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  1. सिर्फ रिजल्ट नहीं... RBI के इस फैसले से चमके टाटा केमिकल्स और टाटा इन्वेस्टमेंट के शेयर, समझें डीटेल

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सिर्फ रिजल्ट नहीं... RBI के इस फैसले से चमके टाटा केमिकल्स और टाटा इन्वेस्टमेंट के शेयर, समझें डीटेल

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड August 07, 2026, 13:41 IST

सारांश

आरबीआई द्वारा टाटा संस को अपर लेयर NBFC लिस्ट में बरकरार रखने के फैसले के बाद 7 अगस्त को टाटा ग्रुप के शेयरों में जोरदार तेजी आई। टाटा केमिकल्स का शेयर 5% और टाटा इन्वेस्टमेंट 6% तक चढ़ा।

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आरबीआई के फैसले के बाद टाटा ग्रुप के शेयरों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी। (Photo: Shutterstock)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 6 अगस्त को टाटा संस को अपर लेयर NBFC (NBFC-UL) की लिस्ट में बरकरार रखने के फैसले के बाद 7 अगस्त को टाटा ग्रुप के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली। इस खबर के आते ही टाटा केमिकल्स के शेयर में 5% तक का उछाल दर्ज किया गया। वहीं टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर भी 6% तक चढ़ गए। सुबह 9:38 बजे टाटा केमिकल्स का शेयर 3% की बढ़त के साथ 683.85 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। आरबीआई के इस कदम से साफ संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक ने टाटा संस को अभी NBFC-यूएल फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की मंजूरी नहीं दी है। हालांकि, टाटा संस की डी-रजिस्ट्रेशन की अर्जी पर अभी भी विचार चल रहा है।

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आरबीआई का फैसला क्यों है अहम?

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड को NBFC-UL की लिस्ट में शामिल रखना उसके डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन के फैसले को प्रभावित नहीं करता है। अपर लेयर में उन NBFC को रखा जाता है जिनकी एसेट 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा को पार कर जाती है और जिन पर सख्त नियमों की निगरानी जरूरी होती है। हर तीन साल में इस एसेट सीमा का रिव्यू किया जाता है। 400 अरब डॉलर वाले टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में रजिस्टर्ड है और इसे सबसे पहले साल 2022 में अपर-लेयर NBFC के रूप में कैटेगराइज किया गया था।

अब समझिए लिस्टिंग और लाइसेंस का पूरा मामला

आरबीआई के नियमों के अनुसार अपर-लेयर NBFC में शामिल कंपनियों को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य होता है। हालांकि, लिस्टिंग से बचने के लिए टाटा संस ने अपना सारा कर्ज चुका दिया और लगभग दो साल पहले NBFC लाइसेंस सरेंडर करने के लिए आवेदन किया था। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को बताया कि टाटा संस को अभी भी अपर-लेयर NBFC में इसलिए रखा गया है क्योंकि इसका फ्रेमवर्क सिद्धांत पर आधारित है।

टाटा संस का एसेट साइज तय 10 लाख करोड़ रुपये की सीमा से अधिक है। टाटा संस में टाटा केमिकल्स की 3% हिस्सेदारी है जिसकी वैल्यू लगभग 20,000 करोड़ रुपये है, जो टाटा केमिकल्स के खुद के मार्केट कैप से भी अधिक है। इसके अलावा टाटा संस में दूसरी बड़ी शेयरधारक शापूरजी पलोनजी ग्रुप भी लिस्टिंग का दबाव बना रही है ताकि वे अपना कर्ज कम करने के लिए हिस्सेदारी बेच सकें। शापूरजी पलोनजी ग्रुप पर लगभग 5.5 लाख करोड़ से 6 लाख करोड़ रुपये का कर्ज अनुमानित है।

टाटा इन्वेस्टमेंट के नतीजे में दिखा कमाई पर असर

टाटा संस द्वारा प्रमोटेड NBFC कंपनी टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1FY27) के नतीजे भी जारी किए हैं। इस तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 2% घटकर 143.5 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 146.3 करोड़ रुपये था। हालांकि, कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 4.5% बढ़कर 151.66 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल समान अवधि में 145.46 करोड़ रुपये था। कंपनी की डिविडेंड इनकम भी 25% बढ़कर 113.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। टाटा संस और ग्रुप की अन्य एंटिटीज की टाटा इन्वेस्टमेंट में 73.38% प्रमोटर हिस्सेदारी है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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