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4 min read | अपडेटेड October 27, 2026, 11:46 IST
सारांश
कच्चे तेल के भाव में आज गिरावट नजर आ रही है, हालांकि इसके बावजूद यह करीब 115 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है। मंगलवार को सऊदी अरब और तेहरान के बीच राजनयिक कोशिशें तेज होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया है।
भारतीय शेयर बाजार में आज 27 अक्तूबर को उतार-चढ़ाव का माहौल है। आज शुरुआती कारोबार में बाजार में भारी बिकवाली नजर आई, लेकिन बाद में इसने थोड़ी रिकवरी भी दिखाई। आज एक समय पर BSE Sensex करीब 400 अंक टूटकर 73,210.76 के स्तर तक लुढ़क गया था। दूसरी तरफ Nifty 50 भी करीब 100 अंक लुढ़ककर 22653.20 के लेवल पर आ गया था। हालांकि इस गिरावट के बाद बाजार ने हल्की वापसी की। रिपोर्ट लिखे जाने के समय सेंसेक्स में 156.44 अंकों की कमजोरी थी। वहीं निफ्टी 50 भी 32.25 अंकों की कमजोरी के साथ ट्रेड कर रहा था। यहां हम जानेंगे कि बाजार में आज की इस गिरावट के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
कच्चे तेल के भाव में आज गिरावट नजर आ रही है, हालांकि इसके बावजूद यह करीब 115 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है। मंगलवार को सऊदी अरब और तेहरान के बीच राजनयिक कोशिशें तेज होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने सोमवार को तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ मुलाकात की।
महंगा कच्चा तेल और अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर लगभग 4.97% की ब्याज दर भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाल रही है। इससे विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में निवेश करने से बच सकते हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण बाजार में फिलहाल दबाव बना रह सकता है। हालांकि, कंपनियों के दूसरी तिमाही के अच्छे नतीजे और घरेलू निवेशकों से लगातार आ रहा पैसा बाजार को सहारा दे सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। सोमवार, 26 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से 1462.49 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इससे बाजार पर दबाव बढ़ा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशक अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी बैठक के फैसले का भी इंतजार कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व के बयान से अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर और भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है।
शेयर बाजार पर आज सेक्टर स्पेसिफिक बिकवाली से भी दबाव बढ़ा है। आज निफ्टी IT इंडेक्स करीब 1.50 फीसदी तक लुढ़क गया है। पिछले कुछ समय में शानदार रैली के बाद अब IT शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग हो रही है। रिपोर्ट लिखे जाने के समय इंडेक्स में शामिल सभी शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे। सबसे ज्यादा गिरावट TCS, Coforge, Infosys, Wipro और Mphasis जैसे शेयरों में दिख रही है। इसके अलावा निफ्टी सीमेंट में भी 1.44 फीसदी की कमजोरी है।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया उतार-चढ़ाव के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 95.22 पर आ गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले डॉलर के मजबूत होने का रुपये पर दबाव पड़ा। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दखल की संभावना से रुपये में कुछ सुधार दिखा, लेकिन घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती और विदेशी फंड की निकासी के दबाव के कारण यह टिक नहीं पाया।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.17 पर खुला और कुछ नुकसान की भरपाई करते हुए 95.11 तक पहुंचा, लेकिन जल्द ही फिर कमजोर होकर 95.22 पर आ गया। यह अपने पिछले बंद भाव से 7 पैसे नीचे था। इसके पहले सोमवार को रुपया लगातार तीसरे दिन कमजोर हुआ और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे गिरकर 95.15 पर बंद हुआ। पिछले तीन सत्रों में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 77 पैसे की गिरावट आई है।
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