मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड October 11, 2026, 14:50 IST
सारांश
Summary: भारतीय शेयर बाजार में 8 हफ्तों की गिरावट के बाद वीकली आधार पर तेजी लौटी है। पिछले हफ्ते सेंसेक्स 562 अंक और निफ्टी 98 अंक चढ़कर बंद हुए। आने वाले हफ्ते में बाजार की चाल भारत और अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, 100 डॉलर के पार पहुंचे क्रूड ऑयल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से तय होगी।

8 हफ्तों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में लौटी वीकली रिकवरी।
भारतीय शेयर बाजार में पिछले 8 हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद आखिरकार वीकली आधार पर तेजी देखने को मिली है। बीता हफ्ता निवेशकों के लिए राहत भरा रहा और बाजार के प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे। हालांकि आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार की चाल तय करने में ग्लोबल संकेतों की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। बाजार के जानकारों और निवेशकों की नजर अब अगले हफ्ते जारी होने वाले भारत और अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल आर्थिक डेटा पर टिकी रहेगी। इन अहम आंकड़ों से ही यह साफ हो पाएगा कि बाजार में हाल में लौटी यह तेजी आगे टिक पाएगी या फिर बाजार में दोबारा मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिलेगा।
आने वाले हफ्ते में अमेरिका में महंगाई, रिटेल बिक्री और घरों की बिक्री से जुड़े कई बड़े आर्थिक आंकड़े सामने आने वाले हैं। इन डेटा पॉइंट्स का सीधा असर अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर मार्केट की उम्मीदों पर पड़ेगा। अगर अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं तो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में मजबूती आ सकती है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ घरेलू मोर्चे पर भी निवेशकों को भारत की खुदरा महंगाई यानी CPI, थोक महंगाई यानी WPI, बेरोजगारी दर, ट्रेड बैलेंस यानी व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार रहेगा, जो बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे।
ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जिसे भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा रिस्क माना जा रहा है। क्रूड ऑयल महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि इस बीच एक राहत की खबर भी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद रूस से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने का ऐलान किया है। इसके तहत रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल, नवंबर में 5 लाख टन और इसके बाद 10 लाख टन की अतिरिक्त सप्लाई करेगा। अगर इससे ग्लोबल मार्केट में फ्यूल की सप्लाई सुधरती है और क्रूड की कीमतों में नरमी आती है, तो यह भारतीय बाजार के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।
अगले हफ्ते निवेशकों की पैनी नजर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी रहेगी, जो लगातार 5% के ऊपर बनी हुई है। हाई बॉन्ड यील्ड की वजह से इक्विटी मार्केट से निवेशकों का आकर्षण कम होता है और विदेशी निवेश पर भी बुरा असर पड़ता है। अगर अमेरिकी महंगाई के आंकड़े कमजोर रहते हैं और यील्ड नीचे आती है, तो भारतीय बाजार को सपोर्ट मिलेगा। बीते हफ्ते के कारोबार की बात करें तो सेंसेक्स 562.63 अंक यानी 0.78% चढ़कर 72,472.33 पर और निफ्टी 50 भी 98.50 अंक यानी 0.44% की बढ़त के साथ 22,520.45 के स्तर पर बंद हुआ। 8 हफ्तों के बाद बाजार में यह पहली वीकली बढ़त दर्ज की गई है।
बीते हफ्ते सेक्टोरल परफॉर्मेंस में मिला-जुला असर देखने को मिला। टेलीकॉम में सबसे ज्यादा 3.72%, एफएमसीजी में 2.43%, पीएसयू बैंक में 2.31%, फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.03% और आईटी सेक्टर में 0.76% की तेजी दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ रियल्टी सेक्टर 4.19%, मेटल 4.18%, यूटिलिटीज 2.48%, कमोडिटीज 2.46% और पावर सेक्टर 2.22% की गिरावट के साथ बंद हुए। कुल मिलाकर अगले हफ्ते बाजार की चाल भारत और अमेरिका के इन्फ्लेशन डेटा, क्रूड ऑयल के प्राइसेज, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों के रुख से तय होगी। अगर क्रूड और यील्ड में नरमी आती है, तो बाजार की रिकवरी को आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।
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