, हाउसिंग की जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं। नए नियमों के तहत एलिजिबल मेंबर्स अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक हिस्सा निकाल सकते हैं। इसके साथ ही आधार लिंक यूएएन (UAN) धारकों के नौकरी बदलने पर उनका पीएफ अकाउंट अब अपने आप ट्रांसफर हो जाएगा, जिससे पेंशन के काम में निरंतरता बनी रहेगी। इस नए सिस्टम का फायदा ईपीएस पेंशनर्स को भी मिलेगा। वे अब देश के किसी भी EPFO ऑफिस में जाकर अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं और सेंट्रल पेंशन पेमेंट सिस्टम यानी सीपीपीएस के जरिए भारत के किसी भी बैंक अकाउंट में अपनी पेंशन पा सकते हैं।
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