पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड June 24, 2026, 12:58 IST
सारांश
क्रेडिट कार्ड का बिल आने पर बहुत से लोग केवल मिनिमम ड्यू यानी न्यूनतम देय राशि चुकाकर राहत की सांस लेते हैं। लेकिन वे इस बात से अनजान होते हैं कि यह आदत उन्हें भारी ब्याज के जाल में फंसा सकती है। इससे उनका बकाया बैलेंस कभी खत्म नहीं होता और कर्ज बढ़ता जाता है।

क्रेडिट कार्ड का केवल मिनिमम ड्यू चुकाने से आप पर भारी ब्याज का बोझ बढ़ सकता है।
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले बहुत से लोगों के सामने अक्सर यह उलझन आती है कि जब महीने का भारी-भरकम बिल सामने आता है और बजट थोड़ा तंग होता है, तो सबसे आसान रास्ता मिनिमम ड्यू यानी न्यूनतम बिल चुकाना ही नजर आता है। मान लीजिए कि आपके क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया बिल 50 हजार रुपये है और उसका मिनिमम ड्यू केवल 2,500 रुपये है, तो ऐसे में छोटा अमाउंट चुकाना एक बहुत ही प्रैक्टिकल और आसान समाधान लगता है। लेकिन ज्यादातर कार्ड यूजर्स इस बात से पूरी तरह अनजान होते हैं कि हर बार सिर्फ मिनिमम ड्यू चुकाने की यह आदत कितनी बड़ी और महंगी साबित हो सकती है।
हालांकि ऐसा करने से आपका अकाउंट चालू रहता है और आप लेट फीस से बच जाते हैं, लेकिन बचा हुआ अमाउंट भारी ब्याज के एक ऐसे चक्रव्यूह में फंस जाता है जिससे बाहर निकलना बहुत मुश्किल होता है। इसके चलते आपके लोन चुकाने का समय बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
सीधे शब्दों में कहें तो मिनिमम ड्यू वह सबसे कम रकम होती है जिसे कार्ड होल्डर को तय तारीख तक चुकाना जरूरी होता है ताकि उसका अकाउंट सही स्थिति में बना रहे और उस पर कोई लेट फीस या पेनल्टी न लगे। आमतौर पर यह कुल बकाया बिल का 5 पर्सेंट से 10 पर्सेंट तक होता है, जो अलग-अलग बैंकों या क्रेडिट कार्ड कंपनियों की पॉलिसी पर निर्भर करता है। जब आप इस मिनिमम अमाउंट को चुका देते हैं, तो आप डिफॉल्टर होने से बच जाते हैं और आपका क्रेडिट स्कोर भी सुरक्षित रहता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपका बचा हुआ बिल माफ हो गया है। इसके उलट, जो अमाउंट आपने नहीं चुकाया है, उस पर कंपनियां बहुत ही ऊंची दरों से ब्याज वसूलना शुरू कर देती हैं। केवल मिनिमम अमाउंट चुकाने से आपका क्रेडिट कार्ड पेमेंट असल में एक महंगे लोन में बदल जाता है। यह बैलेंस जितने लंबे समय तक बिना चुकाए रहेगा, उस पर उतना ही ज्यादा ब्याज जुड़ता जाएगा जो आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ेगा।
ज्यादातर क्रेडिट कार्ड यूजर कार्ड लेते समय रिवॉर्ड पॉइंट, कैशबैक ऑफर और एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस जैसी सुविधाओं पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन वे कार्ड के एनुअल पर्सेंटेज रेट यानी APR के असर को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे ही आप अपने कार्ड का पूरा बकाया बिल साफ नहीं करते हैं, वैसे ही बचे हुए अमाउंट पर ब्याज की रकम पहाड़ की तरह जमा होने लगती है। यह स्थिति तब और ज्यादा खराब हो जाती है जब पुराने बिल का भुगतान किए बिना ही आप उसी कार्ड से नई खरीदारी करना शुरू कर देते हैं।
ऐसे मामलों में ग्राहकों को लगता है कि वे हर महीने पेमेंट तो कर रहे हैं, लेकिन उनका कुल बकाया बिल बहुत ही धीमी रफ्तार से कम होता है क्योंकि उस पर लगातार ब्याज जुड़ता रहता है। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना जैसी कुछ ट्रांजैक्शन तो और भी ज्यादा महंगी साबित होती हैं क्योंकि उन पर पैसे निकालने वाले दिन से ही ब्याज लगना शुरू हो जाता है। इसी तरह शुरुआत में मिलने वाले कम ब्याज या जीरो पर्सेंट ब्याज के प्रोमोशनल ऑफर भी एक तय समय के बाद स्टैंडर्ड रेट में बदल जाते हैं।
क्रेडिट कार्ड के इस जाल से बचने के लिए सबसे बढ़िया और आसान तरीका यह है कि आप हमेशा मिनिमम ड्यू को सिर्फ एक सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल करें। सबसे बेहतरीन रणनीति यही है कि आप हमेशा अपने पूरे बिल का भुगतान इंटरेस्ट फ्री पीरियड यानी बिना ब्याज वाले समय के अंदर ही कर दें। ऐसा करने से आपकी खरीदारी पर ब्याज लगने का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है, आप पर कभी कर्ज नहीं चढ़ता और आपका क्रेडिट स्कोर भी बहुत मजबूत हो जाता है।
अगर कभी ऐसी स्थिति आ जाए कि आपके पास मिनिमम पेमेंट करने के अलावा कोई और रास्ता न बचे, तो कोशिश करें कि आने वाले महीनों में अपने खर्चों को काफी कम कर दें। ऐसा करने से आपका बकाया बिल ज्यादा नहीं बढ़ेगा और आप बहुत तेजी से अपना पूरा पुराना पेमेंट चुका पाएंगे। इसके साथ ही अपनी खर्च करने की आदतों पर कड़ी नजर रखें और बिना सोचे-समझे खरीदारी करने से बचें ताकि आपका कर्ज कभी भी आपके कंट्रोल से बाहर न जाए।
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