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4 min read | अपडेटेड May 01, 2026, 12:24 IST
सारांश
वोडाफोन-आइडिया (Vi) को सरकार ने बड़ी राहत दी है। कंपनी की एजीआर देनदारी को करीब 27 पर्सेंट घटाकर 64,046 करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही इन पैसों को चुकाने के लिए 5 साल का एक्स्ट्रा समय यानी मोरेटोरियम भी मिला है। इस खबर के बाद सोमवार को कंपनी के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

वोडाफोन-आइडिया (Vi) को एजीआर बकाये में मिली बड़ी राहत और भुगतान का नया प्लान।
कर्ज के भारी संकट से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया के लिए राहत की एक बड़ी खबर आई है। केंद्र सरकार ने कंपनी की AGR यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू की देनदारी में भारी कटौती कर दी है। सरकार ने कंपनी के पुराने बकाये को करीब 27% घटा दिया है, जिससे कंपनी के सिर से बोझ काफी कम हो गया है। आज यानी 1 मई को महाराष्ट्र दिवस की वजह से भारतीय शेयर बाजार बंद है, इसलिए इस खबर का असली असर सोमवार 4 मई को देखने को मिलेगा। सोमवार को जब ट्रेडिंग शुरू होगी, तो वोडाफोन-आइडिया के शेयरों पर निवेशकों की पैनी नजर रहने वाली है। कंपनी के लिए यह फैसला किसी संजीवनी से कम नहीं माना जा रहा है।
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम यानी DOT ने एजीआर बकाये की दोबारा गणना करने के लिए एक कमेटी बनाई थी। पहले यह बकाया 31 दिसंबर 2025 तक करीब 87,695 करोड़ रुपये तय किया गया था। लेकिन कमेटी की जांच और दोबारा आकलन के बाद इसे अब घटाकर 64,046 करोड़ रुपये कर दिया गया है। कंपनी ने खुद शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया है कि उसे सरकार की तरफ से इस फैसले की सूचना मिल गई है। बकाये में करीब 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की यह कमी कंपनी की फाइनेंशियल हालत को सुधारने में बहुत मददगार साबित होगी। इससे कंपनी को अपनी भविष्य की योजनाओं पर काम करने के लिए नई ताकत मिलेगी।
सिर्फ कर्ज कम ही नहीं हुआ है, बल्कि सरकार ने इसे चुकाने के लिए कंपनी को एक लंबा रोडमैप भी दिया है। कंपनी को इन पैसों का भुगतान करने के लिए 5 साल का मोरेटोरियम यानी छूट दी गई है। इसका मतलब है कि अगले 5 सालों तक कंपनी को इस बड़े बकाये का भुगतान नहीं करना होगा। कंपनी को अपना अंतिम बकाया दो किस्तों में चुकाना है, जिसे 10 साल की अवधि में फैलाया गया है। पहली किस्त की शुरुआत 5 साल बाद होगी। वित्त वर्ष 2031-32 से 2034-35 तक कंपनी को हर साल कम से कम 100 करोड़ रुपये देने होंगे। इसके बाद वित्त वर्ष 2035-36 से 2040-41 के बीच बाकी बची रकम को छह बराबर किस्तों में चुकाना होगा।
बड़े बकाये के अलावा, वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से जुड़े कुछ एजीआर बकाया भी हैं, जिनका पुनर्मूल्यांकन नहीं किया गया था। इनके लिए कंपनी को मार्च 2026 से मार्च 2031 तक हर साल 124 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। यह भुगतान बिना किसी बदलाव के जारी रहेगा। इसके बाद, मार्च 2036 से मार्च 2041 के बीच कंपनी को हर साल लगभग 10,608 करोड़ रुपये की किस्तों में अपना मुख्य बकाया चुकाना होगा। यह लंबी अवधि का प्लान इसलिए बनाया गया है ताकि कंपनी पर अचानक पैसों का दबाव न आए और वह अपना कामकाज सही तरीके से चला सके।
वोडाफोन-आइडिया पिछले काफी समय से भारी घाटे और कम होते ग्राहकों की समस्या से जूझ रही है। 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी पर कुल 2.09 लाख करोड़ रुपये का भारी कर्ज था और इसकी नेटवर्थ भी नेगेटिव 87,744 करोड़ रुपये हो चुकी है। सरकार की इस कंपनी में करीब 48.9 पर्सेंट की हिस्सेदारी है, इसलिए कंपनी को बचाना सरकार के लिए भी जरूरी है। इस राहत पैकेज का मकसद टेलीकॉम सेक्टर में कॉम्पिटिशन को बनाए रखना और वोडाफोन-आइडिया के करीब 20 करोड़ ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है। अगर यह कंपनी संकट में आती, तो पूरे सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ सकता था।
भले ही कंपनी आर्थिक मुश्किलों में है, लेकिन हाल के महीनों में कुछ सुधार के संकेत भी दिखे हैं। ट्राई की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी और मार्च के महीने में कंपनी ने नए मोबाइल ग्राहक जोड़ने में सफलता हासिल की है। मार्च के महीने में कंपनी के साथ 1 लाख से ज्यादा नए ग्राहक जुड़े हैं। वोडाफोन और आइडिया के मर्जर के बाद बनी यह कंपनी दुनिया की ग्यारहवीं सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है। अब सरकार से मिली इस बड़ी राहत के बाद कंपनी अपनी 4जी और 5जी सेवाओं के विस्तार पर ज्यादा फोकस कर पाएगी। सोमवार को बाजार खुलने पर यह देखना दिलचस्प होगा कि निवेशक इस बड़ी खबर को किस तरह लेते हैं।
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